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Category: उपदेश एवं उपदेशक

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मुझे निरंतर लोग कहते हैं कि हम यह चाहते हैं-शांति चाहते हैं, आनंद चाहते हैं, आत्मा चाहते हैं। 

आप तो सब चाहते हैं, लेकिन चाहने से जगत में कुछ भी नहीं मिलता है। अकेली चाह बिलकुल इंपोटेंट है, बिलकुल नपुंसक है, उसमें कोई शक्ति नहीं है। चाह के पीछे संकल्प और श्रम भी...

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दूसरी बात है सम्यक श्रम। वह भी जीवन से विच्छिन्न हो गया है, वह भी अलग हो गया है। 

श्रम एक लज्जापूर्ण कृत्य हो गया है, वह एक शर्म की बात हो गई है। पश्चिम के एक विचारक आल्वेयर कामू ने अपने एक पत्र में मजाक में लिखा है कि एक जमाना ऐसा...

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सैकड़ों साल बाद भी अपने महापुरूषों के जीवन से तुमने कुछ नहीं सीखा: ओशो

प्रश्न: भगवान,पड़ोसी देशों द्वारा किए जाने वाले शस्त्र-संग्रह और उसके कारण बढ़ रहे तनाव के संदर्भ में देश की सुरक्षा की दृष्टि से श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा हाल ही एक भाषण में दी गई...

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सारा जगत ओवर फ्लोइंग है, आदमी को छोड़कर। सारा जगत आगे के लिए नहीं जी रहा है, सारा जगत भीतर से जी रहा है। 

सारा जगत ओवर फ्लोइंग है, आदमी को छोड़कर। सारा जगत आगे के लिए नहीं जी रहा है, सारा जगत भीतर से जी रहा है। फूल खिल रहा है, खिलने में ही आनंद है। सूर्य निकल...

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क्या धर्मांतरण रोकने की सजा भुगत रहे हैं संत आशाराम बापू?

अगस्त 2013 में संत आशाराम बापू के खिलाफ नाबालिग के साथ यौन शोषण के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई और 31 अगस्त के देर रात उन्हें इंदौर के एक आश्रम से गिरफ्तार कर...

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सद्गुरु ने तमिलनाडु के मंदिरों की स्थिति पर जताया दुख, कहा- ‘इन्हें सरकार के चंगुल से किया जाए मुक्त’

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने तमिलनाडु के राजनीतिक दलों से मंदिरों को राज्य नियंत्रण से मुक्त करने और उन्हें भक्तों को सौंपने का आग्रह किया है। ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु...

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नानक गृहस्थ भी हैं, संन्यासी भी- ओशो

नानक ने एक अनूठे धर्म को जन्म दिया है, जिसमें गृहस्थ और संन्यासी एक हैं। और वही आदमी अपने को सिख कहने का हकदार है, जो गृहस्थ होते हुए संन्यासी हो, संन्यासी होते हुए...

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सेवा धर्म नहीं है,बल्कि धर्म सेवा है: ओशो

मैं नहीं कहता हूं कि सेवा धर्म है। मैं जरूर कहता हूं कि धर्म सेवा है। अगर कोई व्यक्ति धर्म को उपलब्ध हो, तो उसके जीवन में जो भी है, वह सब सेवा बन...

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शून्य में जगत की महानतम शक्ति का आविर्भाव होता है!

ओशो – शास्त्रों और संतों का कहना है कि पर-स्त्रीगमन करने से साधक का पतन होता है और साधना में उसकी गति नहीं होती। इस मूलभूत विषय को समझने का प्रयास करें!

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जूडो की कला कहती है, मारो मत। जब कोई मारे, तो उसके सहयोगी हो जाओ!

जूडो की कला कहती है, मारो मत। जब कोई मारे, तो उसके सहयोगी हो जाओ! उसको दुश्मन मत मानो। मानो कि जैसे वह अपने ही शरीर का एक हिस्सा है। और तब थोड़ी ही...

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शिव कहते हैं, उस अस्तित्व को स्वयं में पाकर समाधि का सुख उपलब्ध होता है। OSHO

तुम्हारे भीतर से जब तुम बाहर की तरफ जाते हो तो चीजें एक दूसरे से दूर होती जाती हैं, फासला बढ़ता जाता है। इसलिए हजार तरह के विज्ञान पैदा हो गये हैं, होंगे ही;...

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बुद्ध कहते थे, बरस रहा है अमृत, लेकिन कुछ हैं, जो अपने घड़ों को उलटा रखे बैठे हैं।

जिस दिन घड़ा सीधा होगा, उस दिन अमृत बरसने लगेगा, ऐसा नहीं है। अमृत तो उस दिन भी बरस रहा था, जिस दिन आप घड़ा उलटा किए थे। वहां भी बरस रहा था, जहां कोई...

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श्रद्धा का सूत्र है अज्ञात में छलांग! OSHO

यह सूत्र श्रद्धा का सूत्र है, श्रद्धा का, फेथ का। श्रद्धा का अर्थ है, जंपिंग इनटु दि अननोन। श्रद्धा का अर्थ है, अज्ञात में छलांग।  श्रद्धा का अर्थ है, समस्त नियमों, समस्त व्याख्याओं, समस्त...

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मैं तुम्हें यहां मुक्त करने के लिए हूं, न कि कारागार निर्मित करने के लिए: OSHO

अन्तिम प्रश्न:- जब आप शरीर छोड़ देंगे,फिर हमें क्या करना चाहिए? क्या आपके साथ रुककर यह जोखिम उठायी जाए कि जब आपका यह आन्दोलन एक तरह के पुराने धर्म में परिवर्तित हो जाए अथवा...

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इस प्रार्थना को स्मरण रखें, प्रभु मैं असहाय हूं! तू मुझे ले चल! OSHO

हम सब अपने पर बहुत भरोसा करते हैं। हममें से अधिक लोग अपने को सेल्फमेड मानते हैं। अपने को सेल्पमेड मानना, अपने को अपने द्वारा निर्मित मानना वैसे ही है, जैसे कोई अपना बाप...

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तिब्बत पर कम्युनिस्ट चीन के कब्जे पर ओशो के विचार!

अगर मानवता थोड़ी अधिक जागरूक होती तो तिब्बत को आजाद कर देना चाहिए क्योंकि यही एकमात्र ऐसा देश है जिसने ध्यान में गहराई से जाने के लिए लगभग दो हजार साल समर्पित किए हैं...

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योग, ध्यान और देह!

मंदिर से अर्थ है तुम्हारी देह से! क्योंकि, इसी मंदिर में तो परमात्मा विराजमान है। कहां भागे जाते हो? किसे खोजने निकले हो? अनंत से तो खोज रहे हो, मिला नहीं। जरूर कोई बुनियादी...

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ओशो ने कहा था समलैंगिकता एक यौन विकृति है, जो पश्चिमी समाज की देन है!

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को कानूनी कर दिया है। एक अप्राकृतिक और यौन विकृति को कानूनी जामा पहनाने वाले आखिर किस मानसिकता के शिकार हैं। अपने समय से दशकों आगे चलने वाले...

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‘ध्यान’ अपने मन के प्रति जागरूक होने की साधारण सी प्रक्रिया है- ओशो

ध्यान कया है? ध्यान अपने मन के प्रति जागरूक होने की साधारण सी प्रक्रिया है। मन के साथ लड़ना नहीं, न ही इसे वश में करने का प्रयास। बस वहां होना, चुनाव रहित साक्षी।...

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