Category: मूवी रिव्यू

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फिल्म समीक्षा – रेव-9 से केवल बचकर भागा जा सकता है – टर्मिनेटर – डार्क फेट

पृथ्वी के भविष्य से दो प्रकार के मशीनी मानव वर्तमान में भेजे जाते हैं। भविष्य में मानवता को बचाने वाला नायक अभी नन्हा बच्चा है और उसे पहले ही मार दिया जाना है ताकि...

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एक टाइमपास फिल्म, जो अच्छा सन्देश देती है फिल्म रिव्यू: उजड़ा चमन

गंजापन और मोटापा ऐसी बीमारियां हैं, जो जवानी में हो जाए तो बड़ी परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। इनको फिल्म का विषय बनाना निश्चय ही साहसिक काम है। बॉक्स ऑफिस हर सप्ताह निर्ममता से...

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फिल्म उद्योग की दीपावली बंदूक की नाल से छूटी – फिल्म रिव्यू – सांड की आंख

चंदो तोमर और प्रकाशी तोमर की निशानेबाज़ी से प्रभावित होकर अलवर की महारानी ने उनको अपने पैलेस पर एक दावत में बुलाया है। दोनों देहाती महिलाओं को ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर दिया जा रहा है,...

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शोर करने वाला पटाखा है ‘हॉउसफुल : 4, ये रंग नहीं बिखेरती

बेशक फ़िल्में मनोरंजन के लिए बनाई जाती है। ये बात ‘हॉउसफुल: 4 जैसी फ़िल्में साबित करती आई हैं। एक होता है सोद्देश्य मनोरंजन और एक निरर्थक। हंसकर भूल जाने जैसा या पान खाकर थूक...

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पीरियड बेहतर, ड्रामा कमज़ोर

फिल्म रिव्यू:  लाल कप्तान बक्सर की लड़ाई के दौरान जब सभी राजा अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ाई की योजना बना रहे होते हैं, तब उनमे से एक राजा का बेटा रहमत ख़ान अंग्रेज़ों के हाथों...

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हर आदमी के भीतर एक ‘जोकर’ छुपा है

काल्पनिक शहर ‘गॉथम सिटी’ डीसी कॉमिक्स के पन्नों से लेकर बैटमैन की  फिल्मों में दिखाया जाता रहा है। गॉथम का समाज सुसभ्य होते हुए भी भीतरी  बीमारियों से जूझ रहा है। वह अपने अदृश्य...

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ऋत्विक का स्टारडम ही ‘वॉर’ की यूएसपी है

मेजर कबीर लूथरा आर्मी से गद्दारी कर फरार हो गया है। कबीर को खोजने के लिए खालिद खान को जिम्मेदारी दी जाती है। स्पेशल एजेंट खालिद और कबीर के बीच एक चूहा-बिल्ली का खेल...

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‘प्रतिशोधी रिव्यू’ के कारण आप कहीं एक नेक फिल्म देखने से वंचित न रह जाए

सत्तावन के स्वाधीनता संग्राम की भीषण आग सुलगने से ग्यारह साल पहले ब्रिटिश राज को एक छोटी सी चिंगारी ने भयभीत कर दिया था। वह चिंगारी न भड़कती तो 1857 में मंगल पाण्डे की...

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पल पल दिल के पास रिव्यू – आंगन में लगा फल ‘अधकच्चा’ ही तोड़ लिया

धर्मेंद्र के दोनों बेटों सनी और बॉबी का बॉलीवुड पदार्पण बहुत शानदार अंदाज़ में हुआ था। सनी देओल को राहुल रवैल और बॉबी को राजकुमार संतोषी जैसे मंझे हुए निर्देशकों ने लॉन्च किया था।...

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सेक्शन 375 मर्ज़ी या ज़बरदस्ती

सबके अपने ‘सत्य’हैं, सबके अपने ‘दृश्य’ ख्यात फिल्म निर्देशक अपनी जूनियर को घर पर शूट के लिए डिजाइन किये कपडे देखने के लिए बुलाता है। खूबसूरत मादक जूनियर को देखकर उसका मन डोल जाता...

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कम बजट की ड्रीमगर्ल चलेगी लेकिन दिल में नहीं उतरेगी

जब तक दर्शकों को ये पता चलता कि महज तीस करोड़ की लागत से बनी फिल्म ‘ड्रीमगर्ल’ कैसी फिल्म है, ये पहले ही दिन आयुष्यमान खुराना की स्टार पॉवर से नौ करोड़ से ज्यादा...

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फिल्म समीक्षा : छिछोरे, न आंसू रोक पाएंगे और न हंसी.

आत्महत्या की कोशिश कर चुका अनिरुद्ध का बेटा आईसीयू में अपनी वापसी की लड़ाई लड़ रहा है। अस्पताल के बाहर अनिरुद्ध कहता है ‘उस दिन मैंने कहा था तू सिलेक्ट हो जाएगा तो साथ...

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फ़िल्म समीक्षा : भारत के मंगलयान के बनने और लॉन्च होने की कहानी कहती अक्षय कुमार की Mission Mangal

‘मिशन मंगल का प्रमुख राकेश धवन और प्रोजेक्ट डायरेक्टर तारा शिंदे की टीम के युवा वैज्ञानिक होने के साथ सरकारी नौकर भी हैं। वे अपने काम को सुबह 9 से 5 की ड्यूटी मानते...

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फिल्म समीक्षा : कांग्रेस काल में आतंक के नाम पर खेले गये खेल को उजागर करती जाॅन इब्राहिम की बटला हाउस!

डीसीपी संजीव कुमार यादव की टीम दिल्ली के ज़ाकिर नगर पहुंची है। यहाँ बाटला हॉउस के एल-18 नंबर के घर में इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्धों के छुपे होने की सूचना है। संजीव को बाटला...

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बॉक्स ऑफिस पर हॉब्स एंड शॉ ने परचम लहराया

इधर देश-विदेश के नामी समीक्षक ‘फ़ास्ट एंड फ्यूरियस: ‘हॉब्स एंड शॉ स्पिन-ऑफ’ के तर्कहीन एक्शन सीक्वेंस पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए इसकी आलोचना कर रहे थे, तब तक ये फिल्म ग्लोबली साठ मिलियन से...

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फिल्म समीक्षा: जजमेंटल है क्या

‘रहस्य की तहों से लिपटी सस्पेन्सिव थ्रिलर’ ओरिगामी एक जापानी आर्ट है। इसमें कागज़ को काटकर क्राफ्ट बनाया जाता है। बॉबी गरेवाल एक मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला है जो अख़बारों की उन ख़बरों...

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फिल्म समीक्षा: संजीदा वायलन पर दर्द भरी धुन का ऐहसास कराता Super 30

‘आनंद के शहर की लाइब्रेरी में विदेशी जर्नल्स नहीं आते इसलिए वह दूसरे शहर के कॉलेज की लाइब्रेरी में जाकर जर्नल पढ़ता है। लाइब्रेरियन उसे पकड़ लेता है और धक्के देकर बाहर निकाल देता...

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स्पाइडर का रोमांटिक जाल!

सिनेमा के परदे पर पीटर पारकर और एमजे का टीनएज रोमांस देखते-देखते सत्रह साल का हो चुका है। इन सत्रह सालों में पीटर और उसकी टीम दो बार ‘रिबूट’ हो चुकी है। स्पाइडरमैन की...

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फिल्म समीक्षा : सच्चा है आर्टिकल 15 और झूठी है ये फिल्म!

भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को स्वछंदता समझ लिया गया है। ये स्वछंदता हिन्दी फिल्मों द्वारा बेझिझक अपनाई जाती है। कल प्रदर्शित हुई ‘आर्टिकल 15’ इसी तरह की बेलगाम अभिव्यक्ति है। फिल्म में ऐसे...

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फिल्म समीक्षा : इस भारत में ‘भारत देश’ का मज़ाक बनाया गया है

स्टेशन मास्टर पिता की आत्मा से मिलने के बाद ‘भारत’ अपने जनरल स्टोर से बाहर आता है और एक हथौड़ा उठाकर स्टोर तोड़ना शुरू कर देता है। भारत की अजीबोगरीब जीवन यात्रा का ये...

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