चाटुकार समीक्षक मसंद ने केदारनाथ को बॉलीवुड का ‘टाइटेनिक’ बताया



Vipul Rege
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जब ‘केदारनाथ’ के रिव्यू सामने आए तो एक बात पर मुझे बड़ी हैरानी हुई। लगभग सभी समीक्षकों ने ‘सारा अली खान’ के अभिनय की प्रशंसा की। ये असामान्य था क्योंकि नामचीन समीक्षकों की राय से इतर पब्लिक रिव्यूज पर निगाह डाले तो ऐसा नहीं लगता कि सारा दर्शक को प्रभावित कर सकी हो। जब फिल्म नहीं चली तो सारा अली खान के कॅरियर को ‘सेट’ करने के प्रयास शुरू हो गए । नामचीन समीक्षकों की इस तारीफ के पीछे ‘गहरा राज़’ छुपा है। सारा अली खान बॉलीवुड की रेस में दौड़ता ‘अनुभवहीन घोड़ा’ है जिस पर करोड़ो का दांव खेल दिया गया है।

‘केदारनाथ’ ने तीन दिन में लगभग 17 करोड़ का व्यवसाय किया है। आज के दौर में बॉक्स ऑफिस इतना निर्मम है कि यदि शुरूआती तीन दिन में फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स न मिले तो सोमवार से उसके चलने के अवसर आधे से भी कम हो जाते हैं। क्या अभिषेक कपूर, सुशांत सिंह राजपूत की फॉलोइंग इतनी कम है कि इसे अपेक्षित ओपनिंग भी न मिल सकी। एक बेहद बुरी फिल्म को दर्शक ने सिरे से नकार दिया तो इसमें उसका क्या दोष है। वह ऐसी फिल्म पर पैसा खर्च भी क्यों करे। सारा अली खान के औसत अभिनय की प्रशंसा करने का ध्येय इतना है कि केदारनाथ की खराब पब्लिसिटी का असर रणवीर सिंह की आगामी फिल्म ‘सिम्बा’ पर न पड़ जाए।

वे अपनी पहली फिल्म में बेहद औसत दर्जे की अभिनेत्री साबित हुई हैं। उनका चेहरा भी ऐसा नहीं है कि ‘कटरीना’ की तरह औसत अभिनेत्री होने के बावजूद खूबसूरती के बल पर करियर संवार ले। निर्माता अब समझ रहे हैं कि सारा में न उनकी माँ अमृता सिंह के गुण हैं न उनके पिता सैफ से उन्हें दमदार अभिनय विरासत में मिला है। विरासत का अभिनय देखना हो तो आलिया भट्ट और श्रद्धा कपूर का नाम लिया जा सकता है। इन दोनों ने मौलिक अभिनय के बल पर मुकाम हासिल किया है।

नामचीन फिल्म समीक्षक इस फिल्म की तारीफ़ में इस कदर अंधे हो गए कि उन्हें तथ्यों का भान तक नहीं रहा। सुपर क्रिटिक राजीव मसंद ने केदारनाथ को ‘भारतीय टाइटेनिक’ बताकर प्रशंसाओं की बाढ़ ला दी। ये बात और है कि उनके प्रशंसकों ने ही उन्हें इस बात पर ट्रोल कर दिया। मैंने ऊपर लिखा है कि सारा अली खान पर करोड़ों का दांव लगा है और इसलिए ही मसंद जैसे समीक्षक एक बुरी फिल्म को दर्शक पर लादने की कोशिश में है।

इस वर्ष कई ‘स्टार सन’ लॉन्च किये गए लेकिन अधिकांश पहली फिल्म से ही डूब गए। सलमान खान के जीजा आयुष शर्मा की ‘लवयात्री’ बुरी तरह पिटी। अनिल शर्मा के बेटे उत्कर्ष की ‘जीनियस’ पहले दिन ही ढह गई। यही हाल सारा अली खान का रहा है। जान्हवी कपूर का डेब्यू उनसे लाख गुना बेहतर रहा था। रणवीर सिंह की ‘सिम्बा’ के लिए सारा अली खान खतरे की घंटी समान है। सिम्बा की प्रारम्भिक रिपोर्ट खास उत्साहजनक नहीं है। कहीं ऐसा न हो कि सारा अली खान की जल्द वापसी हो जाए।

URL : film has been marred by the controversy of love jihad

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Vipul Rege
Vipul Rege
पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।