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Category: अध्यात्म

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निश्चिन्त होना हो तो अपना सर्वस्व परमात्मा को सौंप दो!

अगर तुम निश्चिंत होना चाहो,तो छोटा-सा काम है बस; जरा-सी तरकीब है;जरा-सी कला है–और कला यह है:अपने को हटा लो और परमात्मा को करने दे जो कराए।कराए तो ठीक, न कराए तो ठीक।पहुंचाए कहीं...

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ओशो और मैं!

गुरू पूर्णिमा की आप सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं। यह मेरे दीक्षा की तस्वीर है। 28 मार्च 1998 को मैं ओशो के नवसंन्यास में दीक्षित हुआ था। मैं किसी जिज्ञासु की भांति अपने उम्र के...

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घनघोर अंधकार की रात में रामायण हमारे लिए एक दीप की भांति प्रज्जवलित है

रामानंद सागर की ‘रामायण‘ जब कोरोना काल में पुनः प्रसारित हुई तो उसने जनमानस को इस खतरनाक वायरस से लड़ने का संबल दिया। राम और सीता के अनुपम निश्छल चरित्र को देख लोग रो...

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Yogi Govt Takes On Lutyens Media, Files FIR Against The Wire Editor

India Speaks Daily, in the morning, had given a video on Supreme Court’s concern over fake news on Chinese virus. By evening, the Uttar Pradesh police has filed FIR against “The Wire” Editor Siddharth...

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आपकी सोच आपकी अगली पीढ़ी को पत्थर की तरह जड़ बना सकती है, पानी की तरह प्रवाहमान नहीं!

मैंने अपने बेटे को विमान से पढ़ने के लिए क्या भेजा, देख रहा हूं कि कुछ लोग अपने-अपने अनुभव लिख कर मुझे सिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि भैया बेटे को फौलाद बनाइए।...

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जब जर्मन सम्राट के पुत्र ने ओशो का चौकीदार बनने के लिए त्याग दिया था अपना राजपाट!

यह सच्ची दास्तान है, एक राजकुमार ने कभी एक बुद्ध पुरुष की चौकीदारी करने के लिए अपना राजपाट त्याग दिया था। यह लेख आध्यात्मिक जगत में बहुत लोकप्रिय हुआ। ओशो के शिष्यों में एक...

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव पर महारास के जरिए धर्म में नारी की महत्ता को अध्यात्मिक तरीके से स्थापित किया दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने!

श्री कृष्ण-एक परिवर्तनकारी युगपुरुष जिनकी क्रांति में भी शांति के छंद थे, विध्वंस में भी महा-सृजन का उद्घोष था। जिन्होंने महाभारत में महान-भारत का चित्र गढ़ा। जिनकी लीलाओं में था अध्यात्म का सरसतम सार...

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जो स्वयंभूत नहीं, उसे नष्ट होना ही है! फिर नश्वर के लिए क्यों मातम मनाते हो?

मरना तो एकदिन सबको है। मां के गर्भ में जिस दिन जिंदगी की यात्रा शुरू होती है, उसी दिन से उसकी आखिरी मंजिल भी सुनिश्चित हो जाती है, और वह मंजिल है मृत्यु! मुझे...

गीता में भगवान कृष्‍ण ने अर्जुन से कहा, हे अर्जुन वृक्षों में मैं पीपल हूं! आखिर उन्होंने स्वयं को पीपल ही क्यों कहा, कोई दूसरा वृक्ष क्यों नहीं ?

गीता और उपनिषदों को पढने के दौरान मन को असीम शांति का अनुभव होता है! वर्तमान में जब मैं अपनी ‘भारतीय वामपंथ का काला इतिहास’ पुस्तक लेखन के दौरान थक जाता हूं तो गीता...

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