अपने लिए सम्भावनायें तलाशने की कोशिश है, एमजे अकबर के नाम रविश कुमार का खुुला पत्र!

Posted On: July 7, 2016

रविश जी का खुला पत्र एम जे अकबर के नाम ! मेरा विश्लेषण !

पत्रकारिता में भी अब सीरियल जैसा ड्रामा देखने को मिला रहा है! हमारे रविश जी को ले लीजिए जिन्होंने पत्रकारिता में खुद के लिए सिम्पैथी खड़ा करने के लिए अपनी माँ के लिए प्रयुक्त जिन शब्दों को दोहराया है, मेरे लिए वो लिखना भी मुश्किल है, देश की विडम्बना है या संविधान में मिली आज़ादी की हम किसी के लिए कुछ भी लिख या बोल सकते हैं ! सब अभिव्यक्ति की आजादी के तहत आता है,इससे रविश जी जैसे वरिष्ठ पत्रकार भी अछूते नहीं! अगर आप किसी वर्ग विशेष में अपनी अपनी धाक जमाए हुए है तो आपके खिलाफ खड़ा वर्ग भी कम नहीं है, लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर माँ या परिवार के लिए अपशब्दों का प्रयोग बिल्कुल अनुचित है!कोई भी बुद्धिजीवी इन शब्दों में कड़ी आपत्ति दर्ज कर सकता है? मैं इन अनुचित शब्दों का पुरजोर विरोध करता हूँ.

रविश जी, लेकिन आपका यह खुला पत्र ,खुला न हो कर अवसादों से त्रस्त लगता है! अगर किसी ने आपकी माँ को गाली दी भी है तो इसका बखान आप सार्वजनिक तौर अपने शब्दों में कैसे कर सकते हैं? फलां जगह पर मेरी माँ को फलां फलां कहा गया ? माँ के नाम पर सिम्पैथी का जो खेल रविश जी आप खेल रहे हैं वो बस एकता कपूर के ड्रामा सीरीज में अच्छा लगता है ! रविश जी आप मीडिया के पुराने चावल हैं जिनका सारा उबाल बह चुका है ! जब चावल में से उबाल के रूप में सारा पानी सूख जाता हैं न तो, वह जलने लगता है और उसमें से बदबू आने लगती है और आज उसी बदबू को फैला कर आप लोगों के मन में अपने लिए जगह तलाश रहे है ,लेकिन आपको एक बात बता दूँ ! जनता भावुक है, बेवकूफ नहीं so please try it in experts advise !

हालाँकि मैं पत्रकारिता के क्षेत्र में नया हूँ ! जो कुछ बातें मैंने समझी है आपके द्वारा लिखे इस खुले पत्र से, हो सकता है वो निराधार हों और केवल मेरे मस्तिष्क और विचारों का भ्रम हो! रविश जी कहीं इस सन्देश के पीछे आने वाला उत्तर प्रदेश का चुनाव तो नहीं है जो आप राजनैतिक पार्टियों को एम जे अकबर को लिखे इस पत्र के द्वारा अपना सन्देश देना चाहते हों कि अगले चुनावों में मेरे नाम पर भी विचार करें क्योंकि पत्रकारिता के क्षेत्र में मेरे दिन फिर गए हैं.

रविश जी एक तरफ तो आप लेख या so called पत्र लिखते हैं उसके बाद उसी लेख के बीच में ‘*’ और नीचे ‘कंडीशन अप्लाई ‘ का नोट चस्पा कर देते हैं! पत्रकारिता में जरूरी नहीं की सब आपने सम्बंधित अथवा इत्तेफाक रखते हों कुछ आपके विरोधी भी हो सकते हैं लेकिन आलोचनाओं को क़ानून के दायरे में घसीटना न किसी वरिष्ठ पत्रकार को शोभा देता है और न किसी सम्माननीय चैनल को. आपने पत्र लिखा है तो उसका प्रतिउत्तर सुनने के लिए भी आपकी जवाबदेही बनती है, पत्रकारिता के बीच में जो परिवार को लेकर आते हैं वो गूढ़ हैं किन्तु आप तो जिम्मेदार व्यक्ति हैं.

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1 Comment on "पावर ब्रोकर पत्रकार मिलकर कालेधन के खिलाफ हो रही इस कार्रवाई को रोकने की कोशिश में है!"

  1. Ashutosh Maharaj ji is an epoch making personality. He is not only a Spirtual Master but also a Social Reformer. He has done a lot for the Mankind, he has transformed many criminals into Reformers and volunteers, therefore no question should arise for his cremation or declaring him clinically dead. He is in SAMADHI( the extreme state of meditation) .He will definitely come back soon. In ancient times also Shree Adi Guru Shankar Acharya, Mahatama Budhh, Ramkrishna Paramhans and many more went in the state of Samadhi and came back.

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