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परमवीर सिंह क्यों बने विलेन?

मुम्बई में पुलिस आयुक्त के पद पर परमबीर सिंह के नियुक्ति से उनके मूल शहर हरियाणा के फरीदाबाद में खुशी का माहौल बन गया था। पैतृक गांव पावटा मोहब्बताबाद में रह रहे परिवार के सदस्यों को बधाईयां देने वालों का तांता लग गया लेकिन पुलिस आयुक्त बनने के बाद परमवीर सिंह की मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के प्रति की गई चाटुकारिता ने उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा ।  

मुंबई पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह के खिलाफ इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त कैंपेन चलाए जा रहे हैं और यहां तक कि मुंबई पुलिस आयुक्त को उनके पद से हटाने के लिए सोशल मीडिया पर वोटिंग भी कराई जा रही है। जहां एक ओर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर परमवीर सिंह ने कथित पक्षपात किया और राजनीति से प्रेरित होकर काम किया।  वही राष्ट्रवादी चैनल रिपब्लिक भारत के खिलाफ  टीआरपी में हेरफेर का आरोप लगाकर वह राष्ट्रवादियों की नजर में पूरी तरह से विलेन बन चुकेे हैं।

मुम्बई जैसे बड़े नगर में पुलिस आयुक्त के पद पर नियुक्त होना परमवीर सिंह के लिए बड़ी जिम्मेदारी थी क्योंकि मुम्बई एक ऐसा शहर है, जहां कई गैंग अपना  दबदबा बनाये रखना चाहती है और साथ में अतर्राष्ट्रीय मोस्ट वांटेडों की नजर भी मुम्बई पर ही टिकी रहती है।  खासकर दाऊद इब्राहिम गिरोह मुंबई में कुछ ज्यादा ही सक्रिय है ,ऐसे में परमवीर सिंह को चुनौती पूर्ण पद को संभालना एक बड़ी चुनौती से कम नहीं थी लेकिन उन्होंने तत्कालीन सरकार के इशारे पर काम करके अपने कैरियर का बेड़ा गर्क कर लिया।

परमवीर सिंह के कार्यकाल में ही अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमय मौत की गुत्थी सुलझाना तो दूर मुंबई पुलिस की कार्यप्रणाली से उनकी काफी किरकिरी हुई। इन दिनों टेलीविजन चैनल टीआरपी घोटाले को लेकर परमवीर सिंह राष्ट्रवादियों के निशाने पर है। परमवीर सिंह ने रिपब्लिक भारत को टारगेट करते हुए अरनव गोस्वामी के खिलाफ कई हथकंडे अपनाए । जिसके बाद रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने उनके खिलाफ मुहिम  छेड़ दी। ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ ने खुलासा किया है कि मुंबई के पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह ने ‘रिपब्लिक’ चैनल को लेकर झूठ बोला।

अर्नब गोस्वामी ने ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल ऑफ इंडिया (BARC)’ के  हवाले से दावा किया है।  BARC ने अपने FIR में ‘इंडिया टुडे’ के नाम होने की बात कही है ना कि ‘रिपब्लिक’ का। जबकि परमवीर सिंह ने रिपब्लिक भारत को बदनाम किए जाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। रिपब्लिक टीवी अक्टूबर 17, 2020 को भेजे गए ईमेल का हवाला दे रही है। राष्ट्रवादी सोच रखनेेे वाले अर्नब  गोस्वामी का कहना है कि  BARC ने कहा है कि उसके पास ‘रिपब्लिक’ या उससे जुड़ी किसी भी कम्पनी के खिलाफ गड़बड़ी का कोई मामला ही नहीं है।

जबकि परमवीर सिंह इस मामले में लगातार झूठ बोल रहे हैं । अब अर्नब गोस्वामी कोर्ट पर भरोसा जताते हुए मामले में न्यायालय की शरण लेने की बात कही है। ऐसा नहीं है की परमवीर सिंह पहली बार राज्य सरकार के इशारे पर एक्सपोज हो गए । इससे पहले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सबसे अधिक मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर आरोप लगे।  मुंबई पुलिस और बिहार पुलिस के बीच की तनातनी में भी परमवीर सिंह की सीधी भूमिका रही । उद्धव ठाकरे की तरह परमवीर सिंह भी नहीं चाहते थे कि यह मामला सीबीआई तक पहुंचे लेकिन जब मामला सीबीआई तक पहुंच गया तब भी परमवीर सिंह का काम उनकी राह के रोड़े हटाना नहीं बल्कि अवरोध पैदा करना रहा । 

साल 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी परमवीर सिंह तेजतर्रार छवि वाले अध‍िकारी माने जाते रहे हैं और उन्हें कई संगीन मामलों को हैंडल करने का अनुभव हासिल है । लेकिन मुंबई पुलिस आयुक्त के पद मिलते ही उनका अनुभव दगा दे गया। इससे पहले भी परमवीर सिंह मालेगांव ब्लास्ट को लेकर विवादित हुए थे । उस समय मालेगांव ब्लास्ट की साजिश के आरोप में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को एटीएस ने गिरफ्तार किया था। उस वक्त हेमंत करकरे एटीएस चीफ थे और डीआईजी एटीएस का पद परमवीर के पास था। परमवीर सिंह पर प्रज्ञा ठाकुर ने बेवजह टॉर्चर करने का आरोप लगाया था।

अब साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सांसद बन गई हैं और वह तो बिल्कुल भी परमवीर सिंह को पसंद नहीं करती क्योंकि उन्हें हिंदू आतंकवाद का  चेहरा बताया गया था।सुशांत सिंह राजपूत मामले में जिस तरह से परमवीर सिंह ने कथित तौर पर सरकार के इशारे पर काम किया। उससे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा उनकी मंडली तो बहुत खुश हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर सीधे सीएम ठाकरे के बेटे का नाम लिया गया । अब मामला सीबीआई के पास है लेकिन उन्होंने जैसे सुशांत प्रकरण को घुमाया  उससे बिहार पुलिस भी सकते में आ गई थी। परमवीर सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह अंडरवर्ल्ड की समझ रखते हैं और उन्होंने कई गिरोह पर नकेल कसा।  फिल्म अभ‍िनेत्री ममता कुलकर्णी को ड्रग्स मामले में उन्होंने लपेटे में ले लिया था।

ठाणे पुलिस कमिश्नर रहने के दौरान इन्होंने ड्रग्स रैकेट केस में ममता कुलकर्णी और उनके पति को आरोपी बनाया था। इस केस के बाद तो ममता का सार्वजनिक जीवन ही तबाह हो गया। सोशल मीडिया पर परमवीर सिंह लगातार ट्रोल हो रहे है। अब एक उनकी पत्नी का नाम एक कॉर्पोरेट प्लेयर के तौर पर सामने आया है। उनकी पत्नी सविता परमबीर सिंह इंडियाबुल्स समूह की दो कंपनियों सहित आधा दर्जन से अधिक अग्रणी कंपनियों में एक निदेशक हैं। सविता सिंह मुंबई कार्यालय में रियल एस्टेट प्रैक्टिस ग्रुप में वकील, खेतान एंड कंपनी के साथ एक भागीदार हैं और वह ग्राहकों को जटिल रियल एस्टेट लेनदेन और इससे उत्पन्न होने वाले विवादों की सलाह देती हैं। 

उनकी प्रोफाइल के अनुसार, उनके ग्राहकों में मालिक, खरीदार, डेवलपर्स, कॉर्पोरेट घराने, व्यक्ति, घरेलू निवेशक और विदेशी निवेशक शामिल हैं. सविता वाणिज्यिक और खुदरा परिसरों, मल्टीप्लेक्स, होटल, पुनर्विकास परियोजनाओं, रखरखाव अपार्टमेंट, एसईजेड, आईटी और आईटी-सक्षम सर्विस पार्कों और एकीकृत टाउनशिप परियोजनाओं एवं विदेशी एफडीआई से संबंधित लेनदेन में माहिर बताई जाती है।  निश्चित तौर पर यह पद उनको अपने पति के सहयोग से मिला होगा वैसे सविता सिंह कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र (हरियाणा) से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं और मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई से लॉ ग्रेजुएट हैं। वह बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र और गोवा के साथ पेशेवर सहयोगी भी हैं

जबकि सविता सिंह वर्तमान में एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस और श्रेयस होम मैनेजमेंट के निदेशक मंडल में भी शामिल हैं। सविता सिंह को 28 मार्च, 2018 को इंडियाबुल्स प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक नियुक्त किया गया जबकि  उन्हें 17 अक्टूबर, 2017 को यस ट्रस्टी लिमिटेड का निदेशक भी नियुक्त किया गया था । जानकारों का कहना है कि लोकतंत्रिक प्रणाली में नौकरशाहों को नेताओं की सुननी पड़ती है लेकिन जब कोई नौकरशाह राजनेताओं के इशारे पर उनकी लॉबी का सदस्य बन जाए तो इसका भी खामियाजा नौकरशाह को ही उठाना पड़ता है।

बिहार में कुछ साल पहले तक अखर प्रवृत्ति के नेता माने जाने वाले लालू यादव का दबदबा चलता था ।  गरीब- गुरबा की राजनीति का दावा करने वाला यह ऐसा नेता था जो नौकरशाह से भी खैनी मलवा कर खा लेता था । इस नेता के कार्यकाल में ही एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की पत्नी के साथ बलात्कार भी किया गया और आरोप उन्हीं के पार्टी के एक दबंग विधायक के बेटे पर लगा था। इससे बिहार बदनाम तो हुआ लेकिन आज आज लालू जेल में है और वह भी दिन दूर नहीं जब महाराष्ट्र को बदनाम करने वाली सरकार का भी  कुछ इसी तरह से हश्र होगा

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Archana Kumari

Archana Kumari

राजधानी दिल्ली में लंबे समय तक अपराध संवाददाता के रूप में कार्य का अनुभव। अर्चना विभिन्न समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल में काम कर चुकी हैं। फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता।

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