आदि गुरु शंकराचार्य की शिक्षाओं से भटक चुके है स्वरूपानंद सरस्वती!

आधुनिक शंकराचार्य स्‍वरूपानंद सरस्‍वती के इन बयानों पर जरा गौर फरमाएं-

* Honeymooners caused 2013 Kedarnath floods: Swaroopanand Saraswati

* Shani worship by women will increase rapes: Swaroopanand Saraswati

* Maharashtra drought result of ‘unworthy’ Sai worship: Swaroopanand

इन बयानों को पढ़ कर कहीं से नहीं लगता कि स्‍वरूपानंद सरस्‍वती को सत्‍य-सनातन धर्म का जरा भी ज्ञान है! कहीं से ऐसा नहीं लगता कि आदि गुरू शंकराचार्य के ज्ञान की बूंद भर भी स्‍वरूपानंद के जीवन में टपकी है! उनके ये सारे बयान अंधविश्‍वास बढ़ाने वाले किसी ढोंगी साधु के बयान लगते हैं!

हिदू देवी-देवता इतने निष्ठुर नहीं हैं, स्वरूपानंद सरस्वती जी कि हनिमून मनाने पर लोगों की जान ले लें और साई की पूजा करने पर लोगों को प्यासा मार दें! प्लीज सत्य सनातन का दुनिया भर में इतना मजाक मत उडाईए! आप शंकराचार्य के पद पर आसीन हैं?

पूरे सनातन में देवताओं द्वारा पापी को सजा देने की बात कहीं नहीं है! ईश्वर द्वारा पापी को सजा यह पूरी तरह से पश्चिमी धर्म- यहूदी, क्रिश्चिनिटी और इस्लाम की अवधारणा में है। पता नहीं आप किस तरह के शंकराचार्य हैं कि वेद और उपनिषदों से लेकर आदि गुरु शंकराचार्य और स्वामी विवेकानंद की यह व्याख्या आज तक नहीं समझ पाए हैं कि आत्मा और परमात्मा एक है, अद्वैत है!

मैं प्यासा हूं तो परमात्मा भी प्यासा है और यदि परमात्मा प्यासा है तो मैं भी प्यासा हूं! अद्वैत वेदांती आदि गुरु शंकराचार्य के मठों पर आज किस तरह के लोगों का कब्जा है, जो ठीक से सनातन-सत्य धर्म को भी नहीं समझते, नहीं जानते?

बिना आदि गुरु को पढे अदालत द्वारा शंकराचार्य बनने का ही यह परिणाम है कि कभी स्वरूपानंद सरस्वती कहते हैं कि हनिमून कपल्स की वजह से केदारनाथ में आपदा आई तो कभी कहते हैं मराठवाडा में सूखा शिरडी साईं की पूजा के कारण पडा है! या फिर कभी कहते हैं कि शनि की पूजा महिलाओं पर अत्याचार बढाएगा! स्वरूपानंद जी, भगवान श्रीकृष्ण के कर्म के सिद्वांत की यदि जरा भी आपमें समझ होती तो हिंदू धर्म को बदनाम करने वाला ऐसा बयान आप कभी नहीं देते!

हिंदू धर्म में तो स्वयं प्यासा रह कर दूसरों की प्यास बुझाने की बात कही गई है, फिर हमारे देवता अपनी संतान को प्यासा क्यों मारेंगे? हमारे सभी देवता स्वयं शादीशुदा हैं, यहां क्रिश्चिनिटी की तरह कुंवारी मरियम से संतानोत्पत्ति की कल्पना नहीं है तो फिर हनिमून कपल्स पर उनका प्रकोप क्यों टूटेगा? शक्ति के बिना शिव को ‘शव’ कहा गया है, फिर शनि की पूजा से शक्ति का अनिष्ट कैसे होगा? ‘सौंदर्य लहिरी’ में आदि गुरु शंकराचार्य ने ‘त्रिपुर सुंदरी’ की सुंदरता का जिस तरह से वर्णन किया है, उसे पढ कर तो शायद स्वरुपानंद सरस्वती आदि गुरु शंकर को भी श्राप दे दें!

स्वरूपानंद जी मैं यह तो नहीं कहूंगा कि आप सनातन धर्म को नहीं जानते, लेकिन यह सच है कि पिछले कुछ वर्षों में आपके कृत्य क्रिश्चिनिटी को बढावा देने वाले प्रतीत हो रहे हैं! आप अप्रत्यक्ष रूप से क्रिश्चिनिटी के प्रसार की कोशिश में जुटे हैं, क्योंकि पाप, प्रायश्चित और पाप की सजा- ओल्ड टेस्टामेंट, न्यू टेस्टामेंट और कुरान में है, श्रीकृष्ण की गीता और आदि गुरु के वेदांत में नहीं! आप यह क्यों कर रहे हैं?

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