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सोनिया, राहुल व पेटीकोट पत्रकारों की साजिश के शिकार अटल-जॉर्ज, बंगारू व मोदी!

आईना के सामने झूठ बोलना आसान नहीं, लेकिन राफेल डील पर राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेदाग दामन पर दाग लगाने के लिए आईना के सामने झूठ बोल रहे हैं। ऐसा वह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनकी मां सोनिया गांधी भी इसी प्रकार झूठ बोलकर बिकाऊ मीडिया के सहारे तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिंस के साफ दामन पर ताबूत घोटाले का दाग लगाया था। इस झूठ से सोनिया गांधी को तत्काल चुनाव में लाभ तो मिल गया था लेकिन कांग्रेस की साख मिट्टी में मिल गई। यही कारण है कि आज राहुल गांधी के झूठ पर कोई विश्वास करने को तैयार नहीं है। जबकि ताबूत खरीद में कभी कोई घोटाला सामने आया ही नहीं।

सोनिया, राहुल व पेटीकोट पत्रकारों की साजिश के शिकार अटल-जॉर्ज, बंगारू व मोदी!

इस मामले में न केवल अमेरिकी सरकार ने लिखित में बताया था कि ताबूत खरीद में भारत को निर्धारित कीमत से भी कम चुकानी पड़ी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अटल सरकार को क्लीन चिट दे दी थी।  वैसे सुप्रीम कोर्ट से जब तक वाजपेयी सरकार को क्लीन चिट मिलती तब तब बहुत देर हो चुकी थी। लेकिन राफेल मामले में तो मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट ने अभी ही क्लीन चिट दे दी है, इसके बाद भी राहुल गांधी अपने कुछ पेटीकोट पत्रकारों के सहारे राफेल डील को घोटाला में बदलने का विफल प्रयास कर रहे हैं।

मां-बेटे का एक जैसा प्रयास, झूठे आरोप लगाओ

अब जब पूर्व रक्षामंत्री और ईमानदार छवि वाले नेता जार्ज फर्नांडिस को काल ने कल अपना ग्रास बना लिया तो अचानक उनके दामन पर सोनिया गांधी के लगाए दाग याद आ गए। किस प्रकार सोनिया गांधी ने मीडिया के सहारे अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए ताबूत खरीद को झूठा घोटाला बताकर अटल और जार्ज को बदनाम किया था। वैसे ही आज उनका बेटा राहुल गांधी कुछ पेटीकोट पत्रकार के साथ मिलकर राफेल डील को घोटाला साबित कर मोदी को बदनाम करने की कोशिश में जुटा है। ध्यान रहे जैसे राफेल डील में कोई घोटाला नहीं हुआ है इसी तरह ताबूत खरीद में भी कोई घोटाला नहीं हुआ था।

राहुल और सोनिया गांधी दोनों में समझ की कमी

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कारगिल युद्ध के दौरान भारत सरकार ने जवानों के शवों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाने के लिए अमेरिका से 2,500 डॉलर प्रति ताबूत कीमत के हिसाब से 500 ताबूत (कॉफिन) खरीदा था। इस ताबूत खरीद को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने इस खरीद में बहुत बड़ा घोटाले का आरोप लगा दिया। सोनिया गांधी ने बिकाऊ मीडिया के माध्यम से अटल सरकार पर मूल कीमत से 13 गुणा ज्यादा कीमत देने का आरोप लगा दिया। सोनिया गांधी ने इस प्रकरा अटल सरकार पर देश का 1.87 लाख डॉलर नुकसान करने का आरोप लगा दिया। सोनिया ने ठीक उसी प्रकार का आरोप लगाया था जैसा आरोप राफेल पर उनका बेटा राहुल गांधी लगा रहा है। जैसे राहुल गांधी को बेयर और लोडेड एयरक्राफ्ट में कोई फर्क समझ नहीं आता उसी प्रकार सोनिया गांधी को लकड़ी और अल्युमिनियम के ताबूत में कोई अंतर समझ नहीं आया था।

सोनिया के ताबूत घोटाला और राहुल के राफेल घोटाला में समानता

सोनिया गांधी के ताबूत घोटाले और राहुल गांधी के राफेल घोटाले में बहुत समानता है। जैसे सोनिया गांधी ने कोई घपला नहीं होने के बाद भी ताबुत खरीद को घोटाला बना दिया था उसी प्रकार राहुल गांधी राफेल डील को घोटाला स्थापित करने में जुटे हैं। कांग्रेस पार्टी किसी प्रकार राफेल डील को भाजपा के लिए बोफोर्स घोटाला बनाना चाहती है। राफेल डील को घोटाला साबित करने का प्रयास एक प्रकार से ताबूत घोटाले का ही दोहराव है। क्योंकि जैसे ताबूत घोटाला सोनिया गांधी के झूठ और कल्पना की उपज था वैसे राफेल डील को घोटाला बताना राहुल गांधी के झूठ और कल्पना की उपज है। जिस प्रकार ताबूत घोटाले में भारत और अमेरिकी सरकार के उपलब्ध तथ्यों पर विपक्षी दलों ने कोई ध्यान नहीं दिया वैसे ही राफेल डील को लेकर भी भारत और फ्रांस सरकार द्वारा मुहैया साक्ष्य पर राहुल गांधी और विपक्ष ध्यान नहीं दे रहा है।

ताबूत और राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला तथा गांधी परिवार की थेथरई 

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश टीएस ठाकुर तथा वी. गोपाल गौड़ा की खंडपीठ ने 13 अक्टूबर 2015 को ताबूत घोटाले पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा था कि 24 हजार करोड़ रुपयों के घोटाले का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका के दावों की जांच-पड़ताल की गई। लेकिन ताबूत की खरीद में न तो कोई अनियमितता सामने आई है और न ही किसी को दोषी पाया गया है। इससे साफ है कि ये आरोप गलत ध्येय से लगाए गए थे। इसलिए यह पीठ सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए इस मामले को बंद करने का आदेश देती है।

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वहीं 14 दिसंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने राफेल सौदे को लेकर दी गई सारी याचिकाएं खारिज कर दी। पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि इस सौदे को लेकर कोई शक नहीं है और कोर्ट को इस मामले में अब कोई हस्तक्षेप करने की कोई जरूरत नहीं है। तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि विमान खरीद प्रक्रिया पर भी कोई शक नहीं है। इसके साथ ही यह भी कहा था विमान सौदे की निर्णय प्रक्रिया सही है और  विमानों के मूल्य पर भी कोर्ट को कोई आपत्ति नहीं है। इसके अलावा कोर्ट को कोई शक नहीं है कि हमारी वायु सेना को राफेल विमान की जरूरत है उसकी गुणवत्ता पर भी कोई सवाल नहीं है।

दोनों मामलोंं में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गांधी परिवार कभी अपनी थेथरई से बाज नहीं आया। सोनिया गांधी के इशारे पर कांग्रेसियों ने तो जॉर्ज फर्नांडिस को संसद में भी अपमानित करने से कभी बाज नहीं आए। रक्षा मसौदे पर जब जॉर्ज फर्नांडिस जवाब देने के लिए खड़े होते थे वैसे सोनिया गांधी अपने सांसदों को बाहर निकलवा देती थी।

जिस प्रकार मोदी सरकार ने उच्च गुणवत्ता वाले राफेल एयरक्राफ्ट खरीदने का फैसला किया उसी प्रकार उस समय अटल सरकार ने जवानों के शवों के लिए उच्च कोटि के ताबूत खरीदने का निर्णय लिया। असल में शांति अभियान के दौरान हमारे जवानों ने अमेरिका में शहीद जवानों के शवों के लिए उपयोग हो रहे जो ताबूत देखा था उन्होंने अपने जवानों के लिए वैसे ही ताबुत खरीदने को कहा था। असल में उस ताबूत का कास्केट अल्यूमिनियम का था। वह ताबूत बार-बार उपयोग करने वाला था। लकड़ी की तरह एक बार उपयोग करने वाला नहीं था। उस ताबूत को सामान्य ताबूत से तुलना नहीं की जा सकती थी। जैसे आज-कल राहुल गांधी बेयर राफेल एयरक्राफ्ट और लोडेड एयरक्राफ्ट की कीमत की तुलना कर रहे हैं। ठीक उसी प्रकार उस समय भी सोनिया गांदी ने एल्यूमिनियम के ताबूत की तुलना लकड़ी के ताबूत से कर अटल सरकार पर घोटाले का दाग लगा दिया।

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जिस प्रकार आज भारत और फ्रांस सरकार दोनो एक सुर में कह रही है कि राफेल को ऑफसेट पार्टनर चुनने की पूरी स्वतंत्रता है, किसी ने उस पर रिलायंस को चुनने का कोई दबाव नहीं दिया था, इसके बाद भी राहुल गांधी मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए उनपर अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ रुपये का फायदा देने के आरोप लगाने पर आमादा हैं। ठीक उसी प्रकार उस समय भी अमेरिकी सरकार ने कहा कि भारत सरकरा को ताबूत के मूल कीमत से ज्यादा का भुगतान नहीं करना पड़ा बल्कि उल्टे उसे डिस्काउंट मिला था। लेकिन सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए उसे घोटाला बता कर जॉर्ज का दामन दागदार करने में कोई कोताही नहीं की।

ये बात दीगर है कि अटल को दोबारा सत्ता नहीं मिली लेकिन सोनिया गांधी के लाख प्रयास के बाद भी अटल और जॉर्ज की साख पर कभी बट्टा नहीं लगा। क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एनडीए सरकार को क्लीन चिट दे दी। राफेल डील मामले में तो सुप्रीम कोर्ट ने सारी जांच करने के बाद अभी ही मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी है। लेकिन राहुल गांधी है कि मानता नहीं। लगता है उसकी मां ने घुट्टी पिला रखी है कि तुम अपने झूठे आरोप पर कायम रहो, जैसे मुझे झूठे आरोप लगाने से सत्ता मिल गई, भले ही मेरी साख चली गई, वैसे ही तुम्हें भी सत्ता मिल जाएगी। वैसे भी तुम्हारी साख तो कभी थी ही नहीं। राहुल गांधी का राफेल घोटाला उसकी मां सोनिया गांधी के झूठे ताबूत घोटाला का ही दोहराव है।

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