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Tagged: Upanishadas

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ऑनलाइन सत्संग, ईशावास्योपनिषद…

ऑनलाइन सत्संग, ईशावास्योपनिषद… ॐ कुर्वत्रेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतँ समा:। एवं त्वयि नान्यथेतोअस्ति न कर्म लिप्यते नरे ।। ऑनलाइन सत्संग आइए चलें उपनिषदों की यात्रा पर… ऑनलाइन सत्संग, जहाँ वेद समाप्त होते हैं, वहां से उपनिषद...

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ऑनलाइन सत्संग, ईशावास्योपनिषद श्लोक-2

ऑनलाइन सत्संग, ईशावास्योपनिषद… श्लोक-2 ॐ ईशा वास्यमिद्म सर्वं यत्किंचित जगत्यां जगत् । तेन त्यक्तेन भुंजीथा मा गृधः कस्य स्विद्धनम् ।। ऑनलाइन सत्संग आइए चलें उपनिषदों की यात्रा पर… ऑनलाइन सत्संग, जहाँ वेद समाप्त होते...

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ऑनलाइन सत्संग, जहाँ वेद समाप्त होते हैं, वहां से उपनिषद शुरू होते हैं।

ऑनलाइन सत्संग, पहला उपनिषद है ईशावास्य उपनिषद, जहाँ वेद समाप्त होते हैं, वहां से उपनिषद शुरू होते हैं इसलिए इन्हें वेदान्त भी कहा जाता है। ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।...

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आइए चलें उपनिषदों की यात्रा पर…

कुछ लोगों को आपत्ति है कि मैं बिना संस्कृत जाने उपनिषदों पर क्यों बोल रहा हूं? मेरा ऐसा कोई दावा नहीं है कि मैं उपनिषदों का ज्ञाता हूं। मुझे तो इसमें उतरने में रस...

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