राहुल के नमक का हक अदा करने में जुटे ‘इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे’ कमलनाथ, इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र को बचाने वालों का बंद किया पेंशन!

कांग्रेस के नेताओं को गांधी परिवार का सेवक यूंही नहीं कहा जाता है। कांग्रेस के अधिकांश नेता बड़ी शिद्दत से गांधी परिवार के खाए नमक का हक अदा करते हैं, कमलनाथ को तो फिर भी इंदिरा गांधी के तीसरे बेटे का टैग मिला हुआ है। ऐसे में अगर मध्य प्रदेश से लेकर देश की जनता इस भ्रम मे है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार उनके हित के बारे में सोचेगी तो दोष उनका ही है। तभी तो कमलनाथ सरकार ने प्रदेश के उन लोगों का पेंशन बंद करने का फैसला किया है जिन्होंने इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष किए और जेल की यातनाएं सही थी। मालूम हो कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता पर काबिज रहने के लिए देश में आपातकाल लगाकर लोकतंत्र का गला घोंट दिया था। लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए देश भर में संघर्ष हुआ था। उस संघर्ष की आग में झुलसने वालों को प्रदेश की भाजपा सरकार ने पेंशन देने की शुरुआत की थी। लेकिन जैसे ही कमलनाथ की सरकार सत्ता में आई उन्होंने यह पेंशन बंद कर दिया।

कमलनाथ सरकार के इस अनुचित फैसले के संदर्भ में ट्वीट करते हुए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ‘तीसरे बेटे’ यानि कमलनाथ ने उन लोगों के पेंशन बंद कर दिया है जिन्होंने आपातकाल के उस काले दिनों के दौर में भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इमरजेंसी के दौरान जेल जाने वालों के पेंशन पर रोक लगा दी है। इस संदर्भ में सभी डिविजनल अधिकारी तथा जिला कलक्टर को सर्कुलर जारी कर आदेश दे दिया है। सरकार का कहना है कि वह इस पेंशन योजना को उपयुक्त और पारदर्शी बनाने के कारण कुछ दिनों के लिए रोका है। लेकिन सरकार ने पेंशन को तत्काल रोकने का आदेश तो जारी कर दिया लेकिन उसकी समीक्षा कब तक हो जाएगी उसके बारे में कुछ नहीं बताया है। सरकार का कहना है कि वह पेंशन मिलने वालों की फिर से पहचान कराएगी, लेकिन यह काम कितने दिनों में पूरा होगा उसके बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

इससे साफ पता चलता है कि कमलनाथ सरकार की मंशा क्या है। वैसे भी यह पेंशन योजना पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू की थी। मालूम हो कि भाजपा ने इमरजेंसी के दौरान जेल जाने वालों को सम्मानित करने के उद्देश्य से साल 2008 में यह योजना शुरू की थी। चूंकि देश में इमरजेंसी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लगाई थी। उसी समय इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी ने अपनी कोर टीम बनाई थी, जिसमें उन्होंने कमलनाथ को भी शामिल किया था। कांग्रेस पार्टी इमरजेंसी के दौरान जेल जाने वालों को पेंशन देने के शुरू से खिलाफ में रही है। अब जब इमरजेंसी के दौरान कांग्रेस का पूरा साथ देने वाला कोई शख्स प्रदेश का मुखिया उस पेंशन को कैसे चालू रख सकता है। वैसे भी कमलनाथ सरीखे कांग्रेसी नेता प्रदेश की जनता से ज्यादा गांधी परिवार के प्रति जवाबदेह हैं।

हालांकि हरियाणा, महाराष्ट्र के साथ बिहार में भी इमरजेंसी के दौरान जेल जाने वालों को पेंशन दिया जा रहा है। लेकिन मध्य प्रदेश में निजाम बदलने के साथ ही लोकतंत्र के मूल्य की रक्षा करने वालों पर मुख्यमंत्री कमलनाथ की कुटिल दृष्टि पड़ गई है।

URL : Kamal Nath, chief minister of MP puts on hold pension for its prisoners!

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