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Category: मूवी रिव्यू

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हर्षद मेहता और नब्बे के दशक का सिस्टम एक ही सिक्के के दो पहलू थे

मन में सफल होने का विश्वास लेकर हर्षद स्टॉक मार्केट की सीढ़ियां चढ़ जाता है। तीक्ष्ण बुद्धि और व्यापारिक दिमाग के बल पर वह कम वक्त में शेयर बाज़ार की बड़ी ताकत बनकर उभरता है। 1

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Movie review :लंदन कॉन्फिडेंशल पूरी तरह से मौनी राय की फिल्म है

लंदन कॉन्फिडेंशल एक ऐसी पहली फिल्म है जो कोरोना काल में शूट की गई है। लंदन की पृष्ठभूमि पर बनाई गई इस फिल्म का विषय भी कोरोना के इर्द-गिर्द ही घूमता है। कहानी कुछ इस तरह है कि जब संसार कोरोना से उबरने का प्रयास कर रहा है, उस समय इससे भी खतरनाक एक वायरस भारत-चीन सीमा पर फैलना शुरू हो चुका है।

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Movie Review :भारतीय निर्देशक साइंस कथाओं से खेलना सीख रहे हैं

1984 में रहस्यमयी ढंग से लापता हुआ एक विमान 2019 में वापस आकर क्रेश हो जाता है। बहुत से यात्री मारे जाते हैं। एक प्रोफेसर और एक एयर होस्टेस इस दुर्घटना में जीवित बचे हैं। एक सीबीआई अधिकारी शांतनु को इस केस पर लाया गया है।

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movie review : संत आसाराम पर ऊँगली उठाती एक नाकाम फिल्म है आश्रम

आश्रम का पहला सीजन देखने के बाद ये कहना होगा कि प्रकाश झा ने भी वही काम किया, जो शाहरुख़ खान क्लास ऑफ़ 83 बनाकर कर गए हैं। वास्तविक घटनाओं पर लिखी कहानी में काल्पनिक चरित्र डालकर परदे पर पेश करना अब एक निकृष्ट परंपरा बनती जा रही है।

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Film review: शाहरुख़ की फिल्म में दाऊद इब्राहिम का नाम ही बदल दिया गया

हुसैन ज़ैदी एक ख्यात पत्रकार और लेखक हैं। उनकी किताब ब्लैक फ्राइडे पर बनी फिल्म अनुराग कश्यप ने निर्देशित की थी। उन्ही हुसैन ज़ैदी की एक किताब ‘क्लास ऑफ़ 83 : द पनिशर्स ऑफ़...

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Movie Review : बंगाली सिनेमा का काला जादू सम्मोहित करता है!

आप में से कितने दर्शक पाउली दाम को जानते होंगे। कितने हिन्दी दर्शकों ने पाउली की फ़िल्में देखी होंगी। बंगाली सिनेमा के इस काले जादू का सम्मोहन कितनों को छूकर निकल गया होगा। बंगाली...

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Movie Review : करण जौहर ने वायुसेना और गुंजन सक्सेना के साथ किया छल!

वास्तविक कथाओं पर फ़िल्में बनाना बॉलीवुड का पुराना चलन है। सम-सामयिक घटनाओं या राष्ट्रीय नायकों की आकर्षक जीवनियों को कैश करना अब एक विकृति का रूप ले चुका है। करण जौहर की नई फिल्म...

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Movie Review : ये युद्ध फिल्म देखते-देखते आप अपनी पलकों को नम पाएंगे

अवरोध : The siege within यदि ‘उरी- द सर्जिकल स्ट्राइक’ उरी आतंकी हमले से लेकर एलओसी पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर एक ‘सर्चलाइट’ डालती है तो ‘अवरोध-The siege within’  भारतीय सेना के पराक्रम...

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मूवी रिव्यू: रक्तरंजित कथा के ठूंठ पर प्रेम तितली आ बैठती है

पैंसठ साल का रघुवेन्द्र सिंह ने अपनी दूसरी शादी एक जवान लड़की से रचाई है, जो उससे आधी उम्र की है। ठाकुर ने इस लड़की को ख़रीदा था। शादी की रात ही रघुवेंद्र सिंह...

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मूवी रिव्यू : ख्यातनाम हस्ती का बॉयोपिक बनाना बड़ा उत्तरदायित्व है

किसी ख्यातनाम हस्ती का बॉयोपिक बनाना बड़ा उत्तरदायित्व है, यदि आपको फिल्मों की प्रभावित करने की क्षमता पर विश्वास है तो आप इस उत्तरदायित्व को निश्चित ही समझेंगे। बॉयोपिक बनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य...

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सोलह वर्षीय नायर योद्धा की अद्भुत वीरता गाथा

भारत का इतिहास वीरता की गाथाओं से भरा पड़ा है लेकिन स्कूल की किताबों में हमको मुगल काल और स्वतंत्रता संग्राम ही पढ़ने को मिलता है। बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षाप्रद कहानियों और...

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मूवी रिव्यू :सुशांत का विदाई गीत बन गई ‘दिल बेचारा’

Esther Earl बारह साल की थी, जब उसके परिवार को पता चला कि उसे थाइराइड कैंसर है। सोलह साल की उम्र में उसकी मौत हो गई। मरने से पहले वह एक किताब लिख गई...

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मूवी रिव्यू:’ब्रीद – इन टू द शेडोज’ कमाल कर रही है

‘मल्टीपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर’ पर हॉलीवुड और बॉलीवुड में कई प्रभावकारी फिल्मों का निर्माण हो चुका है और ये विषय अब नए निर्माताओं को भी लुभा रहा है। एक ही व्यक्ति में दो व्यक्तित्व रहते...

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टाइटल में भगवान का नाम जोड़ दो, फिर मीडिया मुफ्त में फिल्म का प्रचार करेगा

फिल्म रिव्यू कृष्णा एंड हिज लीला इस फिल्म के साथ कृष्ण का नाम न जुड़ा होता तो ये औसत से भी कम प्रदर्शन करती। निर्देशक रविकांथ पेरेपु की फिल्म ‘कृष्णा एंड हिज लीला’ एक...

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‘रसभरी’ उनके फ़िल्मी कॅरियर की आखिरी अश्लील सलामी है

वेब सीरीज़ रिव्यू स्वरा भास्कर को आशा नहीं होगी कि उनकी नई वेब सीरीज़ ‘रसभरी’ को दर्शक उनकी सार्वजानिक छवि से जोड़ लेंगे। एक उन्मुक्त, कामुकता से भरी स्त्री की ये सार्वजनिक छवि उनकी...

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फिल्म रिव्यू : ‘गुलाबो-सिताबो’ अब्स्ट्रक्ट पेंटिंग है, जो ड्राइंगरूम में ही रखी रह जाएगी

फिल्म बनाना इश्क करने की तरह है। किसी फिल्म निर्देशक का ये इश्क दर्शक को हमेशा समझ में आ जाए, जरुरी नहीं है। कोई पेंटिंग दिल के बेहद करीब होती है लेकिन बाज़ार में...

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फिल्म रिव्यू : अंग्रेज़ी मीडियम – इरफ़ान खान इस फिल्म की रीढ़ की हड्डी है

देश में जब दुःख का वातावरण बन जाता है तो लोग आमतौर पर फिल्मों में डूब जाना चाहते हैं। फ़िल्में देखने से समस्या हल नहीं होती लेकिन तनाव से वह कुछ देर के लिए...

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फिल्म रिव्यू : बागी : 3 – बॉक्स ऑफिस का सफर मुश्किलों से भरा रहेगा

‘तीसरी बार ‘बागी’ हुए टाइगर श्रॉफ, फिल्म को मिला जबरदस्त रिस्पांस।’ टाइगर श्रॉफ की बागी: 3 प्रदर्शित होने के कुछ घंटे बाद मेरी निगाहें एक चैनल की इस हेडलाइन पर अटक गई। फिर मैं...

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फिल्म रिव्यू : थप्पड़ – थप्पड़ ऑडियंस ने निर्देशक को दे मारा है

‘विक्रम के घर पार्टी चल रही है। उसके और सीनियर के बीच तनाव हो गया है। विक्रम की पत्नी अमृता उसे पकड़कर खींचने लगती है और नशे में धुत विक्रम उसे सबके सामने एक...

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फिल्म रिव्यू : भूत (पार्ट वन) : द हॉन्टेड शिप – विकी के अभिनय के लिए ये हादसा नहीं झेला जा सकता

हॉरर जॉनर में फिल्म बनाना बड़े जोखिम का काम है। ऐसी फिल्मों में नकारात्मकता बहुत होती है और अधिकांश सुखद अंत पर समाप्त नहीं होती। हिन्दी में बनी भूतिया फिल्मों का सफलता प्रतिशत कम...

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