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Movie Review : कृति न होतीं तो ‘मिमी’ में कोई रस ही ना होता

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विपुल रेगे। एक भारतीय सरोगेट माँ अपनी कोख को भले ही किराए पर दे दे किन्तु उसके पारंपरिक मूल्य बच्चे के लिए ममत्व का भाव जगा ही देते हैं। ‘मिमी’ एक मराठी फिल्म ‘मला आई व्हायचंय ‘ का हिन्दी रूपांतरण है। दर्शकों ने कृति सेनन और पंकज त्रिपाठी अभिनीत इस फिल्म का भावभीना स्वागत किया है।

ओटीटी मंच : नेटफ्लिक्स

फिल्म सरोगेसी की कठिनाइयों और भारत में इसके चलन पर भी एक स्पॉट लाइट डालती चलती है। सरोगेसी पर बनी मूल मराठी फिल्म गंभीर प्रकृति की थी लेकिन हिन्दी फिल्म के निर्देशक लक्ष्मण उतेकर ने इसे हास्य में लपेट कर प्रस्तुत किया है। एक लड़की मिमी बहुत अच्छी नृत्यांगना है। वह फिल्मों में जाना चाहती है लेकिन पैसा नहीं है। एक अमेरिकन दंपति संतानोत्पत्ति के लिए एक कोख खोज रहे हैं। इस काम में उनका ड्राइवर भानु उन्हें राह दिखाता है।

भानु उन्हें मिमी से मिलवाता है। अधिक पैसों का प्रस्ताव पाकर मिमी सरोगेसी के लिए तैयार हो जाती है। मिमी अपने माता-पिता से छुपकर ये काम करती है। एक दिन डॉक्टर अमेरिकी दंपति को बताता है कि मिमी के गर्भ में पल रहे बच्चे में कोई दोष है। ये जानकर दंपति बच्चे को अपनाने से मना कर देते हैं। अब मिमी गहरे संकट में फंस गई है। वह बच्चे को कोख में मारना नहीं चाहती है।

मिमी को हास्य के कलेवर में प्रस्तुत नहीं किया जाता तो निर्देशक युवा दर्शक से कनेक्ट नहीं कर सकता था। हास्य और मनोरंजन के माध्यम से सीख की कड़वी गोली सुलभता के साथ खिलाई जा सकती है। लक्ष्मण उतेकर ने ऐसा सरस स्क्रीनप्ले बनाया है कि दर्शक न केवल मनोरंजन पाता है, बल्कि फिल्म के सन्देश को भलीभांति पकड़ लेता है। पैसे के लिए सरोगेसी का मार्ग चुनना एक युवा लड़की के लिए कितना जोखिम से से भरा हो सकता है, फिल्म में यही दिखाया गया है।

यदि फिल्म के मुख्य पात्र के लिए कृति सेनन को नहीं लिया जाता तो कहानी के साथ अन्याय हो जाता। कृति और पंकज त्रिपाठी ने सुंदर अभिनय से फिल्म की गाड़ी खींची है। कृति अब शहद बन चुकी हैं। ये वह समय है कि अब वें सिंहासन पर आसीन हो सकती हैं। मैंने इसके पूर्व कृति का इतना सहज और स्वाभाविक अभिनय नहीं देखा। कुछ चुनौतीपूर्ण दृश्यों में हम देख सकते हैं कि एक अभिनेत्री के रुप में उन्होंने खूब विकास किया है।

उनकी एक और महत्वपूर्ण फिल्म आने जा रही है। प्रभास के साथ ‘आदिपुरुष’ में वे सीता की भूमिका निभा रही हैं। मिमी देखकर कहा जा सकता है कि आदिपुरुष में उनका चयन सटीक हुआ है। पंकज त्रिपाठी आज की तारीख़ में किसी भी फिल्म को चलाने की गारंटी बन गए हैं। उनके प्रशंसक करोड़ों में हैं। पंकज का स्टार स्टेटस सलमान, आमिर और शाहरुख़ से भी अधिक हो चुका है। लोग उन्हें लगातार देखना चाहते हैं।

मिमी में भानु की भूमिका में वे दर्शकों का दिल जीतने में पुनः सफल रहे हैं। निर्देशक ने फिल्म के द्वारा उस समस्या की ओर संकेत दिया है, जो सरोगेसी के कारण उत्पन्न हो रही है। कई विदेशी अभिभावक पहले डील करते हैं और बाद में बच्चा लेने से मना कर देते हैं। फिल्म के एक दृश्य में दिखाया गया है कि गलती समझकर बच्चे को पुनः लेने आए अभिभावकों को मिमी देने से इनकार कर देती है।

अब वह आत्मिक रुप से इस बच्चे से जुड़ चुकी है। यहाँ मिमी के द्वारा भारतीय माँ का रुप दिखाया गया है। किसी और के बच्चे के लिए वह अपना कॅरियर बलिदान कर देती है। फिल्म को दर्शकों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इसे समीक्षकों द्वारा मिश्रित प्रतिक्रिया मिल रही है। हालांकि बेहतर कंटेंट, कृति और पंकज का अविस्मरणीय अभिनय फिल्म को चला ले जाएगा। कृति इस फिल्म से सुपर सितारा बन गई है। सितारों का जन्म ऐसे ही होता है। संघर्ष के मार्ग पर चलते-चलते एक दिन अचानक सफलता उनसे टकरा जाती है।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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