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Category: आजाद भारत

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संविधान के मूल ढाँचे की व्यर्थ बहस

शंकर शरण । डॉ. अंबेदकर ने कहा था: ‘‘राज्य के विभिन्न निकायों के काम सुचारू रूप से चलाने के लिए संविधान एक औजार मात्र है। यह औजार इस काम के लिए नहीं कि कुछ खास...

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हम ले के रहेगें आज़ादी

सारा कुमारी। (हम ले के रहेगें आज़ादी) एक बहुत ही मशहूर कहावत है, खुद को स्वतंत्र करने की इच्छा हो तो सबसे पहले कोई एक्शन नहीं लेना होता हैं, वरन मन में केवल एक...

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मुफ्त अनाजः बहुत अच्छा लेकिन….?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक । देश के 81 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन और लगभग 25 लाख पूर्व सैनिकों को पेंशन में फायदे की घोषणा, जो सरकार ने अभी-अभी की है, उसका कौन स्वागत नहीं...

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उदयपुर का ‘प्रताप गौरव केंद्र’

‘प्रशांत पोळ उदयपुर झीलों की नगरी हैं. पर्यटन की नगरी हैं. शान-शौकत, ऐशो-आराम की नगरी हैं. फाइव्ह स्टार, सेवन स्टार हाॅटेलों का यह शहर हैं. डेस्टीनेशन वेडिंग का स्थान हैं. बाॅलीवुड के कलाकारों के...

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जरा सोचिए !

रामेश्वर मिश्र पंकज। जब आप यानी जो भी व्यक्ति भारत की शिक्षा में जो कुछ चल रहा है उसे मैकाले की देन कहता है तो वह मैकाले को कितना अधिक शक्तिशाली प्रचारित कर रहा...

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2005 में शंकर शरण जी का नाथूराम गोडसे पर लिखा लेख, जो आज भी होता है बार-बार वायरल !

डॉ. शंकर शरण । नाथूराम गोडसे के नाम और उनके एक काम के अतिरिक्त लोग उन के बारे में कुछ नहीं जानते। एक लोकतांत्रिक देश में यह कुछ रहस्यमय बात है। रहस्य का आरंभ...

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चीन के डर से नेहरू ने सिक्किम का विलय रोका, रॉ की मदद से इंदिरा गांधी ने पूरा किया अधूरा काम

जब भारत आजाद हुआ, उस वक्त सिक्किम एक रियासत हुआ करता था। शुरुआत में सिक्किम को भारत में मिलाने की बात सरदार पटेल ने की थी लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने चीन...

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भारत में ब्राह्मणों की हालत दयनीय, फिर भी ब्राहमणवाद का हौव्वा!

गौरव गौड़। एक फ्रांसीसी पत्रकार फ्रांसिस गुइटर की रिपोर्ट है जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं : दिल्ली के 50 शुलभ शौचालयों में तकरीबन 325 सफाई कर्मचारी हैं। यह सभी ब्राह्मण वर्ग के हैं। दिल्ली...

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तथ्यों के आलोक में तय कीजिए कि संविधान का निर्माता असल में कौन था ?

उमेश चतुर्वेदी । आज बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती है…उन्हें ही संविधान के जनक के तौर पर स्वीकार कर लिया गया है….लेकिन संविधान के निर्माण से जुड़ी कुछ तथ्यों को जानना जरूरी है…...

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ललित नारायण मिश्र की हत्या में आया था इंदिरा गांधी के OSD का नाम ?

बिहार को अगर एक आम समझिए, तो इसकी एक फाँक (टुकड़ा) है मिथिला। यहीं पैदा हुए थे ललित नारायण मिश्र (Lalit Narayan Mishra)। सहरसा जिले के बलुआ बाजार में। मिथिला में ललित नारायण मिश्र...

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ग्रांड ट्रंक रोड के असली नायक: चन्द्रगुप्त मौर्य

Sonali Misra. क्या ग्रांड ट्रंक रोड वाकई शेरशाह सूरी ने बनाई थी? यह प्रश्न आपके मन में बार बार इसलिए कौधना चाहिए क्योंकि यही वाक्य हमें इतिहास में सिखाया जाता है। पर भारत का...

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गांधी नहीं बल्कि सुभाष चंद्र बोस ने दिलाई थी देश को आजादी, अंबेडकर ने बी बी सी के साथ अपने एक पुराने इंटरव्यू में ऐसा कहा

जब भारत पर से अंग्रेज़ी शासन हटने की बात आती है, तो अधिकांश लोगों के ज़ेहन में गांधी की छवि उतर आती है. और ऐसा होना लाज़िमी भी है. जितनी भी स्कूली पुस्तकों में...

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नेहरू ने सुरक्षा परिषद में ही नहीं, चीन के परमाणु शक्ति संपन्न बनने में भी की थी मदद!

देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन की स्थायी सदस्यता के लिए किस तरह अंतरराष्ट्रीय लाॅबिंग की थी, यह कल आपने इंडिया स्पीक्स डेली पर पढ़ा। आज आपको...

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जवाहरलाल नेहरू ने सुरक्षा परिषद में चीन की कैसे की थी लाॅबिंग, पढ़िए सीआईए के एक अधिकारी का खुलासा!

कल चौथी बार चीन ने सुरक्षा परिषद में पाकिस्तानी आतंकवादी व जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर के पक्ष में वीटो का इस्तेमाल कर भारत द्वारा उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की कोशिशों को रोक...

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गांधी जी और शास्‍त्री जी में कुछ समानता, लेकिन ढेर सारी असमानता!

महात्‍मा गांधी व लालबहादुर शास्‍त्री- दोनों की जयंती एक ही दिन होती है। दोनों में कुछ बातें समान थीं, जैसे- दोनों बेहद सादगी से जीते थे और दोनों स्‍वयं के प्रति ईमानदार थे। दोनों...

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लालबहादुर शास्त्री की मौत से पर्दा उठाने के तीन गंभीर प्रयास!

शास्त्री की मौत को लेकर हाल-फिलहाल तीन गंभीर प्रयास किए गये हैं। पहला, केंद्रीय सूचना आयोग ने शास्त्री जी के अंतिम संस्कार और पोस्टमार्टम के बारे में जानकारी मांगने को सही बताते हुए इसे...

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गुलामी के चाबुक और युद्ध के नश्तर सहे तब जाकर बना आज का समर्थ भारत!

1962 का साल भारत भूमि की देह पर बड़ी सी खरोंचे छोड़ गया था। पड़ोसी ने पीछे से वार किया। देश का तत्कालीन प्रधानमंत्री चीन की मक्कारी भांपने में नाकाम रहा। नाकामी ऐसी कि...

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आपातकाल का धूमकेतु राजनारायण!

रामबहादुर राय। राजनारायण और इंदिरा गांधी में एक समानता है। सिर्फ एक ही। नहीं तो ये दोनों राजनीति के दो समानान्तर पथ हैं। जो मिलते नहीं, साथ–साथ अपने–अपने जीवन मूल्यों से संचालित होते रहे...

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आपातकाल की बरसी: इंदिरा ने हमेशा ही लोकतंत्र के खिलाफ काम किया!

देश के लोकतंत्र पर आघात करने वाला आपाताकाल को लगे हुए 43 साल गुजर गए, लेकिन देश के लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए वह नजारा आज भी याद आ ही जाता है। आपातकाल...

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महात्मा गांधी से लेकर राहुल गांधी तक, कांग्रेस के DNA में ही नहीं है लोकतंत्र!

कर्नाटक प्रकरण को लेकर आज-कल लोकतंत्र और उसकी हत्या का शोर हर जगह मचा है! शोर मचाने वालों में कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी सबसे आगे दिखते हैं! जबकि कांग्रेस के इतिहास पर...

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