Category: मूवी रिव्यू

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फिल्म समीक्षा: संजीदा वायलन पर दर्द भरी धुन का ऐहसास कराता Super 30

‘आनंद के शहर की लाइब्रेरी में विदेशी जर्नल्स नहीं आते इसलिए वह दूसरे शहर के कॉलेज की लाइब्रेरी में जाकर जर्नल पढ़ता है। लाइब्रेरियन उसे पकड़ लेता है और धक्के देकर बाहर निकाल देता...

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स्पाइडर का रोमांटिक जाल!

सिनेमा के परदे पर पीटर पारकर और एमजे का टीनएज रोमांस देखते-देखते सत्रह साल का हो चुका है। इन सत्रह सालों में पीटर और उसकी टीम दो बार ‘रिबूट’ हो चुकी है। स्पाइडरमैन की...

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फिल्म समीक्षा : सच्चा है आर्टिकल 15 और झूठी है ये फिल्म!

भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को स्वछंदता समझ लिया गया है। ये स्वछंदता हिन्दी फिल्मों द्वारा बेझिझक अपनाई जाती है। कल प्रदर्शित हुई ‘आर्टिकल 15’ इसी तरह की बेलगाम अभिव्यक्ति है। फिल्म में ऐसे...

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फिल्म समीक्षा : इस भारत में ‘भारत देश’ का मज़ाक बनाया गया है

स्टेशन मास्टर पिता की आत्मा से मिलने के बाद ‘भारत’ अपने जनरल स्टोर से बाहर आता है और एक हथौड़ा उठाकर स्टोर तोड़ना शुरू कर देता है। भारत की अजीबोगरीब जीवन यात्रा का ये...

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फिल्म समीक्षा : एवेंजर्स एंड गेम-‘एंड गेम’ के लिए ‘रोमांच’ से भी बड़ा शब्द गढ़ना होगा!

मार्वल स्टूडियो की ‘एवेंजर्स – एंड गेम’ देखने का अहसास ऐसा है, मानो सदियों लम्बे सपने से जागना। यकीन मानिये, सन 2008 से चला आ रहा ये खूबसूरत ख़्वाब टूटे, ऐसा दर्शक कभी नहीं...

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जो मरकर भी ज़िंदा है, उस पर आधारित है फिल्म ‘अनवांटेड’!

पूर्वी उत्तरप्रदेश, बिहार और बंगाल में ऐसे लोगों की तादाद लगभग पचास हज़ार हैं जो मरकर भी जीवित हैं। कहने का मतलब इन तीन राज्यों में ऐसे लोग भी रहते हैं जो कागज़ों पर...

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फ़िल्म समीक्षा: कैप्टन मार्वल, आकाशगंगा में विचरती अत्याधुनिक सभ्यताओं के बीच महायुद्ध की गाथा

एवेंजर्स का अपना अलग ही संसार है। आकाशगंगाओं में विचरती अत्याधुनिक सभ्यताओं के बीच महायुद्ध की ये गाथा रोमांचक ढंग से समाप्ति की ओर बढ़ रही है। कैप्टन अमेरिका, आयरन मैन, ब्लैक पैंथर, स्पाइडर...

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फिल्म समीक्षा: गुदगुदाती ‘टोटल धमाल’ पाक में प्रदर्शित नहीं हुई तो प्रो-पाकी उसे फ्लॉप कराने में जुटे!

पैनिक भास्कर समेत कई मीडिया संस्थानों ने ‘टोटल धमाल’ को बेहूदा फ़िल्म बताया है। उसके निम्नलिखित कारण हैं। १: राष्ट्रवादी अजय देवगन इस फ़िल्म के निर्माता हैं। २: माधुरी दीक्षित को भाजपा में लाने...

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फिल्म समीक्षा : ये गली बॉय ‘होपलेस’ है

मुझे हैरानी है कि सेंसर बोर्ड की पैनी निगाहों से ये गाना बचकर कैसे निकल गया। कल प्रदर्शित हुई फिल्म ‘गली बॉय’ का ये गाना आज के हिंदुस्तान का बखान करता है।  गीतकार ने...

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फिल्म समीक्षा: वेलेंटाइन के मौसम में ‘अलिटा’ से प्यार हो सकता है

अलिटा एक साइबोर्ग है। साइबोर्ग यानि आधा मनुष्य और आधा रोबोट। अलिटा को ‘यूगो’ से प्यार है लेकिन यूगो पैसों का लालची है। एक दिन अलिटा ‘डार्क मैटर’ से बना कृत्रिम दिल निकालकर यूगो...

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फिल्म समीक्षा : बॉक्स ऑफिस पर ‘ठाकरे’ की दहाड़ नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती

फ्री प्रेस के कार्टूनिस्ट केशव बाल ठाकरे को उसका संपादक कार्टून की धार कम करने के लिए कहता है। संपादक को लगता है कि केशव के धारदार कार्टून के अख़बार का नुकसान करवा रहे...

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फिल्म समीक्षा: कहने का मन करता है ‘विजयी भव कंगना’

सदाशिव ने षड्यंत्र से गंगाधर राव और मणिकर्णिका के पुत्र दामोदर को ज़हर दे दिया है। दामोदर की मौत के कुछ समय बाद गंगाधर राव की भी मृत्यु हो जाती है। पति के अंतिम...

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इस वीकेंड बॉक्स ऑफिस राष्ट्र के नाम समर्पित हुआ

मेजर विहान के जीजा करण उरी में हुए आतंकी हमले में शहीद हो जाते हैं। विहान की भांजी सलामी के समय ‘वार क्राई’ गाती है। उसके बिलखते स्वर सुन  सख्त दिल फौजी रो पड़ते...

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फिल्म समीक्षा : ‘परिवार’ को आईना दिखाती है द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर देखने के बाद ये सुखद आश्चर्य हो सकता है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अभिनेता अनुपम खेर को चाय पर बुलाए और कहे ‘वाह अनुपम तूने क्या खूब...

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रणवीर सिंह के कंधों पर सवार है ‘सिम्बा’

नेट पर पता चला कि फिल्म समीक्षक तरण आदर्श को सिम्बा की सकारात्मक समीक्षा के लिए ट्रोल किया गया। ट्रोल करने वाले शाहरुख़ के प्रशंसक थे, जो ‘जीरो’ की निगेटिव रिव्यू के कारण उनसे...

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फिल्म समीक्षा: शाहरुख की ‘ज़ीरो’ को सिंगल थिएटर के दर्शक ने नकार दिया

नासा वैज्ञानिक आफिया एक चिम्पांजी को प्रशिक्षण देकर मंगल ग्रह पर जाने के लिए तैयार करती है। चिम्पांजी एन वक्त पर धोखा दे जाता है और आफिया के प्रेम में पागल बउआ सिंह चिम्पांजी...

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‘एक्वामैन’ ने बॉक्स ऑफिस के समुद्र में लगाई ‘एक हज़ार करोड़ की डुबकी’

वार्नर ब्रदर्स की फिल्म ‘एक्वामैन’ ने प्रदर्शित होने के साथ ही विश्व सिनेमा में अच्छा-खासा तांडव मचाकर रख दिया है। सबसे पहले इसे चीन  उतारा गया, जहाँ एक्वामैन ने पांच दिन में 600 करोड़...

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फिल्म समीक्षा : ‘केदारनाथ’ खुद एक हादसा बनकर रह जाती है

किसी फिल्म में कलात्मक वीडियोग्राफी, वीएफएक्स इफेक्ट और आइटम गीत एक ‘महंगी तश्तरी’ की तरह होते हैं। दर्शक को इस महंगी तश्तरी में रखे ‘कंटेंट’ से मतलब होता है। वह तश्तरी की सुंदरता देखना...

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फिल्म समीक्षा : चिट्टी का अपग्रेडेड वर्जन ‘2.0’ आपको हैरानी में डाल देगा!

पक्षी विज्ञानी ‘पक्षी राजन‘ दुनिया को मोबाइल के खतरों से आगाह करता है लेकिन कोई उसकी बात नहीं सुनता। अपने पक्षियों की मौत से दुखी पक्षी राजन आत्महत्या कर लेता है। उसकी ‘आत्मा का...

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जो बड़े हमलों से नहीं हारे, वे छोटी जरूरतों से हार गए – अस्सी मोहल्ला

‘बनारस के घाट पर एक विदेशन पहुंची है। वह घाट पर बैठे साधु से कुछ सवाल करती है। साधु उसके प्रश्न का उत्तर एक स्लेट पर लिखकर देता है। पहला सवाल ‘आज से दस...

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