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‘पंचमक्कारों’ का पैगंबर उमर खालिद जेल में बहा रहा है घड़ियाली आंसू, ताकि उसके ‘खलीफा’ बाहर ‘विक्टिम कार्ड’ खेल सकें!

दिल्ली दंगे के कर्ता-धर्ता और पंच मक्कार गिरोह के ‘पैगंबर’ उमर खालिद को अब परिजनों की चिंता सता रही है । राजधानी को दंगे की आग में झोंकने को लेकर उसके चेहरे पर ना तो कोई शिकन है और ना ही कोई पछतावा, लेकिन उसे अपने परिवार के सदस्यों से मिलने की जिद हो गई है। इस मांग को लेकर वह अदालत में भी गया लेकिन उसकी मांग को अदालत ने अस्वीकार कर दिया है। इसके जरिए वह बाहर बैठे अपने ‘खलिफाओं’ के माध्यम से ‘विक्टिम कार्ड’ अभियान चलाना चाहता है! उधर, दिल्ली दंगों को लेकर फिल्म निर्माता राहुल राय और सवा दीवान से पूछताछ की गई है। दूसरी तरफ ‘पंचमक्कार’ जामिया हिंसा को लेकर पुलिस को घेरने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अभियुक्तों के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाया जा सके।

पुलिस रिमांड में मौजूद उमर खालिद से दिल्ली दंगों को लेकर लगातार पूछताछ की जा रही है और उसने प्रारंभिक पूछताछ में दंगों में हाथ होना स्वीकार भी किया है। इस बीच उसे माइंड गेम खेलते हुए अपने परिजन से मिलने की रट लगाने लगा। इसके लिए उसने अपनी अर्जी कड़कड़डूमा कोर्ट मे लगाई, लेकिन अदालत ने दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को पुलिस हिरासत के दौरान परिवार के सदस्यों से मिलने की मांग खारिज कर दी।

एडिशनल सेशंस जज अमिताभ रावत ने कहा कि उमर खालिद को अपने परिवार के सदस्यों से मिलने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। सुनवाई के दौरान उमर खालिद की ओर से वकील ने कहा कि हिरासत की अवधि लंबी है, इसलिए दो दिन में कम से कम आधे घंटे परिवार के सदस्यों से मिलने की इजाजत दी जाए। इस पर दिल्ली पुलिस की ओर से वकील ने कहा कि उमर खालिद को परिवार से मिलने की अनुमति देने से पूछताछ प्रभावित हो सकती है। उससे अभी भारी मात्रा में दस्तावेजों को लेकर पूछताछ किया जाना बाकी है।

वैसे भी पिछले 14 सितंबर को कोर्ट ने उमर खालिद को हिरासत के दौरान अपने वकीलों से मिलने की इजाजत दे दी थी जबकि वह अभी स्पेशल सेल की रिमांड पर है। उसके खिलाफ पूरक आरोप पत्र जल्द ही दाखिल किया जाना बाकी है। ज्ञात हो कि UAPA के तहत उमर खालिद को 13 सितंबर को गिरफ्तार किया था।

दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट आज सोमवार को दिल्ली दंगों को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की ओर से दायर चार्जशीट पर सुनवाई करेगा क्योंकि पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पेशल सेल की ओर से दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। 

इस बीच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दंगो की जांच के लिए फिल्म निर्माता राहुल रॉय (Rahul Roy) और सबा दिवान (Saba Dewan) से पूछताछ पूरी की है और दोनों के मोबाइल फोन को जब्त किया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि शॉर्ट फिल्म निर्माता राहुल राय और सवा दीवान की दिल्ली दंगों में भूमिका की जांच की जा रही है। जांच के दौरान पता चला कि फिल्म निर्माता राहुल राय ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था और इसमें दंगों के कई आरोपी जुड़े हुए थे। वह खुद कई धरनास्थलों पर गया था। 

देहली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (डीपीएसजी) नमक व्हाट्सएप ग्रुप में दंगों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार हो चुके खालिद सैफी व जामिया कोर्डिनेशन कमेटी के कई लोग जुड़े हुए थे। डीपीएसजी ग्रुप जनवरी 2020 में ही बन गया था और इस ग्रुप का काम लोगों को कोर्डिनेट करना था। राहुल रॉय की पत्नी भी इससे जुड़ी हुई थीं।

उधर, दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया हिंसा मामले में जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनीं है। दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी अमन लेखी ने कहा कि भीड़ हिंसा कर रही थी और पुलिस के आदेश को नहीं मान रही थी, जिसके चलते पुलिस हिंसा पर काबू करने के लिए जामिया यूनिवर्सिटी में घुसना पड़ा।

वैसे इस मामले पर अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी लेकिन इससे पहले याचिकाकर्ताओं की ओर से दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। लेकिन दिल्ली पुलिस की तरफ से कहा गया था कि अनियंत्रित भीड़ पर पुलिस का हस्तक्षेप जरूरी था।  इस पर याचिकाकर्ताओं के वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील दी थी कि पुलिस बर्बरता की स्वतंत्र जांच की जाए क्योंकि छात्रों पर आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया। इससे एक छात्र का हाथ टूट गया, एक छात्र की आंखों की रोशनी चली गई।

गोंजाल्वेस ने कहा था कि छात्र विवाद करने के मूड में नहीं थे लेकिन पुलिस ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जामिया हिंसा सोची समझी योजना के तहत की गई इसलिए दिल्ली पुलिस पर क्रूरता का आरोप सही नहीं है। लोकतंत्र में किसी कानून का विरोध करना सबका अधिकार है लेकिन विरोध करने की आड़ में कानून का उल्लंघन करना, हिंसा और दंगे करने की किसी को इजाजत नहीं है। 

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Archana Kumari

Archana Kumari

राजधानी दिल्ली में लंबे समय तक अपराध संवाददाता के रूप में कार्य का अनुभव। अर्चना विभिन्न समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल में काम कर चुकी हैं। फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता।

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