UPA सरकार ने तलवार के साथ मिलकर रची थी एयर इंडिया को समाप्त करने की साजिश?

दुबई से प्रत्यर्पित कर अगस्ता वेस्टलैंड के सह आरोपी राजीव सक्सेना और विमान सौदों के बड़े लॉबिस्ट में शुमार दीपक तलवार को भारत लाए अभी दो दिन भी नहीं हुए हैं लेकिन कांग्रेस के साथ नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी तथा राष्ट्रीय लोकदल के शीर्ष नेताओं में हड़कंप मचा है। दीपक तलवार के आरोपों तथा जांच से सामने आए तथ्यों के बारे में ईडी ने कोर्ट को जो जानकारी दी है उससे स्पष्ट हो जाता है कि सोनिया गांधी की मनमोहन सरकार के दौरान देश के एयर इंडिया को खत्म करने की साजिश रची गई थी। अपनी जेबें भड़ने के लिए एयर इंडिया को खत्म कर विदेशी एयरलाइंस को फायदा पहुंचाने का खेल खेला गया था। इसी के तहत विदेश की तीन कंपनियों ने एयर इंडिया को खत्म करने के लिए दीपक तलवार से छह करोड़ अमेरिकी डॉलर का समझौता किया था। तलवार के देश आ जाने के बाद जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी सोनिया गांधी के मनमोहन सरकार के भ्रष्टाचार की कलई खुलती चली जाएगी और गांधी परिवार पर संकट बढ़ता चला जाएगा।

मालूम हो कि अपने देश की एयर लाइंस को नुकसान पहुंचाने के लिए पश्चिम एशिया के तीन देशों की एयरलाइंस ने दीपक तलवार को छह करोड़ डॉलर रिश्वत के रूप में दिए थे। ईडी ने कोर्ट को बताया कि साल 2008 में द्विपक्षीय समझौते को अंजाम देने के साथ ही अमीरात, कतर और एयर अरबिया ने बिचौलिया  दीपक तलवार को भुगतान कर दिया था। अब सवाल उठता है कि दीपक तलवार की इतनी पहुंच कैसे और क्यों हुई? तलवार के भारत आने से कांग्रेस में हड़कंप यूंही नहीं मचा है।

नागरिक उड्डयन समझौते में दीपक तलवार के बिचौलिया होने के कारण ही एयर इंडिाय को घाटा उठाना पड़ा था। पश्चिमी देशों के साथ एयर इंडिया का द्विपक्षीय सेवा समझौता हो या फिर विमानों की खरीद-फरोख्त का समझौता दीपक तलवार ही बिचौलिया होता था। ईडी ने कोर्ट को बताया कि कैसे तलवार को 2008 के जून से लेकर 2009 के फरवरी तक अमिरात, कतर और एयर अरबिया से बड़ी रकम मिली थी।

ईडी ने तलवार को रिमांड पर लेने के लिए जो पेपर दाखिल किए  उसमें बताया है कि किस प्रकार तलवार ने 45 मिलियन अमेरिकी डॉलर जैसी बड़ी रकम बैंक ऑफ सिंगापुर के अपने बैंक एकाउंट में ली थी। यह रकम उसने 2008 में जून से नवंबर के दौरान ली थी। इसके अलावा उसने 2008 से लेकर 2009 के बीच में कतर और एयर अरबिया से डेढ़ करोड़ अमेरिकी डॉलर लिए। ईडी ने उन सारे बैंक खातों का विवरण दिया है जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से गौतम खेतान द्वारा नियंत्रित था। मालूम हो कि हाल ही में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गौतम खेतान को भी गिरफ्तार किया है।

ईडी ने कहा है कि इतनी बड़ी रकम के लेन-देन किसी सामान्य व्यवसाय के तहत नहीं की गई है। बल्कि यह एक आपराधिक प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए दी गई रकम थी। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सारी अवैध लेन-देन सोनिया गांधी की मनमोहनी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान हुई है। उस समय देश के नागरिक उड्डय मंत्री राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया रहे अजीत सिंह और एनसीपी के ताकतवर नेताओं में शुमार प्रफुल्ल पटेल हुआ करते थे। इसलिए आज तलवार के देश आ जाने से कांग्रेस ही नहीं बल्कि एनसीपी औक आरएलडी में हड़कंप मचा है।

गौरतलब है कि ईडी ने दिपक तलवार के खिलाफ साल 2017 के मई में मामला दर्ज किया था। तलवार के खिलाफ सरकारी अधिकारियों के अधिकारों का दुरुपयोग कर देश को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया था। तलवार पर अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए विदेशी एयरलाइंसों को लाभदायक रूट और समय देकर भारतीय एयरलाइन को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। लाभदायक रूट और समय दूसरे एयरलाइंस को दे दिए जाने के कारण भारतीय एयर लाइंस को काफी घाटा उठाना पड़ा था। याद रहे कि उस समय एयर इंडिया को बेचने तक की नौबत आ गई थी।

 

URL : With the extradition of Talwar Stirred in Congress ,NCP and RLD!

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