आरबीआई-वित्त मंत्रालय विवाद: मनमोहन सिंह का बयान तब सही था या अब!

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को सोनिया-राहुल गांधी ने देश का प्रधानमंत्री क्या बना दिया अब उनसे हर घड़ी देश से झूठ बुलवाते रहते हैं! कांग्रेस विशेषकर राहुल गांधी और सोनिया गांधी को इससे कोई मतलब नहीं है कि किस विषय में मनमोहन सिंह कब क्या कहे थे? हाल ही में आरबीआई और वित्त मंत्रालय विवाद से लेकर नोटबंदी के संदर्भ में कांग्रेस ने डॉ. मनमोहन सिंह से सौ झूठ बुलवाए हैं।

ध्यान रहे कि 2014 में जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी बेटी दमन सिंह की किताब “स्ट्रिक्टली पर्सनल: मनमोहन एंड गुरशरण” के लोकार्पण पर कहा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री हमेशा ही आरबीआई गवर्नर से ज्यादा ओहदेदार और बेहतर एवं श्रेष्ठ होते हैं। आरबीआई गवर्नर केंद्रीय वित्त मंत्री के आदेश का अवमानना नहीं कर सकते हैं। वही मनमोहन सिंह आज कांग्रेस के आदेश पर अपनी ही कही बात के उलट बोल रहे हैं। ऐसे में मनमोहन सिंह से पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने तब कहा था वो सही था या अब जो कह रहे हैं वह सही है।

मुख्य बिंदु

* साल 2014 में आरबीआई गवर्नर से केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्यादा ओहदेदार मानने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी ही बात को झूठ साबित कर रहे हैं

* अपनी बेटी की किताब के लोकार्पण अवसर पर उन्होंने कहा था कि वित्त मंत्री की अवहेलना नहीं कर सकते आरबीआई गवर्नर

अपनी बेटी की किताब के लोकार्पण के दौरान उन्होंने कहा था आरबीआई तथा सरकार का संबंध लेन-देन पर आधारित होता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा था यदि किसी मसले पर केंद्रीय वित्त मंत्री जोर देते हैं तो किसी सूरत में आरबीआई गवर्नर उसे इनकार नहीं कर सकते। आरबीआई गवर्नर के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने कहा था कि यह संबंध जितना लेन और देन पर आधारित है। उन्होंने कहा था कि उन्हें तो हमेशा ही सरकार को भरोसा में लेना पड़ता था। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई का गवर्नर वित्त मंत्री से श्रेष्ठ नहीं होता है।

डॉ मनमोहन सिंह ने कहा था कि किसी मसले पर विवाद होने की सूरत में वित्त मंत्री की बात मानी जाती रही है। अगर वह किसी मसले पर जोर देते हैं तो आरबीआई गवर्नर को मानना ही उनका कर्तव्य है। आरबीआई गवर्नर तभी वित्त मंत्री की बात नहीं मान सकते जब उन्हें अपना पद छोड़ना हो, या फिर उन्होंने अपना पद छोड़ने का मन बना लिया है।

ये सारी बातें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कही थी, लेकिन आज कांग्रेस के दबाव में उन्होंने अपनी ही कही बात से उलट बोलने पर मजबूर हैं। कांग्रेस आरबीआई को लेकर मोदी सरकार पर हमला कर रही है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरबीआई की स्वायत्तता खत्म करने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार पर आरबीआई से 3.60 लाख करोड़ रुपये रिजर्व रुपये लेने का आरोप लगा रही है। और ये सारे झूठ कांग्रेस मनमोहन सिंह को जरिया बनाकर फैला रही है। जबकि सच्चाई यह है कि मोदी सरकार सिर्फ आरबीआई के रिजर्व धन पर फिर से विचार करने की बात कह रही है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि जितना रिजर्व धन आरबीआई के पास है उतना रहने की कोई जरूरत ही नहीं। जबकि कांग्रेस आरबीआई विवाद को इस रूप में दिखाने में जुटी है कि मोदी सरकार आरबीआई की स्वायत्तता को खतरे में डाल रही है।

URL: RBI-Finance Ministry controversy: Manmohan Singh was right then or now

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