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Category: मूवी रिव्यू

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फिल्म रिव्यू : अंग्रेज़ी मीडियम – इरफ़ान खान इस फिल्म की रीढ़ की हड्डी है

देश में जब दुःख का वातावरण बन जाता है तो लोग आमतौर पर फिल्मों में डूब जाना चाहते हैं। फ़िल्में देखने से समस्या हल नहीं होती लेकिन तनाव से वह कुछ देर के लिए...

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फिल्म रिव्यू : बागी : 3 – बॉक्स ऑफिस का सफर मुश्किलों से भरा रहेगा

‘तीसरी बार ‘बागी’ हुए टाइगर श्रॉफ, फिल्म को मिला जबरदस्त रिस्पांस।’ टाइगर श्रॉफ की बागी: 3 प्रदर्शित होने के कुछ घंटे बाद मेरी निगाहें एक चैनल की इस हेडलाइन पर अटक गई। फिर मैं...

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फिल्म रिव्यू : थप्पड़ – थप्पड़ ऑडियंस ने निर्देशक को दे मारा है

‘विक्रम के घर पार्टी चल रही है। उसके और सीनियर के बीच तनाव हो गया है। विक्रम की पत्नी अमृता उसे पकड़कर खींचने लगती है और नशे में धुत विक्रम उसे सबके सामने एक...

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फिल्म रिव्यू : भूत (पार्ट वन) : द हॉन्टेड शिप – विकी के अभिनय के लिए ये हादसा नहीं झेला जा सकता

हॉरर जॉनर में फिल्म बनाना बड़े जोखिम का काम है। ऐसी फिल्मों में नकारात्मकता बहुत होती है और अधिकांश सुखद अंत पर समाप्त नहीं होती। हिन्दी में बनी भूतिया फिल्मों का सफलता प्रतिशत कम...

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Movie review : Love Aaj Kal 2: कार्तिक का अभिनय ही इस फिल्म का हासिल है!

इम्तियाज़ अली की लव आजकल : 2 पहाड़ियों से गुजरती रेल का सफ़र है। कभी रेल खुशनुमा धूप में वादियों के नज़ारें दिखाती है तो कभी बोगदों में प्रवेश करते ही मनहूस अंधेरा छा...

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Malang movie review: एक बेहतरीन डार्क Crime Thriller!

‘शिकारा‘ देखने के बाद सोचा था कि इस वेलेंटाइन वीक पर फिल्म उद्योग अपनी प्रेमिल अभिव्यक्ति देने से चूक गया है लेकिन ‘मलंग’ देखने के बाद ये सोच जाती रही। ये सप्ताहांत इस मायने...

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Film review: उथले पानी में तैरता है ‘Shikara’!

विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘शिकारा’ में दहशत दिखाई देती है, दहशतगर्द नहीं। गोलियां दिखाई देती हैं, बंदूक नहीं। घर जलते हैं लेकिन जलाने वाले हाथ दिखाए नहीं जाते। मानो ये दहशत बिना सिर-पैर...

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Movie Review jawani janeman: यदि आप एक सुसंस्कृत भारतीय दर्शक हैं तो इसे देखकर कुछ समय के लिए सिनेमा से आपको अरुचि हो सकती है!

जसविंदर उर्फ़ जैज कॉलेज की परीक्षा में फेल होने का जश्न मनाने लंदन से एमस्टडर्म जाता है। वहां एक लड़की के साथ वन नाइट स्टैंड के बाद लौट आता है। कई साल बाद जैज ...

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ताना जी : द अनसंग वॉरियर – हम इस फिल्म को साथ घर ले आते हैं

150 करोड़ की भव्य लागत से बनी ‘तानाजी : द अनसंग वॉरियर का बॉक्स ऑफिस पर क्या परिणाम होगा, मैं नहीं जानता। मैं ये भी नहीं जानना चाहूंगा कि पहले दिन इस फिल्म ने...

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फिल्म रिव्यू : सलमान ख़ान का कॅरियर अस्त कर देगी दबंग-3

फ़िल्में सांप-सीढ़ी का खेल होती हैं। अच्छी फिल्म किसी एक्टर को रातोरात सितारा बना देती है तो कोई बहुत खराब फिल्म शिखर पर बैठे सितारे को नीचे ला फेंकती हैं। दबंग-3 सलमान खान के...

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रिव्यू – जुमानजी द नेक्स्ट लेवल – देखने में खूबसूरत और महसूस करने में रोलर कोस्टर राइड

गेम बदल चुका है। जुमांजी की दुनिया में हरियाली लाने वाली मणि चुरा ली गई है। चारों ओर मरुस्थल और बर्फ है। हरियाली का नामोनिशान नहीं बचा है। खिलाडियों को जुमांजी को बचाने के...

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फिल्म समीक्षा: पति, पत्नी और वो – मनोरंजन, हास्य और सामाजिक सन्देश देती है ये फिल्म

अब फिल्म उद्योग और नियमित फ़िल्में देखने वाले दर्शक जानते हैं कि इन दिनों ‘बी टाउन’ फिल्मों का ट्रेंड चल रहा है और बड़े प्रोडक्शन हाउस अपनी बड़ी फिल्मों की लागत न निकाल पाने...

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फिल्म समीक्षा: आशुतोष गोवारिकर के फिल्मी करियर का सबसे भद्दा अध्याय है पानीपत

जब इस फिल्म की कॉस्ट सामने आई थी, तभी अहसास हो चला था कि निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने अपने फिल्म करियर का सबसे भद्दा अध्याय शुरू किया है। ‘पानीपत’ को फिल्म के विद्यार्थियों के...

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‘होटल मुंबई’ हमारे जख्मी सीनों का ऐतिहासिक दस्तावेज है

रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘अटैक्स ऑफ़ 26/11‘ उस आतंकी हमले पर उथले पानी में तैरती सी फिल्म थी। स्टेशन पर भारी रक्तपात और ताज होटल के प्रसंग उसमे दिखाए गए थे। लेकिन उस फिल्म...

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फिल्म रिव्यू: फार्मूला वाली अलमारी खाली हो चुकी है – पागलपंती

सन 1998 में निर्देशक अनीस बज़्मी ने ‘प्यार तो होना ही था’ बनाकर न केवल बॉक्स ऑफिस पर बादशाहत जमाई थी, बल्कि चार फिल्म फेयर अवार्ड जीतकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की थी। आज वही...

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‘तानाजी: द अनसंग वॉरियर’ अजय देवगन कॅरियर की महत्वपूर्ण फिल्म सिद्ध होगी

छत्रपति शिवाजी महाराज ने माता जीजाबाई के हठ पर कहा कि जो कोंढाणा जाता है, कभी वापस नहीं लौट पाता। लेकिन जीजाबाई कोंढाणा दुर्ग पर लहराते हरे ध्वज को सह नहीं पाई और प्रतिज्ञा...

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इन एंजल्स में वो बात नहीं – चार्लीज एंजल्स फिल्म रिव्यू

कभी न नज़र आने वाले चार्ली की तीन हसीनाओं की याद अब तक दर्शकों के जेहन से मिटी नहीं है। सन 2000 में प्रदर्शित हुई ‘चार्लीज़ एंजल्स‘ को युवा दर्शकों के लिए रिबूट किया...

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फिल्म समीक्षा – रेव-9 से केवल बचकर भागा जा सकता है – टर्मिनेटर – डार्क फेट

पृथ्वी के भविष्य से दो प्रकार के मशीनी मानव वर्तमान में भेजे जाते हैं। भविष्य में मानवता को बचाने वाला नायक अभी नन्हा बच्चा है और उसे पहले ही मार दिया जाना है ताकि...

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एक टाइमपास फिल्म, जो अच्छा सन्देश देती है फिल्म रिव्यू: उजड़ा चमन

गंजापन और मोटापा ऐसी बीमारियां हैं, जो जवानी में हो जाए तो बड़ी परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। इनको फिल्म का विषय बनाना निश्चय ही साहसिक काम है। बॉक्स ऑफिस हर सप्ताह निर्ममता से...

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फिल्म उद्योग की दीपावली बंदूक की नाल से छूटी – फिल्म रिव्यू – सांड की आंख

चंदो तोमर और प्रकाशी तोमर की निशानेबाज़ी से प्रभावित होकर अलवर की महारानी ने उनको अपने पैलेस पर एक दावत में बुलाया है। दोनों देहाती महिलाओं को ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर दिया जा रहा है,...

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