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इरफान के बताए रास्ते पर चलें मुसलमान, क्योंकि अहिंसा ही आतंकवाद के खात्मे का रास्ता है !

कल ढाका में हमला हुआ है 9 आतंकियों ने करीब 60 विदेशी नागरिकों को बंधक बना लिया है। अच्छी बात यह है कि कमांडो ऑपरेशन के बाद स्थिति पर काबू पा लिया गया है !

रमजान के महीने में सिर्फ ढाका ही नहीं बल्कि समूचे विश्व को स्तब्ध करने वाली घटनायें हुई हैं,रमजान के पवित्र महीने में समूचा विश्व दहशत के साये में है ! कुछ ही दिन पहले कश्मीर में हमला हुआ था चलो मान लेते हैं कश्मीर की घाटी को हर महीने खून से आतंकवादी लाल करते रहते हैं उसके बाद हैदराबाद में 11 संदिग्धों का पकड़ा जाना जो रमजान के महीने में भारत में धार्मिक कट्टरता का उन्माद फैलाना चाहते थे !एक बहुत बड़ी दुर्घटना होने से बच गयी, आस्ट्रिया,अमेरिका आदि देशों में इस्लाम के नाम पर मजहबी कट्टर विचारधारा के लोगों ने जो दशहत फैला रखी है पूरी दुनिया के लिए सोचने का विषय है! रमजान के महीने में सिलसिलेवार एक के बाद पूरी दुनिया में होने वाली दुर्घटनायें किसी बड़ी साजिश की और संकेत कर रही है! संसार में स्थिरता फ़ैलाने का काम ये जो कट्टरपंथी कर रहे हैं, उससे इस्लाम को बड़ा खतरा है.

चलो मान लेते हैं भारत, अमेरिका, आस्ट्रिया जैसे देश इस्लामिक नहीं है लेकिन बांग्लादेश और तुर्की के इस्ताम्बूल शहर में जो हुआ उससे ये साबित हो गया कि सच में दहशतगर्दी का कोई धर्म नहीं कोई ईमान नहीं ! समूचे विश्व में इस्लाम के नाम पर जो कट्टरपंथी ये खेल खेल रहे हैं,उनके निशाने पर अब इस्लामिक देश भी आ गए हैं ! इस मजहबी कट्टरता का सिर कुचलना जरूरी है।इसलामिक देशों को अपने मन से यह भ्रम निकालना होगा कि वे आतंकवाद की आग में नहीं जलेंगे! जब पड़ोसी के घर में आग लगती हैं तो आंच अपने घर में भी महसूस होती है! कम से कम बांग्लादेश और इस्ताम्बुल की घटनाओं से आतंकवाद के इस चेहरे से वाकिफ तो हुए होंगे कि घर उनका भी ज्यादा दिन महफूज नहीं रहने वाला क्योंकि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता!

पूरी दुनिया के शांतिप्रिय लोगों को एकजुट होकर इस कट्टरता के खिलाफ खड़ा होना होगा ! भारत हमेशा से कहता रहा है कि आतंकवाद को साझा प्रयास से हराया जा सकता है! उसके लिए मिल कर प्रयास करने ही होगे! इससे पहले कि आतंवाद की ये बीमारी मानवता के लिए नासूर न बन जाये ! चुप रहने वाले जान लें कि किसी ट्रेन, किसी बाजार, किसी रेलवे स्टेशन, किसी होटल में आप और आपके अपने भी इसके शिकार हो सकते हैं.

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अब समय आ गया है जब आतंकियों की मजहबी कट्टरता पर खुलकर बहस होनी चाहिए ! हर जगह अल्लाह-ओ-अकबर का नारा लगा कर मानवता को लहुलुहान करके मुस्लिम समाज को बदनाम करने वालों के विरोध में मुस्लिम समाज आखिर कब मजबूती से खड़ा होगा? मुस्लिम समाज को एक नयी सोच की जरूरत है! जरूरी नहीं वो किसी प्रकांड विद्वान, पंडित ,मौलवी या पादरी से मिले परिवर्तनशील विचार कहीं से भी लिए जा सकते हैं, जो मानव कल्याण में हो ! ऐसे विचार जो धर्म की बारीकियों को समझ सकें आत्मविष्लेषण कर सकें.

इन दिनों बॉलीवुड एक्टर इरफ़ान खान भारतीय मीडिया में ईद के दिन दी जाने वाली कुर्बानी के खिलाफ बयां देकर विवादों में हैं गौरतलब हो कि इरफ़ान ने कहा था ‘ईद उल जुहा’ में दी जाने वाली कुर्बानी के विषय में कहा हर आदमी अपने दिल से पूछे की कैसे किसी और की जान लेने से उसे पुण्य मिल सकता है! वैसे भी खरीद कर दिए जाने वाले बकरे की कुर्बानी कैसे क़ुबूल हो सकती है जबकि कुर्बानी का मतलब अपनी किसी प्यारी चीज को बलिदान करना होता है, दो दिन पहले खरीदे गए बकरे से कैसे लगाव हो सकता है और कैसे उसकी कुर्बानी से दुआ कबूल हो पायेगी ? गौरतलब हो कि इरफ़ान ने कहा था ‘ईद उल जुहा’ में दी जाने वाली कुर्बानी के विषय में कहा हर आदमी अपने दिल से पूछे की कैसे किसी और की जान लेने से उसे पुण्य मिल सकता है! वैसे भी खरीद कर दिए जाने वाले बकरे की कुर्बानी कैसे क़ुबूल हो सकती है जबकि कुर्बानी का मतलब अपनी किसी प्यारी चीज को बलिदान करना होता है, दो दिन पहले खरीदे गए बकरे से कैसे लगाव हो सकता है और कैसे उसकी कुर्बानी से दुआ कबूल हो पायेगी ? मैं इरफ़ान के इस वक्तव्य से पूरी तरह सहमत हूँ और प्रभावित भी ! वाकई मुस्लिम समाज को आतंकवाद के खिलाफ इरफ़ान जैसी सोच से काम लेना चाहिए ! शायद इसी सोच से आतंकवाद का सफाया हो जाये ! इरफ़ान कहते हैं कि धर्म व्यक्तिगत आत्मविश्लेषण के बारे में है. ये करुणा, ज्ञान और संयम का स्रोत है न की कट्टरपंथ और रूढ़िवाद का!’ जो फतवा देने वाले लोग हैं, उन लोगों को इस्लाम के नाम को बदनाम करने वालों के खिलाफ फतवा देना चाहिए ! उनके खिलाफ देना चाहिए जो आतंकवाद की दुकान चला रहे हैं! मेरा सौभाग्य है कि मैं किसी ऐसे देश में नहीं रहता जहां धार्मिक कानून चलता है! मुझे इस पर गर्व है.”

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अहिंसा और आत्मविश्लेषण और समग्र विश्व की भागीदारी से समाज मैं फ़ैल रही आतंकवाद की जड़ों मैं मट्टा डाल सकते हैं,नहीं तो आतंकवाद जैसे बारूद के ढेर पर बैठी इस दुनिया में विस्फोट होने में समय नहीं लगेगा !

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