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आखिर दिल्ली के सीएम केजरीवाल समेत आप के 50 विधायक अपनी संपत्ति सार्वजनिक कर क्यों नहीं रहे ? कहीं पूरी दाल तो काली नहीं ?

लोकपाल और लोकायुक्त मुद्दे पर दिल्ली की सत्ता में आए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके अधिकांश विधायक आज दिल्ली की लोकायुक्त की गर्दन पकड़ने पर तुले हैं। दिल्ली की सत्ता में बैठी आम आदमी पार्टी के 66 विधायकों में से 50 ने सीधे तौर पर लोकायुक्त को अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने से मना कर दिया है। यह वही आम आदमी पार्टी और उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल है जिन्होंने अन्ना हजारे का दामन पकड़ कर लोकायुक्त और लोकपाल के मुद्दे पर आंदोलन किया था। और आज जब सत्ता में हैं तो लोकायुक्त के कहने पर भी अपनी संपत्ति और ऋण सार्वजनिक करने से मना कर रहे हैं।

इस मामले में आप के निलंबित विधायक कपिल मिश्रा ने अरविंद केजरीवाल की पोल खोलते हुए अपने ट्वीट में लिखा है कि चुनाव आयोग चुनाव लड़ने से पहले संपत्ति का ब्यौरा मांगता है जबकि लोकायुक्त ने तो विधायक बनने के बाद संपत्ति सार्वजनिक करने को कहा है। सवाल उठता है कि केजरीवाल और उसके विधायक आखिर अपनी संपत्ति छिपाना क्यों चाहते हैं?

मालूम हो कि दिल्ली की लोकायुक्त रीवा खेतरपाल ने दिल्ली विधानसभा के सभी विधायकों को नोटिस जारी कर अपनी संपत्ति और कर्ज सार्वजनिक करने को कहा था। उनके नोटिस के आधार पर भाजपा के विधायक विजेंद्र गुप्ता समेत आप से निलंबित विधायक कपिल मिश्रा ने तो अपनी संपत्ति और ऋण सार्वजनिक कर दी लेकिन मुख्यमंत्री केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत आप के 50 विधायकों ने अभी तक अपनी संपत्ति सार्वजनिक नही की है।

 

जिस प्रकार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत आम आदमी पार्टी के 50 विधायक अपनी संपत्ति सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं इससे दिल्ली के लोगों में शक गहराने लगा है कि इस मामले में कहीं पूरी दाल तो काली नहीं हो गई है।
आप के विधायक न केवल अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने से मना कर दिया है बल्कि दिल्ली की लोकायुक्त के अधिकारक्षेत्र पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। इतना ही नहीं केजरीवाल और सिसोदिया और उसके विधायकों ने तो रीवा पर मोदी सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगा दिया है। वैसे भी मोदी सरकार के खिलाफ इल्जाम लगाना केजरीवाल की पुरानी आदत रही है।

आप के अधिकांश विधायकों ने लोकायुक्त की नोटिस के जवाब में अपना हलफनामा दायर करते हुए लिखा है कि इस प्रकार का नोटिस भेजना लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार में ही नहीं आता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की लोकायुक्त का इस प्रकार नोटिस जारी करना ही अपने आप में अवैध है। क्योंकि वह इस प्रकार का निर्देश जारी ही नहीं कर सकती है। आप के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने तो लोकायुक्त पर मोदी सरकार के इशारे पर इस प्रकार का नोटिस जारी करने का आरोप लगा दिया है।

आप के विधायकों ने हलफनामा दायर कर जवाब भी दिया है लेकिन मुख्यमंत्री केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने तो लोकायुक्त के नोटिस का जवाब देना भी उचित नहीं समझा। ध्यान रहे कि ये दोनों अन्ना आंदोलन के दौरान ईमानदारी के प्रतिमूर्ति बने फिड़ते थे। आज जब ईमानदारी दिखाने की बारी आई तो मुंह छिपाते फिड़ते हैं। गौर हो कि लोकायुक्त ने इन दोनों के अलावा सभी विधायकों से वित्तीय वर्ष 2015-16, 2016-17 तथा 2017-18 के दौरान अपने सारे विवरण देने को कहा था।

लोकायुक्त के इस नोटिस पर दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेद्र गुप्ता, भाजपा विधायक मनजींदर सिंह सिरसा तथा आप से निकाले गए विधायक कपिल मिश्रा ने अपनी संपत्ति का सारा ब्यौरा जमा करा दिया है। लेकिन नोटिस दिए हुए 18 दिन बीत जाने के बाद भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के कान पर जू तक नहीं रेंगी है।

URL : CM and 50 AAP MLAs would not declare their assets to Lokayukta!

Keywords : lokayukta, arvind kejriwal, delhi chief minister, MLA, AAP, Kapil Mishra

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