Category: उपदेश एवं उपदेशक

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योग, ध्यान और देह!

मंदिर से अर्थ है तुम्हारी देह से! क्योंकि, इसी मंदिर में तो परमात्मा विराजमान है। कहां भागे जाते हो? किसे खोजने निकले हो? अनंत से तो खोज रहे हो, मिला नहीं। जरूर कोई बुनियादी...

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ओशो ने कहा था समलैंगिकता एक यौन विकृति है, जो पश्चिमी समाज की देन है!

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को कानूनी कर दिया है। एक अप्राकृतिक और यौन विकृति को कानूनी जामा पहनाने वाले आखिर किस मानसिकता के शिकार हैं। अपने समय से दशकों आगे चलने वाले...

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‘ध्यान’ अपने मन के प्रति जागरूक होने की साधारण सी प्रक्रिया है- ओशो

ध्यान कया है? ध्यान अपने मन के प्रति जागरूक होने की साधारण सी प्रक्रिया है। मन के साथ लड़ना नहीं, न ही इसे वश में करने का प्रयास। बस वहां होना, चुनाव रहित साक्षी।...

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जब जर्मन सम्राट के पुत्र ने ओशो का चौकीदार बनने के लिए त्याग दिया था अपना राजपाट!

यह सच्ची दास्तान है, एक राजकुमार ने कभी एक बुद्ध पुरुष की चौकीदारी करने के लिए अपना राजपाट त्याग दिया था। यह लेख आध्यात्मिक जगत में बहुत लोकप्रिय हुआ। ओशो के शिष्यों में एक...

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कृष्ण ने भूल कर भी किसी स्त्री का अपमान नहीं किया, जबकि महावीर, बुद्ध, जीजस के वचनों में स्त्रियों के अपमान की संभावना है: ओशो

प्रश्न- कृष्ण को इतनी स्त्रियाँ प्रेम क्यों करती थी और कृष्ण भी उन्हें खुल कर प्रेम क्यों करते थे? उत्तर- कृष्ण के प्रति आकर्षण लाखों स्त्रियों का ठीक ऐसा ही है जैसे पहाड़ से...

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कबीर को मुसलमान मानने का मतलब है क़ुरआन से इस्लाम का तलाक! तलाक! तलाक!

संत कबीर की 500वीं पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इतिहास रचा है। कबीर की समाधि स्थल मगहर पर जाकर उन्होंने वास्तव में भारत की मूल संस्कृति का मान बढ़ाया है। कथित ‘आइडिया...

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ओशो संबोधि दिवस (21मार्च) के अवसर पर जानिए, कैसे हुए थे वो ज्ञान को उपलब्ध।

आज ओशो संबोधि दिवस है। आज ही के दिन 21 मार्च 1953 को संस्कारधानी जबलपुर के भंवरताल पार्क स्थित मौलश्री वृक्ष के तले आचार्य श्री रजनीश को संबोधि की परम उपलब्धि हुई थी। यही...

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जीवन का सत्य अज्ञात है, उसे शब्दों और शास्त्रों को पढ़ कर जाना नहीं जा सकता – OSHO

मैंने सुना है, एक संध्या एक व्यक्ति, एक अजनबी गांव में एक रास्ते पर से एक मकान के सामने से गुजरता था। उस मकान का मालिक अपने घोड़े को मकान के भीतर ले जाने...

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नीम करौली बाबा और उनका इतिहास-एक

अनन्त कथामृत से साभार प्राकट्य एवं लीला-सागर : युवावस्था को छूती वय का भस्मल लपेटे कौपीनधारी जटायुक्त एक जोगी बाबा हाथों में चिमटा-कमण्डल लिये ग्राम नीब करौरी (जिला फर्रूखाबाद, उप्र) के बीच से होते...

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संवैधानिक है आशुतोष महाराज के अनुयायियों का अधिकार !

आशुतोष महाराज के केस में आज लम्बी सुनवाई चली। सुनवाई के आरम्भ में ही कोर्ट ने तथाकथित बेटे पर टिपण्णी करते हुए कहा की बहुत से लोग धन और संम्पत्ति के लालच में बहुत...

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पत्नी का इतना अधिक प्रेम केवल भारत में घट सकता है, और कहीं नहीं: OSHO

ओशो । एक बहुत सुन्दर कहानी है। एक महान दार्शनिक था, विचारक, जिसका नाम था वाचस्पति। वह अपने अध्ययन में बहुत ज्यादा व्यस्त था। एक दिन उसके पिता ने उससे कहा, अब मैं बूढ़ा...

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ओशो का अपना कोई दर्शन, कोई सिद्धांत नहीं, उनकी चेतना एक शून्य है!

मां माधवी राय। 19 जनवरी, ओशो के महापरिनिर्वाण दिवस पर हम सभी ओशो प्रेमियो की तरफ से, गुरुवर को शत् शत् कोटि कोटि प्रणाम। हमारा प्रणाम स्वीकार करें और हम सब को यह आशीष...

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‘आशुतोष महाराज के अनुयायियों को उनके धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता!’

आशुतोष महाराज के मामले में अदालत ने सोमवार 16 जनवरी को तीक्ष्ण टिप्पणी करते हुए आशुतोष महाराज के पुत्र होने का दावा करने वाले दलीप झा को उनके कथित संबंधों के मामले में फटकार...

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जीसस का कोई भी सन्देश उपनिषद के आस-पास भी नहीं है: OSHO

OSHO। पिछले दो हजार साल से तुम गुलाम हो। तुम्हारी गुलामी और तुम्हारी गरीबी ने पश्चिम को यह खयाल दे दिया है कि तुम किसी कीमत के नहीं हो। तुम जिंदा भी नहीं हो।...

आंखों का कोई संस्कारित रूप नहीं होता,यह शुद्ध प्रकृति हैं ! ओशो

OSHO । आंखों का कोई संस्कारित रूप नहीं होता,आंखें शुद्ध प्रकृति हैं। आंखों पर मुखौटा नहीं है। और दूसरी बात याद रखने की यह है कि तुम संसार में करीब- करीब सिर्फ आंख के...

मदर टेरेसा एक औसत दर्जे की पाखंडी कैथोलिक महिला थीं, न कि कोई संत: osho

 मदर टेरेसा को नोबल पुरस्कार मिलने पर ओशो ने मदर टेरेसा के कार्यों का विश्लेषण किया था, जिससे मदर टेरेसा नाराज हो गई थी। इस पर ओशो ने अपने एक प्रवचन में मदर...

भारत एक सनातन यात्रा है, एक अमृत पथ है, जो अनंत से अनंत तक फैला हुआ है। इसलिए हमने कभी भारत का इतिहास नहीं लिखा: ओशो

Osho. पृथ्वी के इस भूभाग में मनुष्य की चेतना की पहली किरण के साथ उस सपने को देखना शुरू किया था।उस सपने की माला में कितने फूल पिरोये हैं–कितने गौतम बुद्ध,कितने महावीर,कितने कबीर,कितने नानक...

प्रेम में यदि ईर्ष्या है तो फिर वह प्रेम है ही नहीं: ओशो

ओशो वाणी प्रेम में ईर्ष्या हो तो प्रेम ही नहीं है; फिर प्रेम के नाम से कुछ और ही रोग चल रहा है। ईर्ष्या सूचक है प्रेम के अभाव की। यह तो ऐसा ही...

गायत्री मंत्र के एक-एक शब्‍द में बड़े गहरे अर्थ भरे हैं: ओशो

ओम भूर्भुवः स्‍व: तत्‍सवितुर् वरेण्‍यं भर्गो देवस्य धीमहि: धियो योनः प्रचोदयात्।। वह परमात्‍मा सबका रक्षक है — ओम प्राणों से भी अधिक प्रिय है — भू:। दुखों को दूर करने वाला है — भुव:।...

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