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Category: इतिहास

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दरभंगा नरेश लक्ष्मेश्वर महाराज की राष्ट्र निर्माण में भूमिका!

दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह कांग्रेस के संस्थापक सदस्य थे। 1888 में कांग्रेस सत्र इलाहाबाद में होना था, अंग्रेजी सरकार ने निषेधा लगा दिया की किसी सार्वजनिक जगह पर कार्यक्रम नहीं हो सकता है। देशभर...

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क्षत्रिय के लिए राजपूत का उपयोग कब से?

धीरेन्द्र सिंह जादौन. रामायण और महाभारत के समय से लेकर चीनी यात्री हुएनसांग के भारत -भ्रंमन (ई0सन् 629-645 ) तक राजपूत शब्द जाति के अर्थ में प्रयुक्त नहीं होता था ।प्राचीन इतिहास और पुराण...

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अमर बलिदानी राजा शंकर शाह कुँवर रघुनाथ शाह

चन्द्रशेखर पटेल, जबलपुर पूजे न शहीद गए तो फिर, यह पंथ कौन अपनाएगा? तोपों के मुँह से कौन अकड़ अपनी छातियाँ अड़ाएगा? चूमेगा फन्दे कौन, गोलियाँ कौन वक्ष पर खाएगा? अपने हाथों अपने मस्तक...

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जयपुर के इस किले का खजाना खोजने के लिए इंदिरा गांधी ने बुला ली थी सेना, कभी आप भी देखकर आइए यहां की चमक

राजस्थान के लगभग हर शहर में आपको फोर्ट, पैलेस, हवेली जैसी कई खूबसूरत ऐतिहासिक जगहें दिख जाएंगी। ये राज्य भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में काफी प्रसिद्ध है, यहां आपको स्थानीय लोगों के...

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क्या महारानी एलिजाबेथ-II थीं पैगंबर मोहम्मद की वंशज:36 साल पहले 43 पीढ़ियों की स्टडी से हुआ दावा; निधन के बाद फिर सुर्खियों में

1986 में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर को महारानी एलिजाबेथ-II की सुरक्षा बढ़ाने की अपील से जुड़ा एक खत मिला। खत में लिखा था- ‘बहुत कम ब्रिटिशर्स को पता है कि रानी की रगों...

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भारतीय इतिहास पुनर्लेखन का आन्दोलन खड़ा करने वाले इतिहास पुरुष ‘हमारे ठाकुर रामसिंह जी’

यह आलेख एक ऐसे इतिहासपुरुष के बारे में लिख रहा हूँ, जिनके बारे में युवा वर्ग कदाचित ही जानता होगा भले ही उनके नाम पर विकिपीडिया पेज बना हुआ है। यह लेख समर्पित है...

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पुष्कर तीर्थ का वास्तविक इतिहास

ईरान में बुखारा नामक स्थान पर एक व्यक्ति का जन्म हुआ जिसका नाम ब्रह्मा पड़ा, क्योंकि उसने ब्रह्मवाद का प्रतिपादन किया। यह बुखारा नाम मूलतः पुष्कर था‌। अपभ्रंश होते-होते वही पुष्कर शब्द क्रमशः पुकर,...

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खलीफत आंदोलन (१९२०) करने से नुपूर शर्मा को दंडित (२०२२) करने तक, सौ सालों से वैश्विक इस्लाम को सब से अधिक प्रोत्साहन भारत के हिन्दू नेताओं ने दिया है

शंकर शरण। हिन्दुओं का दुर्भाग्य कि उन के अपने नेता उन्हें जिहादियों के सामने परोस देते हैं, और फिर कोई जिम्मेदारी नहीं लेते। जिम्मेदारी लेने पर तो कुछ करना होगा। सब से पहले, भूल सुधार। किन्तु चूँकि...

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‘रिक्लेमिंग हिन्दू टेम्पल्स: एपिसोड्स फ्रॉम एन ओप्प्रेसिव एरा’ पुस्तक इस्लामिक आक्रांताओं के ‘काले युग’ का काला चिट्ठा है।

पुस्तक का नाम : ‘रिक्लेमिंग हिन्दू टेम्पल्स: एपिसोड्स फ्रॉम एन ओप्प्रेसिव एरा’ लेखक: डॉ चांदनी सेनगुप्ता भाषा : अंग्रेजी प्रकाशक: गरुड़ प्रकाशन पृष्ठ: 227 मूल्य : 299 (प्रिंट) क्या आपने ‘रिक्लेमिंग हिन्दू टेम्पल्स: एपिसोड्स...

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विभाजन की चुभन भाग-4

विभाजन की चुभन श्रंखला का यह चौथा और अंतिम भाग है। पाठक पिछले 3 भाग इस लिंक से पढ़ सकते हैं। खंडित भारत को पुनः अखंड बनाएंगे.. 15 अगस्त 1947. खंडित भारत का स्वतंत्रता...

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विभाजन की चुभन-भाग 3

विभाजन की चुभन श्रंखला का यह तीसरा भाग है। पाठक पिछले 2 भाग इस लिंक से पढ़ सकते हैं। … और कांग्रेस ने विभाजन स्वीकारा ! प्रशांत पोळ अपने देश में चालीस का दशक...

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विभाजन की चुभन-भाग 2

प्रशांत पोळ यह विभाजन की चुभन लेख श्रृंखला का भाग 2 है। पाठक इस श्रृंखला का भाग-1 यहाँ पढ़ सकते हैं। ‘डायरेक्ट एक्शन’ का डर…! हमारे देश में जब 1857 का स्वातंत्र्य युध्द समाप्त...

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जरा सोचिए !

रामेश्वर मिश्र पंकज। जब आप यानी जो भी व्यक्ति भारत की शिक्षा में जो कुछ चल रहा है उसे मैकाले की देन कहता है तो वह मैकाले को कितना अधिक शक्तिशाली प्रचारित कर रहा...

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विभाजन की चुभन-भाग 1: प्रशांत पोळ

यह लेख सुप्रसिद्ध लेखक श्रीमान प्रशांत पोळ जी की अनुमति से प्रकाशित किया गया है। विभाजन टल सकता था..! ‘और 15 अगस्त 1947 को हमारा देश बट गया..!’ इस वाक्य के साथ कहानी का...

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वन्दे मातरम् को राष्ट्र गान होने का सम्मान क्यों नही मिला?

भारत ने अगस्त 15, 1947 को अंग्रेज़ी राज से स्वतंत्रता पायी और जनवरी 26, 1950 से स्वतंत्र भारत का संविधान लागू हुआ, ये तो सभी जानते हैं। हम में से कितने ये जानते हैं...

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महान ज्योतिष आचार्य वराहमिहिर

श्वेता पुरोहित। आचार्य वराहमिहिर गौड़ ब्राह्मण थे। इनके पूर्वज मूल रूप से श्रीनगर (कश्मीर) के निवासी थे। कालान्तर में ये लोग वहां से मालव भूमि में ‘श्री हट्ट’ नामक गांव में आ बसे। तब...

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सतत सक्रिय, ध्येय साधक और प्रेरणा पुंज ‘हमारे चेतराम जी’

यह लेख एक ऐसे महान व्यक्तित्व के जन्म दिवस पर लिखा जा रहा हैं, जिनके लिए लोगों द्वारा व्यक्त की गई उपमायें कुछ ऐसी हैं: सेवाव्रती, कर्मठ स्वयंसेवक के साथ तत्वनिष्ठ कार्यकर्ता, सम्पर्क पुरोधा...

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ताजमहल को शाहजहाँ ने बनवाया इसका कोई प्रमाण नहीं

पुरातत्व विभाग- कल से समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि एक rti के जवाब में पुरातत्व विभाग के द्वारा बताया गया कि ताजमहल के तहखाने में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तिया...

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