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Category: पाॅप कल्चर

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ताना जी : द अनसंग वॉरियर – हम इस फिल्म को साथ घर ले आते हैं

150 करोड़ की भव्य लागत से बनी ‘तानाजी : द अनसंग वॉरियर का बॉक्स ऑफिस पर क्या परिणाम होगा, मैं नहीं जानता। मैं ये भी नहीं जानना चाहूंगा कि पहले दिन इस फिल्म ने...

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साल की फिल्मों का लेखा जोखा : फिल्म उद्योग ने पांच हज़ार करोड़ की कमाई का आंकड़ा छुआ

2019 का साल फिल्म उद्योग को भारी-भरकम आर्थिक लाभ दे गया। हिन्दी फिल्म उद्योग ने इस वर्ष लगभग पांच हज़ार करोड़ का व्यवसाय किया है। इस व्यवसाय में हिन्दी व अन्य भाषाओँ की डब...

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फिल्म रिव्यू : सलमान ख़ान का कॅरियर अस्त कर देगी दबंग-3

फ़िल्में सांप-सीढ़ी का खेल होती हैं। अच्छी फिल्म किसी एक्टर को रातोरात सितारा बना देती है तो कोई बहुत खराब फिल्म शिखर पर बैठे सितारे को नीचे ला फेंकती हैं। दबंग-3 सलमान खान के...

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रिव्यू – जुमानजी द नेक्स्ट लेवल – देखने में खूबसूरत और महसूस करने में रोलर कोस्टर राइड

गेम बदल चुका है। जुमांजी की दुनिया में हरियाली लाने वाली मणि चुरा ली गई है। चारों ओर मरुस्थल और बर्फ है। हरियाली का नामोनिशान नहीं बचा है। खिलाडियों को जुमांजी को बचाने के...

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Akshay kumar, इस देश से तो आपको इतनी सी शिकायत भी नहीं होनी चाहिए!

एक समय था जब अक्षय कुमार की चौदह फ़िल्में लगातार पिटती चली गई। फिर इस राष्ट्रवादी अभिनेता ने सोचा कि अब भारत में रहने का क्या लाभ है। नफे-नुकसान के बारे में गंभीरता से...

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फिल्म समीक्षा: पति, पत्नी और वो – मनोरंजन, हास्य और सामाजिक सन्देश देती है ये फिल्म

अब फिल्म उद्योग और नियमित फ़िल्में देखने वाले दर्शक जानते हैं कि इन दिनों ‘बी टाउन’ फिल्मों का ट्रेंड चल रहा है और बड़े प्रोडक्शन हाउस अपनी बड़ी फिल्मों की लागत न निकाल पाने...

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फिल्म समीक्षा: आशुतोष गोवारिकर के फिल्मी करियर का सबसे भद्दा अध्याय है पानीपत

जब इस फिल्म की कॉस्ट सामने आई थी, तभी अहसास हो चला था कि निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने अपने फिल्म करियर का सबसे भद्दा अध्याय शुरू किया है। ‘पानीपत’ को फिल्म के विद्यार्थियों के...

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‘होटल मुंबई’ हमारे जख्मी सीनों का ऐतिहासिक दस्तावेज है

रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘अटैक्स ऑफ़ 26/11‘ उस आतंकी हमले पर उथले पानी में तैरती सी फिल्म थी। स्टेशन पर भारी रक्तपात और ताज होटल के प्रसंग उसमे दिखाए गए थे। लेकिन उस फिल्म...

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फिल्म रिव्यू: फार्मूला वाली अलमारी खाली हो चुकी है – पागलपंती

सन 1998 में निर्देशक अनीस बज़्मी ने ‘प्यार तो होना ही था’ बनाकर न केवल बॉक्स ऑफिस पर बादशाहत जमाई थी, बल्कि चार फिल्म फेयर अवार्ड जीतकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की थी। आज वही...

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‘तानाजी: द अनसंग वॉरियर’ अजय देवगन कॅरियर की महत्वपूर्ण फिल्म सिद्ध होगी

छत्रपति शिवाजी महाराज ने माता जीजाबाई के हठ पर कहा कि जो कोंढाणा जाता है, कभी वापस नहीं लौट पाता। लेकिन जीजाबाई कोंढाणा दुर्ग पर लहराते हरे ध्वज को सह नहीं पाई और प्रतिज्ञा...

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दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के संस्कृति महोत्सव में बिखरे अवध के रंग

भारत की सांस्कृतिक विविधता को लेकर एक मशहूर कहावत है, ‘ कोस कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वानी’. हर क्षेत्र की इतनी सारी अलहदा सांस्कृतिक विविधतायें हैं कि अगर इनका ब्यौरा लिखने बैठें तो शायद...

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इन एंजल्स में वो बात नहीं – चार्लीज एंजल्स फिल्म रिव्यू

कभी न नज़र आने वाले चार्ली की तीन हसीनाओं की याद अब तक दर्शकों के जेहन से मिटी नहीं है। सन 2000 में प्रदर्शित हुई ‘चार्लीज़ एंजल्स‘ को युवा दर्शकों के लिए रिबूट किया...

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फिल्म समीक्षा – रेव-9 से केवल बचकर भागा जा सकता है – टर्मिनेटर – डार्क फेट

पृथ्वी के भविष्य से दो प्रकार के मशीनी मानव वर्तमान में भेजे जाते हैं। भविष्य में मानवता को बचाने वाला नायक अभी नन्हा बच्चा है और उसे पहले ही मार दिया जाना है ताकि...

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एक टाइमपास फिल्म, जो अच्छा सन्देश देती है फिल्म रिव्यू: उजड़ा चमन

गंजापन और मोटापा ऐसी बीमारियां हैं, जो जवानी में हो जाए तो बड़ी परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। इनको फिल्म का विषय बनाना निश्चय ही साहसिक काम है। बॉक्स ऑफिस हर सप्ताह निर्ममता से...

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फिल्म उद्योग की दीपावली बंदूक की नाल से छूटी – फिल्म रिव्यू – सांड की आंख

चंदो तोमर और प्रकाशी तोमर की निशानेबाज़ी से प्रभावित होकर अलवर की महारानी ने उनको अपने पैलेस पर एक दावत में बुलाया है। दोनों देहाती महिलाओं को ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर दिया जा रहा है,...

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शोर करने वाला पटाखा है ‘हॉउसफुल : 4, ये रंग नहीं बिखेरती

बेशक फ़िल्में मनोरंजन के लिए बनाई जाती है। ये बात ‘हॉउसफुल: 4 जैसी फ़िल्में साबित करती आई हैं। एक होता है सोद्देश्य मनोरंजन और एक निरर्थक। हंसकर भूल जाने जैसा या पान खाकर थूक...

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पीरियड बेहतर, ड्रामा कमज़ोर

फिल्म रिव्यू:  लाल कप्तान बक्सर की लड़ाई के दौरान जब सभी राजा अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ाई की योजना बना रहे होते हैं, तब उनमे से एक राजा का बेटा रहमत ख़ान अंग्रेज़ों के हाथों...

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हर आदमी के भीतर एक ‘जोकर’ छुपा है

काल्पनिक शहर ‘गॉथम सिटी’ डीसी कॉमिक्स के पन्नों से लेकर बैटमैन की  फिल्मों में दिखाया जाता रहा है। गॉथम का समाज सुसभ्य होते हुए भी भीतरी  बीमारियों से जूझ रहा है। वह अपने अदृश्य...

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ऋत्विक का स्टारडम ही ‘वॉर’ की यूएसपी है

मेजर कबीर लूथरा आर्मी से गद्दारी कर फरार हो गया है। कबीर को खोजने के लिए खालिद खान को जिम्मेदारी दी जाती है। स्पेशल एजेंट खालिद और कबीर के बीच एक चूहा-बिल्ली का खेल...

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‘प्रतिशोधी रिव्यू’ के कारण आप कहीं एक नेक फिल्म देखने से वंचित न रह जाए

सत्तावन के स्वाधीनता संग्राम की भीषण आग सुलगने से ग्यारह साल पहले ब्रिटिश राज को एक छोटी सी चिंगारी ने भयभीत कर दिया था। वह चिंगारी न भड़कती तो 1857 में मंगल पाण्डे की...

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