पटाखे पर आखिरी बैन औरंगजेब ने लगाया था, और आज फिर से हिंदुओं के खिलाफ कई औरंगजेब खड़े हो गये है!



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आज सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जहां देश में पटाखे पर पाबंदी का शोर है, वहीं कोर्ट के दिशानिर्देश के उल्लंघन के नाम पर पुलिस प्रशासन हिंदुओं को गिरफ्तार कर रही है। पटाखे पर पाबंदी लगाने का जो काम आज देश में हो रहा है, वही काम देश में अंतिम बार मुगल शासन के दौरान हुआ था। आज से 352 साल पहले दिल्ली में अंतिम बार कट्टर धर्मांध मुगल बादशाह औरंगजेब ने पटाखों पर पाबंदी लगाई थी। लगता है कि आज देश की न्याय व्यवस्था औरंगजेब से ही प्रभावित होकर काम करने पर तुला है। सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पांबदी लगाते हुए जो दिशानिर्देश जारी किया है  उसके आधार पर दिल्ली से कोलकाता तक पुलिस हिंदुओं को गिरफ्तार कर रही है!

सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश की आड़ में पूरे देश में पुलिस पटाखा कारोबार करने वाले हिंदुओं को गिरफ्तार करने पर तुली है। जहां पूरा देश दिवाली जैसे प्रकाश के त्यौहार मनाने में तल्लीन है वहीं न्याय व्यवस्था के कारण कई घरों में अमावस्या का अंधेरा घना होने जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने एक नवंबर से लेकर अभी तक पश्चिम दिल्ली से जहां 1688 किलोग्राम पटाखे जब्त किए हैं, वहीं उत्तरी दिल्ली से 660 किलो पटाखे जब्त किए हैं। इसके साथ पूर्वी दिल्ली से जहां 150 किलो वहीं दक्षिण दिल्ली से 10 किलो पटाखे जब्त किए हैं। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जहां 18 मामले दर्ज किए हैं वहीं 15 लोगों को गिरफ्तार किया है।

 

वहीं बंगाल की ममता सरकार ने तो पटाखे चलाने वालों को थाने में जमानत देने से मना कर दिया है। यानी पटाखे चलाने या इसके साथ पकड़े गये लोगों को अदालत से ही जमानत मिलेगी, जबकि सरकार यह जानती है कि दिवाली के कारण अदालतों में छुट्टियां चल रही हैं। ऐसे में पीडि़त हिंदुओं के घरों में अंधेरे का घना होना तय है।

सवाल उठता है कि क्या अपने ही देश में हिंदू दीवाली जैसे प्रकाश के त्यौहार को अपनी परंपरा के अनुरूप नहीं मना सकते? पटाखे पर बैन लगाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण समाज में असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। अगर सुप्रीम कोर्ट को प्रदूषण की इतनी ही फिक्र है तो फिर उसने पहले अन्य विकल्पों पर विचार क्यों नहीं किया?

 

URL: No bail from police station this diwali if caught with banned crackers

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