जरा उस भयावह स्थिति के बारे में सोचिए… मुसलिमों की बढ़ती आबादी की वजह से 2050 में जब हम दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएंगे।

सब जानते हैं कि हर समस्या का मूल कहीं न कहीं बेतहासा बढ़ती जनसंख्या है। इसके बाद भी अगर जनसंख्या विस्फोट रोकने पर राजनीति हो तो देश की यही दशा होगी जो आज मुसलिमों की बढ़ती आबादी की वजह से हो रही है। अभी तो कुछ नहीं हुआ है, जरा पॉपुलेशन रिफरेंस ब्यूरो (पीआरबी) की उस रिपोर्ट के बारे में सोचिए जिसमें कहा गया है कि 2050 तक भारत चीन को भी पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा। देश की जनसंख्या विस्फोट का मुख्य कारण मुसलिम आबादी का बेतहाशा बढ़ना है। तभी तो जिस देश की आबादी स्वतंत्रता के समय यानि 1947 में महज 33 करोड़ थी आज वह बढ़ कर 135.6 करोड़ हो गई है।

मुख्य बिंदु

* बेतहाशा बढ़ती आबादी की वजह से खतरनाक स्थित की तरफ बढ़ रहा है भारत

* 2050 तक जहां चीन की आबादी 50 मिलियन घटेगी वहीं भारत की 308 मिलियन बढ़ेगी

* निरंकुश मुसलिम वाले देशों की आबादी लगातार बेतहाशा बढ़ रही है, जबकि जिस देश में मुसलिमों पर अंकुश हैं वहां की आबादी घट रही है।

पीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में भारत की आबादी 1.34 बिलियन थी जो 2050 में करीब 1.65 बिलियन हो जाएगी। जरा उस भयाभह स्थिति के बारे में सोचिए। तभी तो केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस जनसंख्या विस्फोट पर संदेह जताया है। उन्होंने बेतहाशा जनसंख्या विस्फोट की वजह से 2047 की स्थिति के बारे में देश को विचार करने के प्रति आगाह किया है। जनसंख्या विस्फोट को लेकर भाजपा के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने तो एक और नया खुलासा किया है। उनके इस खुलासे से तो भारत की जनसंख्या की स्थिति भयावह होगी नहीं बल्कि हो चुकी है।

गिरिराज सिंह ने अपने ट्वीट के माध्यम से सन 1947 और 2047 की स्थिति पर ध्यान दिलाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा है कि देश स्वतंत्रता के समय धर्म के आधार पर बंटा था, जबकि देश की आबादी महज 33 करोड़ थी। जबकि इन 72 सालों में देश की आबादी 135.6 करोड़ हो चुकी है। उन्होंने आगाह किया है कि अगर देश की आबाधी बढ़ने की यही रफ्तार रही तो 2047 में एक बार फिर वही स्थिति निर्मित हो सकती है। इसके लिए एक खास समुदाय, जो विभाजनकारी माना जाता है, की बढ़ती आबादी ही जिम्मेदार होगी। उन्होंने कहा है कि देश में अभी तो धारा 35ए पर बहस करने पर हंगामा हो रहा है, लेकिन इसी प्रकार जनसंख्या विस्फोट होता रहा तो आने वाले समय में भारत का जिक्र करना भी दूभर हो जाएगा।

वहीं भाजपा नेता तथा सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने अपने ट्वीट में जो खुलासा किया है उससे तो देश की स्थिति अभी ही भयावह हो गई है। उन्होंने गिरिराज सिंह के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा है कि भारत के 122 करोड़ लोगों के पास यूआईडीएआई नंबर है जबकि 20 प्रतिशत भारतीय के पास तो यूआईडीएआई नंबर है ही नहीं। इस प्रकार अगर दोनों को जोड़ दे तो भारत की कुल आबादी अभी ही 150 करोड़ के करीब पहुंच जाती है। उन्होंने कहा है कि हमारे देश का क्षेत्रफल चीन की तुलना में एक तिहाई है, जबकि जनसंख्या वृद्धि चीन से तीन गुणा अधिक है।

अश्विनी उपाध्याय ने जो डाटा दिया है इसकी पुष्टि पीआरबी की रिपोर्ट भी करती है। पीआरबी एक वैश्विक संस्था है जो विश्व की जनसंख्या का विश्लेषण करती है। पीआरबी ने ही अपनी हाल की रिपोर्ट में कहा है कि साल 2050 तक भारत जनसंख्या के मामले में चीन से आगे बढ़ जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की जनसंख्या में जहां 308 मिलियन का इजाफा होगा वहीं चीन की जनसंख्या में 50 मिलियन की कमी आएगी। भारत की जनसंख्या की तुलना करें तो इतनी या इससे अधिक जनसंख्या वृद्धि सिर्फ अफ्रीकी देशों में होने वाली है। एक तरफ चीन और यूरोपीय देशों की जनसख्या घट रही है वहीं भारत की आबादी विस्फोट के स्तर पर बढ़ रही है।

जनसंख्यात्मक तुलना को गौर से देखें तो साफ पता चलता है कि जो देश मुसलिमों पर अंकुश लगाने में सफल हुआ है उसकी जनसंख्या घट रही है, लेकिन जिस देशों में मुसलिम समुदाय पर कोई अंकुश नहीं है उसकी आबादी बढ़ रही है। वह चाहे चीन हो या रूस या फिर यूरोपीय देश इन सबकी आबादी घट रही है लेकिन अरब देश हो या अफ्रीकी या फिर एशियाई देश निरंकुश मुसलिम की आबादी लगातार बढ़ रही है।

URL: Due to the growing population of Muslims, India will become the world’s largest population in 2050.

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