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Category: नारी जगत

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हंस से लेकर स्त्रीकाल और गृहशोभा तक साहित्य को सॉफ्ट पोर्न और हिन्दू-विरोधी बनाने की होड़

सोनाली मिश्रा । साहित्य को कभी राजनीति से आगे चलने वाला कहा जाता था। साहित्य को कभी ज्ञान की मशाल कहा जाता था। परन्तु जैसे ही वर्ष 1935 में मुल्क राज आनंद, सज्जाद जहीर...

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टूटते विवाह के लिए एकपक्षीय विमर्श चलाने वाले या वालियां दूसरा पक्ष सामने रखने पर आपको ही एकतरफा कह देते हैं, आश्चर्य है!

श्वेतादेव । ससुराल में बेटियों को सताए जाने के विरोध में समाज और राज्य दोनों हैं। बेटियों के प्रोटेक्शन के लिए दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा जैसा कानून बना। उत्पीड़क पुरुष और परिवार को सजा...

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मायके के अनावश्यक हस्तक्षेप से टूट रही है गृहस्थी!

बेटियों के मायके, खासकर मां के हस्तक्षेप के कारण इतने घर टूट रहे हैं, इतनी आत्महत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं कि डर लगता है। अखबार में हर सप्ताह ऐसी घटनाएं पढ़ने को...

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#InternationalWomensDay विशेष…जब नोएडा की दीप्ति ने अपने शौक को उद्यम में बदला

आप अपने रोजमर्रा की जिंदगी में जो भी काम करते हैं उसे उद्यम में बदलने की गुंजाईश हमेशा रहती है। वह चाहे खाने बनाना हो, कपड़े धोना हो या बच्चों को पढाना। नोएडा निवासी...

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इन पंच मक्कारों को भीष्म – सा बाण दो , हे भारतीय नारी ! भारत को तार दो

आदित्य जैन। आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आपको छद्म नारीवादियों , वामपंथियों , उदारवादियों और तथाकथित आधुनिकतावादियों के द्वारा किया जा रहा विमर्श प्राप्त होगा । जिसमें भारतीय नारी को शोषित , दमित और...

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एक साधारण स्त्री को बचकर रहना चाहिए छद्म बौद्धिक फेमिनिस्ट से

एक साधारण स्त्री को बचकर रहना चाहिए छद्म बौद्धिक फेमिनिस्ट से,क्योंकि उनके दिमागों में भरी होती है विष्ठा,यौन कुंठा,रात्रि में विकृत भावों से पी गयी मदिरा कीगंदी हंसी!एक साधारण स्त्री को बचकर रहना चाहिए,...

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वोक ऑर्थोडॉक्स लिब्रल्स को चाहिए हॉट संघी वीमेन अपनी हवस के लिए

Sonali Misra. नीचा गिरने की एक सीमा होती है, जब लगता है कि कट्टर वामपंथी इससे नीचे नहीं जा सकते हैं, वह अपनी ही धारणा तोड़ने आ जाते हैं। अब वोक ऑर्थोडॉक्स लिब्रल्स, माने...

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डॉ.स्वप्ना पाटकर के दुःस्वप्न बन गए हैं शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत

स्टेट वर्सेज स्वप्ना के इस युद्ध में केंद्र का हस्तक्षेप अवश्यम्भावी हो गया है।

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष…सिंगल मदर के नाम पर विक्टिम कार्ड का फेमिनिस्ट खेल!

Sonali Misra. मेरे लिए माँ बनना मात्र स्वयं की सम्पूर्णता के लिए आवश्यक था. सम्पूर्णता की चाह लिए मातृत्व होगा तो वह आपके जीवन में विस्तार करेगा. वह विस्तार अद्भुत होगा, वह विस्तार इसलिए...

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष… संभोग, उपभोग और वामपंथी औरतें!

Sonali Misra. एक बात को लेकर स्वयं से प्रश्न करें कि आपको बच्चे क्यों चाहिए? यह बहुत ही मूल प्रश्न है, आपको बच्चे क्यों चाहिए और आपको विवाह क्यों करना है? यह जो सिंगल...

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कबीर ने भी लिखी स्त्री विरोधी पंक्तियाँ, फिर वामपंथियों ने तुलसी पर क्यों प्रहार किया

वह दिनों दिन हमें तोड़ने के लिए कुछ न कुछ नया सामने लाते हैं। जब तुलसीदास को जनता की दृष्टि से गिराने में सफल न हो पे, तो अकादमिक में एक नया विमर्श वामपंथी...

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एक महिला यदि ‘स्त्रीत्व’ की जगह अपने अंदर ‘औरतपन’ ढूंढने लगे तो वह अपनी गरिमा खो देती है!

परसों रात शकुंतलादेवी फिल्म देख रहा था। वहां मातृत्व और स्त्रित्व की टकराहट में बार-बार अपने अंदर ‘औरत की तलाश’ शब्द मुझे खटक रहा था। कल सुबह यूं ही बैठे-बैठे स्त्री के विभिन्न शाब्दिक...

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स्त्री, महिला, औरत के अंतर को समझ कर बोलें!

कल शकुंतला देवी फिल्म रिलीज हुई। प्रसिद्ध गणितज्ञ और ह्यूमन कंप्यूटर शकुंतला देवी की इस कहानी में बार-बार मातृत्व और औरत के बीच का टकराव दिखाया गया है। और यह साबित करने की कोशिश...

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साधारण किन्तु असाधारण ओंके ओबव्वा

“किला तो घेर लिया है, मगर उसमें अंदर नहीं घुस सकते!” हैदर अली से उसके सैनिक ने आकर कहा। हैदर अली उन दिनों दक्षिण में आतंक का नाम बन गया था। हैदर अली ने...

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भारतीय महिलाओं में जीजाबाई वाले जज्बे की जरूरत है, न कि तनुश्री जैसा ‘क्रिप्टो-प्रोपोगंडाई’ फितरत की!

आज जब भारतीय स्त्रियों और पुरुषों को लेकर के शिकारी और शिकार की ही कहानी बन गयी है, ऐसे में बहुत जरूरत है कि हम अपनी भारतीय स्त्रियों की कहानियों को सामने लेकर आएं।...

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डेंगू, चिकनगुनिया, ज़िका और इन्फ्लुएंजा संबंधी वायरस पर महत्वपूर्ण कार्य के लिए जामिया प्रोफेसर को मिलेगा प्रतिष्ठित सईदा बेगम महिला वैज्ञानिक पुरस्कार!

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च इन बेसिक साइंस की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शमा परवीन को प्रतिष्ठित सईदा बेगम महिला वैज्ञानिक पुरस्कार 2018 के लिए चुना गया है। डॉ परवीन ने आण्विक जीव विज्ञान...

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एक महिला जिसने महिलाओं के उन ‘पांच दिनों’ के कष्ट को दूर करने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ी, शादी नहीं किया और खुद को झोंक दिया!

एक स्वच्छ और बेहतर जीवन सबका अधिकार है! दुनिया की हर स्त्री एक बेहतर और स्वच्छ ज़िन्दगी चाहती है, वह अपने लिए कम से कम स्वच्छता और सामाजिक टैबू से परे एक ज़िन्दगी चाहती...

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मोदी सरकार के चार साल: सस्ते सेनेटरी पैड्स बनाकर स्वरोजगार और स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ा रही हैं महिलाएं!

गौतम बुद्ध नगर के धनौरी कला गांव की महिलाओं ने सैनिटरी पैड विनिर्माण इकाई की स्थापना की और साथ ही महिलाओं को स्वच्छता के बारे में भी जागरूक किया। उसके इस प्रयास की केंद्रीय...

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सावधान! कहीं आपके आस-पास औरत के रूप में कोई मर्द तो नहीं?

क्राइम का कोई भी रूप हो सकता है और अगर अपराध महिलाओं के खिलाफ हो तो आज वो किस भयावह रूप में सामने आएगा इसका अंदाज़ा कई बार महिलाओं की पारखी नज़र भी नहीं...

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