कपिल शर्मा कॉमेडी स्टेज पर करो, देश और व्यवस्था के साथ नहीं !

कपिल शर्मा ने टैक्स देकर एहसान चुकाया है देश पर? और ये देश तो सिर्फ नरेंद्र मोदी का है इसलिए वो मोदी से सवाल कर रहे हैं कि दूसरों से रिश्वत लेना तो ठीक है मुझ से क्यों ली गई? कपिल शर्मा क्या तुम्हें पता नहीं कि इस देश में रिश्वत लेना और देना दोनो अपराध है। इसे भारत की सुप्रीम कोर्ट ने कई बार साफ कर दिया है। देश दुनिया घुमते हो इतना बड़ा धंधा करते हो तो पता होना चाहिए कि पीसी एक्ट की धारा के तहत रिश्वत लेना ही नही देना भी अपराध है।

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक लंबा आदेश भी जारी किया था। खैर, तुम्हारा एक एड ध्यान आता है जिसमें तुम कहते हो ‘देखो जी ऐसा है सबसे बड़ा पैसा है’। तुम शायद ठीक सोचते हो। तुम्हारी इसी सोच ने शायद तुम्हें प्रेरित किया हो कि तुम कुछ लाख रुपए में भ्रष्ट बीएमसी को खरीद लोगे। इसीलिए पांच लाख देकर गैरकानूनी तरीके से अपना घर और ऑफिस बनवा रहे थे।

कपिल,एक आम आदमी समझता है कि सामान्यतः हम रिश्वत तभी आसानी से देते हैं जब हम अपना काम गैरकानूनी तरीके से और जल्दवाजी में करवाना चाहते हैं। नव धनाढ्यों के साथ अक्सर होता है जो तुम्हारे साथ हुआ। लेकिन यदि तुम रिश्वत और व्यवस्था से इतने दुखी और अच्छे दिन की ऐसी चाह रख रहे हो तो ट्ववीट करने से पहले थाने में इसकी शिकायत क्यों नहीं की? यह साबित करता है कि तुम गैरकानूनी तरीके से अपना काम रिश्वत देकर करवाना चाहते थे। 2015 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक पीसीएक्ट में न सिर्फ नीजि क्षेत्र के अधिकारी आएंगे बल्कि रिश्वत देने वाला भी।

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री पीके थुंगन को रिश्वतखोरी के जिस मामले में सजा हुई थी उसमें कोर्ट ने रिश्वत देने वाले को भी कटघरे में लिया था। रिश्त देने वाले अक्सर आरोप से बच इसलिए जाते है क्योंकि अदालत हर केस में अपराधी का मोटिव देखता है। रिश्वत के केस में अदालत अक्सर इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि रिश्वत देने वाले की मजबूरी थी ,उसकी नियखराब नहीं थी। लेकिन इस मामले में साफ लग रहा है कि तुम्हारा मोटिव न सिर्फ गैरकानूनी काम कराने का था बल्कि ट्ववीट करने की तुम्हारी नियत बताती है कि बहुत पैसे कमाने के बाद राजनीति की चकांचौध तुम्हें खींच रही है। ऐसी महात्वाकांक्षा अच्छी है। लेकिन देखो भाई ऐसा है, पैसा कमा लेने से अकल भी आ जाए यह जरुरी नहीं।

खैर,कानून को चाहिए कि वो अपना काम करे। 15 करोड़ टेक्स देने के बाद भी अच्छे दिन की तुम्हारी कितनी चाहत है, वाह कमाल की चाहत है। वो तो दिख रही है। गैरकानूनी काम तुम जैसे लोग करते रहें और मोदी अच्छे दिन लाते रहें। कमाल है तुम जैसे अच्छे दिन के चाह वालों की, कमाल की है तुम्हारी भूख।अब देश के लिए अच्छे दिन जब आए ,तब आए तुम्हारे तो आ गए हैं। कानून को चाहिए कि वो तुम्हें बताए कि देखो जी ऐसा है पहले बताओ कि तुमने रिश्वत दी क्यों? यदि तुम्हारे ऊपर सख्ती नही की गई तो सचमुच आम आदमी का भरोसा अच्छे दिन से उठ जाएगा। आखिर तुमने पांच लाख रुपए रिश्वत देकर अच्छे दिन लाने की जो कोशिस की है उसके लिए तुम से थाने में बैठा कर पूछ ताछ तो जरुर होनी चाहिए कि आखिर तुम्हारे इस प्रयास में बीएमसी और महाराष्ट सरकार के और कौन कौन से अच्छे दिन के चाहक थे? देखो जी ऐसा है कॉमेडी स्टेज पर करो बालक, देश और व्यवस्था के साथ न करो।

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Ashwini Upadhyay
Ashwini Upadhyay
Ashwini Upadhyay is a leading advocate in Supreme Court of India. He is also a Spokesperson for BJP, Delhi unit.


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