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Category: सनातन हिंदू धर्म

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जो फूल अंजुली में गिरता है, समेट लो; अन्यथा अभागे के अभागे ही रहोगे!

विचार और सत्य एक-दूसरे के शत्रु हैं! हां, लेकिन यह भी सच है कि विचार से ही सत्य की यात्रा शुरू होती है। जैसे यात्रा के पहले पड़ाव को छोड़े बिना अंतिम लक्ष्य तक...

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सनातन धर्म विरुद्ध कार्य करने वाले सरकारी हिंदुओं जानो इस वर्ष का भैरव भवानी संवाद और स्मरण रहे भोगना समस्त संसार को ही है

अजय शर्मा, वाराणसी। सनातन परंपरा से प्राण-प्रतिष्ठित देवी देवताओं की सेवा-समर्चना में शास्त्र विरुद्ध कृत्य से गर्भग्रह में एक प्रस्फुटन होता है। सनातन धर्म के विरुद्ध कार्य करने वाले सरकारी हिंदुओं जानो इस वर्ष...

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सूतक-पातक पर हमारे शास्त्रों ने जोर क्यों दिया?

मुझे आश्चर्य है कि हिंदुओं का एक वर्ग इस कदर ‘सरकारी’ हो चुका है कि सनातन परंपरा को समझने की जगह उसे ढोंग, अविश्वास, मुहुर्त कुछ नहीं होता, जैसी मूढ़ता पर खुलेआम उतर गया...

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विश्वनाथ कॉरिडोर में ध्वंश हुए महत्वपूर्ण पौराणिक “अमृतेश्वर महादेव मंदिर”.

अमृतेश्वर नामेदं लिङ्गमानंदकानने।एतल्लिङ्गस्य संस्पर्शाद् मृतत्वंलभेद्ध्रुवम्।।भावार्थ:-आनंद वन में यह लिङ्ग अमृतेश्वर नाम से है।इस लिङ्ग को स्पर्श करने से अवश्य ही अमृतत्व प्राप्त होता है।। अमृतेश्वर संस्पर्शान्मृताजीवन्ति तत्क्षणात्।अमृतत्वं भजंतेऽ‌‌‍त्र जीवंतःस्पर्शमात्रतः।।भावार्थ:-अमृतेश्वर के स्पर्श मात्र से मृत...

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सत्यनारायण कथा में छिपा है परमात्मा का सबसे बड़ा ज्ञान!

आज पिताजी द्वारा गांव के मंदिर में सत्यनारायण पूजा का आयोजन किया गया। सत्यनारायण पूजा के जरिए एक पंक्ति में मानव मुक्ति का संदेश छिपा है कि ‘एक मात्र नारायण ही सत्य हैं, बाकी...

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यति नरसिंम्हानंद गिरी जी की अपील हिंदू समाज के नाम।

हर हर महादेव 13 दिसम्बर 2021विश्व के प्रत्येक सनातनी से एक साधु का विनम्र निवेदन प्रिय बन्धु/बहनसादर प्रणाम मैं श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े का महामंडलेश्वर स्वामी नरसिंहानंद गिरी आप सभी से ये अनुरोध करता हूँ...

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संयुक्त राष्ट्र ने कैलाश राष्ट्र को किया स्वीकार!

कैलाश राष्ट्र ने संयुक्त राष्ट्र के ओएचआरसी के अल्पसंख्यक मुद्दों के मंच से 2 और 3 दिसंबर को जेनेवा मे आयोजित 14वें सत्र के दौरान भारत मे हिंदू संप्रदायों के उत्पीड़न को प्रस्तुत किया।संयुक्त...

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श्वेताश्वर उपनिषद के शांति पाठ में हर सनातनी की उन्नति का मंत्र है!

श्वेताश्वतर, मेरे घर के इस नाम में उपनिषद का ज्ञान भी है और मेरी भार्या श्वेता का नाम भी। श्वेताश्वतर एक ऋषि थे, जिनकी अध्यक्षता में अरण्य में एक धर्म सभा का आयोजन किया...

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गणेश की शारीरिक संरचना की भी एक दार्शनिक दृष्टि है।

Hemant Sharma. गणेश शुभांकर हैं। विघ्नहर्ता हैं। कुशल प्रबंधक हैं। आदि लेखक हैं।सृष्टि के पहले लिपिकार हैं।शास्त्रों के ज्ञाता हैं।ऋद्धि और सिद्धि उनकी पत्नी है।शुभ यानी समृद्धि और लाभ उनकी संतानें हैं।बुरी नजरों के...

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अब तो ढूंढो नया रास्ता

गुंडों  से  इतना  डरते  हो , आखिर  क्या  मजबूरी है? क्या तुम ब्लैकमेल होते हो , आखिर क्या कमजोरी है ? जिसने तुम पर किया भरोसा, उसने क्यों धोखा खाया ? इतना डर कर काम करोगे...

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वासना से मिलने वाले दुःख: कारण और निदान

कमलेश कमल। “वासना-विकारहीनता के बिना प्रकाश-प्राप्ति संभव ही नहीं है।”- बुद्ध वासना और इससे मिलने वाले दुःखों की चर्चा जनमानस में परिव्याप्त है, पर इनकी उत्पत्ति, प्रकृति और अंतर्संबंध पर अंतर्दृष्टि का सर्वथा अभाव...

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भगवान जगन्नाथ पर आक्रमण कर आर्य समाजियों ने यह दर्शा दिया कि सनातन एकता में इन जैसों की जड़ता सबसे बड़ी बाधा है।

Sandeep Deo. कल भगवान श्रीजगन्नाथ यात्रा का आरंभ हुआ। इससे जुड़ी एक कथा मैंने कही, जो सिर्फ भक्त हृदय ही समझ सकता है, शुष्क ‘एक किताबी’ मजहब या पंथ के बूते की बात नहीं...

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पुराणों की प्राचीनता पर एक शोधपूर्ण नजर!

पुराणों पर मध्यकाल से ही विवाद होता आया है। अंग्रेज काल में अंग्रेजों ने इसे अप्रमाणिक ग्रंथ कहना शुरू किया था फिर उनका अनुसारण हमारे यहां के तथाकथित इतिहासकारों ने भी किया। कहते हैं...

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पुराण श्रृंखला-2 पुराणों का स्पष्ट उल्लेख अथर्ववेद के मंत्रों में है।

पुराण प्राचीनता में वेद के समकक्ष हैं। अज्ञानता और अंग्रेजों के प्रभाव के कारण कुछ वर्ग इसे 2000 साल पुराना बता देते हैं, जबकि सच यह है कि शुंग और गुप्त काल में अन्य...

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आज से पुराणों को लेकर छोटे-छोटे पोस्ट की एक श्रृंखला आरंभ कर रहा हूं। पुराण श्रृंखला-1

पुराणों में देव कथाओं के साथ हमारा इतिहास भी वर्णित है, जिसके कारण इसे नष्ट कर दिया गया ताकि हिंदुओं और हिंदुस्तान पर शासन करना आसान हो जाए। बिना इतिहास के समाज की क्या...

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क्यों पड़ते है श्री जगन्नाथ भगवान प्रत्येक वर्ष बीमार ?

उड़ीसा प्रान्त में जगन्नाथ पूरी में एक भक्त रहते थे , श्री माधव दास जी अकेले रहते थे, कोई संसार से इनका लेना देना नही। अकेले बैठे बैठे भजन किया करते थे, नित्य प्रति...

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उन्हें हमारे पूर्वजों पर विश्वास है

स्वामी सूर्यदेव जी। हमारे यहां वैदिक वांग्मय में किसी भी मंत्र का तीन तरह से अर्थ लिया जाता है. आधिदैविक-आधिभौतिक-आध्यात्मिक ऋषि मानते हैं कि जो भी ब्रह्मांड में है वह इस पिंड यानी हमारे...

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