सीबीआई, ईडी तथा सीवीसी जैसी शीर्ष जांच एजेंसियों में भरे हैं कांग्रेसी मानसिकता वाले सरकार विरोधी अधिकारी!

नीरव मोदी का पीएनबी घोटाले से लेकर विजय माल्या के केस तक, अगस्ता वेस्टलैंड से लेकर एयर एशिया मामले तक तथा पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव से लेकर पी चिदंबरम पर लगे भ्रष्टचार के आरोप जैसे 50 से अधिक मामलों की जांच में CBI और ED जैसी शीर्ष एजेंसियां संलग्न हैं। इन मामलों में देश के बड़े-बड़े नेताओं से लेकर शीर्ष उद्योग घराने तक फंसे हुए हैं। इनमें से अधिकांश मामले काफी संवेदनशील चरण में पहुंच चुके हैं। लेकिन ये दोनों जांच एजेंसियां आपसी विवाद में ही उलझी हुई है इससे न केवल जांच प्रभावित हो रहा है, बल्कि चाह कर भी मोदी सरकार समय पर इन भ्रष्टाचारियों को अंजाम तक नहीं पहुंचा पा रही हैं। इन अधिकारियों में बड़े पैमाने पर कांग्रेसी ब्यूरोक्रेट्स हैं, जिनके कारण जांच की गति प्रभावित हो रही है।

जानकारी के मुताबिक सीबीआई के ही दो शीर्ष अधिकारियों का आपसी विवाद सतह पर आ गया है। आरोप है कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा की आपत्ति के बाद भी सीवीसी और एससी ने सीबीआई के दूसरे नंबर के अधिकारी राकेश अस्थाना को क्लियिरेंस दे दी। जबकि वर्मा ने सीवीसी को स्पष्ट रूप से पत्र लिखकर बताया था कि अस्थाना के आचरण की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। इसलिए किसी भी सूरत में राकेश अस्थाना को आधिकारिक बैठकों में आलोक वर्मा का प्रतिनिधित्व करने की मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। वर्मा ने लिखा था कि अस्थाना अभी भी जांच के घेरे में हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई के वरिष्ठतम अधिकारियों के बीच ही नहीं बल्कि कई मामलों में तो सीबीआई और ईडी के बीच मतांतर है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मामला एयर एशिया का है। इसी मामले में सीबीआई और ईडी के बीच मतभेद है। इस मामले में सीबीआई ने जहां एफआईआर दर्ज कर टाटा ट्रस्ट के आर वेंकटरमनन को पूछताछ के लिए बुलाया था। वहीं ईडी द्वारा की जा रही जांच में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है।

वैसे तो केंद्रीय सतर्कता आयोग ने 12 जुलाई को सीबीआई के संयुक्त निदेशक एवाईवी कृष्णा तथा साई मनोहर के कार्यकाल को बढ़ाने के लेकर चर्चा करने के लिए एक बुलाई थी। लेकिन इस बैठक में सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा तथा दूसरे नंबर के वरिष्ठ अधिकारी राकेश अस्थाना का आपसी विवाद उजागर हो गया। आज स्थिति यह है कि शीर्ष जांच एजेंसियां आपसी विवाद में उलझी पड़ी हैं। वे खुद इतने विवादों में उलझीं हैं कि दूसरे विवादों को क्या सुलझाएंगी?

कभी सीबीआई बनाम सीबीआई का विवाद उठ खड़ा होता है तो कभी सीबीआई बनाम प्रवर्तन निदेशालय का विवाद। हाल ही में सीबीआई ने सीवीसी को पत्र लिकखर आगाह कर दिया था कि सीबीआई के दूसरे सबसे बड़े अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ अभी जांच पूरी नहीं हुई है। उनकी जांच अभी चल ही रही है। आरोप है कि इसके बावजूद सीवीसी और एससी ने अस्थाना को क्लियरेंस दे दिया।

सीवीसी की 12 जुलाई को हुई बैठक में सीबीआई के संयुक्त निदेशक एवाईवी कृष्णा तथा साई मनोहर के कार्यकाल बढ़ाने पर फैसला के अलावा डीआईजी एमके सिन्हा के कार्यकाल पर विचार करना था। इसके साथ ही डीआईजी अनीस प्रसाद के अपने मूल कैडर से सीबीआई में तबादले को नियमित करने पर विचार होना था। लेकिन उस बैठक में वर्मा और अस्थाना का विवाद उठ जाने से सारे फैसले स्थगित हो गए।

साई मनोहर एक समय में अस्थाना के नेतृत्व में विशेष जांच दल का हिस्सा हुआ करते थे। उस समय में एसआईटी के पास अगस्ता वेस्टलैंड डील, आईएनएक्स मीडिया, लालू प्रसाद यादव से जुड़ा आईआरसीटीसी केस तथा विजय माल्या का केस था। इसके अलावे भी कई केस एसआईटी के पास थे। लेकिन जैसे-जैसे वर्मा और अस्थाना के बीच विवाद गहराता गया इस एसआईटी से अधिकांश केस वापस ले लिए गए।

इसके साथ ही नीरव मोदी मामले के मुख्य जांच अधिकारी राजीव सिंह के साथ प्रसाद को भी हाल ही में त्रिपुरा के मूल कैडर भेज दिया गया। हालांकि बाद में प्रसाद को सीबीआई में वापस बुला लिया गया है। उस मीटिंग में सीवीसी को उन 50 अधिकारियों की सूची पर भी विचार करना था जो उन्होंने सीबीआई को शामिल करने करने के लिए दिया था। इस सूची में यूपी कैडर के अधिकारी ज्योति नारायण का भी नाम था। कहा जाता है कि कि अस्थाना ने ही ज्योति नारायण के नाम को आगे बढ़ाया था। सीबीआई ने सीवीसी को लिखी चिट्ठी में इसका जिक्र किया है। उस पत्र के मुताबिक नारायण के साथ कुछ अन्य अधिकारियों को शामिल किया जाना था। लेकिन सीवीसी को लिखे पत्र में यह बता दिया गया था कि ज्योति नारायण के खिलाफ सीबीआई केस के तहत जांच चल रही है।

सीबीआई के शीर्ष अधिकारियों के बीच उपजा यह विवाद 2017 के अक्टूबर में तब शुरू हुआ जब यह पता चला कि सीबीआई निदेशक ने संयुक्त निदेशक के पद पर राकेश अस्थाना की प्रोन्नति का विरोध किया था। अस्थाना पर स्टर्लिंग बायोटेक (सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल के संबंध वाली कंपनी) की जांच के दौरान गुजरात की एक कंपनी के खिलाफ बैंक से पांच हजार करोड़ रुपये की धोखधड़ी करने का खुलासा हुआ था। इस जांच में जो साक्ष्य सामने आए थे उससे अस्थाना पर अनियमितता के आरोप लगे थे। हालांकि इस मामले में अस्थाना के खिलाफ सीबीआई ने जो आरोप लगाए उसे केंद्रीय सतर्कता आयोग ने निरस्त कर दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अस्थाना पर अपने आवास में एक कंपनी के दफ्तर चलाने देने का आरोप है।

URL: Congress’s trojan horse in ED and CBI, Modi government suffered.
Keywords: AgustaWestland, ED, CBI, pnb scam,

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