सत्ता का नशा चढ़ते ही, औरतों को गुलाम बनाने की तानाशाही प्रवृत्ति के उदाहरण हैं आम आदमी पार्टी व उसके नेता!

दुनिया के सभी तानाशाहों का इतिहास उठाकर देख लीजिए! उनका पहला संघर्ष सत्ता पाने के लिए होता है और फिर सत्ता पाते ही उनकी पूरी यात्रा ‘हमाम’ में औरतों को जमा करने में बीत जाती है! आधुनिक काल में वह चाहे स्टालिन हो, मुसोलिनी हो, हिटलर हो, माओ-त्से-तुंग हो, सद्दाम हुसैन हो, गद्दाफी हो या फिर मध्य काल में चंगेज खान हो, सुल्तान मौलय इस्माइल हो या फिर भारत के सल्तनत या मुगल काल के अन्य बादशाह। सत्ता, धन और रखैलों की संख्या से ही प्रतिष्ठा का बोध समाज और दुनिया को कराने का रिवाज तानाशाहों का रहा है!आज अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी के नेता औरतों की अस्मत को रौंदने और उनका यौन शोषण करने की उसी तानाशाही मानसिकता का आरोप झेल रहे हैं! इनके सिर पर सत्ता का नशा पूरी तरह से हावी हो चुका है!

आज आम आदमी पार्टी के एक मंत्री संदीप कुमार द्वारा एक महिला के यौन शोषण और उसे ढंकने के लिए आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष सहित अन्यों की निर्लज्जतापूर्ण व्यवहार व वक्तव्य सत्ता के बाद औरतों को भोगने की उसी तानाशाही प्रवृत्ति का द्योतक है! वैसे आप यदि आम आदमी पार्टी और उसके मुखिया का शुरू से आचरण देखें तो आपको उसमें एक तानाशाही सनक और औरतों के प्रति असम्मान का भाव परिलक्षित होगा!

अरविंद केजरीवाल के आंदोलन में जितनी भी महिलाएं थीं, बाद में उनमें से अधिकांश को बाहर कर दिया गया! अरविंद ने जब चुनाव लड़ा तो उसमें भी इक्का-दुक्का महिलाओं को ही टिकट दिया गया! चुनाव जीतने के बाद केजरीवाल को अपने जीते विधायकों में एक भी महिला ऐसी नहीं मिली, जिसे वह मंत्री बना सकते हों, जबकि कांग्रेस से गई और जीत कर आई अलका लांबा जैसी तेज तर्रार महिला उनके विधानसभा में मौजूद थीं!अलका लांबा ने एक बार स्वतंत्र होकर बयान क्या दिया, अरविंद ने उन्हें भी प्रवक्ता पद से कुछ समय के लिए हटा दिया, जबकि आशुतोष, दिलीप पांडे, आशीष खेतान आदि रोज अनाप-शनाप बोलते रहते हैं, लेकिन उन पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई!

दूसरी ओर उनके ज्यादातर विधायक और मंत्री, जिनको जेल की हवा खानी पड़ी है, सभी महिला विरोधी आचरण में ही लिप्त पाए गए हैं। अरविंद के पहले कार्यकाल को याद कीजिए, उनके कानून मंत्री सोमनाथ भारती अफ्रीकी महिलाओं को अपने सामने पेशाब करने के लिए मजबूर करने के आरोप में घिरे थे! दूसरे कार्यकाल में वह अपनी पत्नी को कुत्ते से कटवाने और उसे पीटने के आरोप में घिरे। केजरीवाल का एक विधायक एक महिला का यौन शोषण करने में लगा रहा, जिसके कारण उस शादीशुदा महिला को आत्महत्या करना पड़ा। एक-दो विधायक महिलाओं को थप्पड़ मारने और अभद्रता करने के आरोप में जेल गए! संदीप कुमार पर आरोप है कि महिलाओं का यौन शोषण करते हुए वह खुद ही उसका सीडी बनाते थे! आम आदमी पार्टी के ही बिजवासन से विधायक देवेंद्र सहरावत ने पंजाब में टिकट बांटने वाले बड़े नेताओं संजय सिंह आदि पर यौन शोषण का आरोप लगाया है!

ओशो ने कहा भी है- ‘सत्ता मिलते ही व्यक्ति अपनी काम वासना की भूख को शांत करने के लिए महलों में औरतों को इकट्ठा करने में लग जाता है!’ वास्तव में यही एक तानाशाही मानसिकता की प्रवृत्ति है। इतिहास में ऐसे-ऐसे तानाशाह हुए हैं, जिन्होंने सत्ता पाने के बाद महिलाओं के यौन शोषण की पराकाष्ठा पार कर दी है! पद, पैसा और प्रतिष्ठा पाने के बाद तानाशाह प्रवृत्ति का व्यक्ति आम लोगों को रौदना चाहता है और उसमें भी महिलाएं उसका आसान शिकार होती हैं! यौन कुंठा से भरा मस्तिष्क सेक्स विकृतियों में अपनी चरम उंचाई नापता है!

अभी सीरिया में आईएसआईएस के जेहादियों द्वारा औरतों के साथ की गई क्रूरता की कहानी लोगों के जेहन में ताजा है! यही कुछ आम आदमी पार्टी के राजनेताओं की भी कहानी है, लेकिन चूंकि भारत में लोाकतंत्र है, इसलिए ये महिलाओं के बाजार नहीं लगा रहे, हां महिलाओं की सीडी बनाने से लेकर उन्हें टिकट देने के लिए बिस्तर पर घसीटने तक का कुकृत्य बंद कमरों में जरूर कर रहे हैं, जो कमरे से बाहर आने लगी है!

अभी इन्हें सत्ता में आए डेढ़ साल ही हुए हैं, तब इन्होंने इतनी महिलाओं का घर बर्बाद कर दिया, सोचिए यदि ये लंबे समय तक, देश के अन्य राज्यों की सत्ता में भी मौजूद हो जाएं तो इस देश में महिलाओं की और कितनी दुर्गती होगी! चूंकि अरविंद केजरीवाल विचारधारा से वामपंथी हैं, इसलिए लेफट लिबरल पत्रकार व बुद्धिजीवी इसे ढंकने के प्रयास में लगे हैं! वामपंथियों की भी तो यही कहानी है! स्टालिन व माओ से लेकर जंगलों में मौजूद माओवादी-नक्सवादी, न्यूज रूम में बैठे वामपंथी संपादक, कला-साहित्य क्षेत्र में बैठे वामपंथी बुद्धिजीवी और इनके बौद्धिक गढ़ जेएनयू तक महिलाओं के यौन शोषण की अनेकों दास्तान भरी पड़ी है!

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