RTI में हुआ खुलासा JNU के छात्र-छात्रायें जम कर करते हैं नशा !

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RTI से हुआ खुलासा! जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के साथ-साथ वह सब होता है जो किसी भी विद्यालय के लिए शर्मनाक है, वह भी तब जब जनता की गाढ़ी कमाई से दिए गए टैक्स से ऐसे विश्व विद्यालयों को चलाया जाता है ताकि उसमें से बुद्धिजीवी निकलेंगे जो आने वाले समय में देश की दशा तय करेंगे लेकिन अफ़सोस ! जवाहरलाल यूनिवर्सिटी में नशे का संसार चल रहा है .

आरटीआई एक्टिविस्ट श्री गोपाल प्रसाद की आर टी आई ‘जेएनयू में २०१० से २०१६ के बीच में कितने छात्र छात्रायें नशा करते हुए पकड़े गए’ के जवाब में जेएनयू के मुख्या सूचना अधिकारी और चीफ प्रोक्टर ने जो आंकड़े दिए हैं वो चिंतनीय और सोचनीय हैं! सोचनीय इसलिए क्योंकि जवाहरलाल यूनिवर्सिटी में प्रत्येक छात्र को दिए जाने वाली सुविधा सीधे जनता की जेब से जाती है। आरटीआई के जवाब में जो आंकड़े मिले हैं वह कुछ इस प्रकार से हैं, पिछले छह सालों में ३०० छात्र और छात्रायें शराब गांजा बियर और अन्य नशीले ड्रग लेते हुए पकड़े जा चुके हैं और दण्डित भी हुए हैं .

ओपन एयर थियेटर हो अथवा २४*७ ढाबा आधी रात को नशे में चूर लड़के लड़कियां धुंए के छल्ले उड़ाते हुए पकड़े गए हैं. इनमें से कुछ छात्र ऐसे भी हैं जो पार्किंग एरिया में जो जेएनयू से बाहर के दोस्तों के साथ जाम छलकते हुए पकड़े जा चुके हैं. शराब पीकर वार्डन और सिक्योरिटी स्टाफ से उलझते हुए छात्र छात्राओं को कई बार एक-एक सेमिस्टर से निष्कासन भी झेलना पड़ चुका है ! ये केवल सुनी सुनाई बात नहीं बल्कि जेएनयू के द्वारा उपलब्ध आंकड़े बता रहे हैं ।

भारत की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीस में से एक जवाहर लाल विश्वविद्यालय में इस तरह के कृत्य कई सवाल खड़े कर रहा है ? क्या जन साधारण के पैसे से चलने वाली इस तरह की यूनिवर्सिटीज को संज्ञान में नहीं लेना चाहिए ! जहाँ युवाओं को नशे के साधन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं ? क्या ऐसी यूनिवर्सिटीज केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाली सहायता पर प्रश्न चिन्ह नहीं खड़े करती हैं जहाँ नारी स्वंतंत्रता के नाम पर महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुचाई जाती हो ? क्या जवाहरलाल जैसे यूनिवर्सिटीज का सामजिक बहिष्कार नहीं होना चाहिए जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश विरोधी नारे लगते हों ? कितने क्या और खड़े हैं jnu के अस्तित्व पर?

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