केजरीवाल सरकार ने CNG फिटनेस स्कैम और डीडीसीए में हुए वित्तीय घोटाले को लेकर बनाई गई जांच कमिटी अवैध है क्योंकि उपराज्यपाल की सहमति इसमें नहीं ली गई.

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आम आदमी पार्टी को रोज नए नए झटके खाने और विवादों में रहने का शौक सा लगता है दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल के बीच चल रही अधिकारों की खींचतान पर कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है. आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार को कोर्ट ने क़ाननू की किताब का क ख ग समझाते हुए दिल्ली सरकार की सभी याचिकाओं को सिरे से ख़ारिज कर दिया है. केजरीवाल जी दिल्ली एक केंद्रशासित प्रदेश है और अन्य केंद्रशासित प्रदेशों की भांति यहाँ भी वही कानून लागू होते हैं और जिसका मुखिया उपराज्पाल होता है.

कोर्ट ने अपने १९२ पेज के फैसले में कहा है कि दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीइआरसी) को दिया गया निर्देश अवैध और असंवैधानिक है. जिसमें कहा गया था कि बिजली कटौती होने पर उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाएगा. कोर्ट ने अपने फैसले मैं यह भी कहा, कृषि जमीन का सर्कल रेट बढ़ाने का फैसला भी अवैध था क्योंकि दिल्ली में जमीन पुलिस, कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों मे अंतिम निर्णय केंद्र का होगा.

दिल्ली सरकार अपने फैसले उप-राज्यपाल पर नहीं थोप सकती है और न ही उनके राय के बगैर कोई काननू पारित कर सकती है.इसलिए दिल्ली सरकार का सीएनजी फिटनेस स्कैम और डीडीसीए में हुए वित्तीय घोटाले को लेकर बनाई गई जांच कमिटी भी अवैध है क्योंकि उसमें उप-राज्यपाल की सहमति नहीं ली गई. उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के किसी भी फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं है. केंद्रीय कर्मचारियों के तबादलों और नियुक्ति का अंतिम फैसला भी केंद्र सरकार करेगी कोर्ट ने कहा अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले का अधिकार केंद्र सरकार के पास और दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है.

केजरीवाल सरकार ने पिछले दो सालों में काम से ज्यादा हंगामे किये है, आम आदमी पार्टी जरा दिल्ली के लोगों को मूलभूत सुविधायें मुहैय्या कराने पर ध्यान दीजिये क्योंकि वो बिल्कुल आपके अधिकार क्षेत्र में आता है लेकिन इन अधिकारों का आप प्रयोग करना नहीं चाहते.

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