Category: व्यक्तित्व विकास

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अक्षय कुमार द्वारा मोदी का साक्षात्कार…सनातनी राजा की कसौटी पर खड़े उतरते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी!

साक्षात्कार का आध्यात्मिक विश्लेषण- ऋषि सदृश्य जीवन- संन्यासी, दीवाली में पांच दिन के लिए एकांत वन में बस पीने के पानी के साथ गुजारना। सत्ता से निर्लिप्त- सैलरी कर्मचारियों के बच्चों के नाम, बैंक...

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी क्षमता के स्रोत का खोला राज, हिमालय से मिली सीख को कभी खुद से अलग नहीं किया !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने अनछुए पहलुओं से पर्दा उठा दिया है। जो लोग आज तक उनकी क्षमता के स्रोत तथा हिमालय में बिताए अपने दो वर्षों के राज से अनभिज्ञ थे उनके...

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नाम को उड़ने दो,खुद जमीन पर रहो

सुबह एक वीडियो पर निगाह ठहर गई और उससे एक विचार का पौधा उग आया। लोकप्रियता कैसी भी हो ‘आभासी’ होती है। वास्तविक लोकप्रियता भी ‘आभासी’ ही होती है। लोकप्रियता की जो उड़ान भरता...

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अगले सौ साल में ब्रम्हाण्ड में नया घर न खोजा तो कंप्यूटर करेंगे हम पर शासन!

प्रख्यात भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग अपनी मौत के सात माह बाद फिर चर्चा में हैं। हाल ही में उनकी आखिरी किताब ‘ब्रीफ आंसर्स टू ब्रीफ क्वेश्चंस’ प्रकाशित हुई है। ब्रम्हाण्ड के बारे में विश्व...

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मृत्यु से पूर्व ही अपनी मौत का एहसास हो गया था वी.एस.नायपाल को! सनातन ब्राह्मणत्व की समझ से यह संभव हुआ!

दुनिया में ऐसे बहुत कम साहित्यकार हुए हैं जो अपनी मृत्यु का आभास कर अपनी रचना को अंतिम बता गए हों। अपना अधिकांश जीवन त्रिनिदाद और ब्रिटेन में बिताने वाले वीएस नायपॉल अंग्रेजी के...

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वास्तविक जीवन का भी सुपरहीरो है ‘हल्क’!

एवेंजर्स के सुपरहीरो ‘हल्क’ को जब गुस्सा आता है तो वह हरे रंग का दानव बन जाता है। गुस्सा हल्क की सबसे बड़ी ताकत है। हल्क को दुनिया भर के सिनेमाई दर्शक पसंद करते...

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मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक दुनिया में सिर्फ पांच प्रकार के लोग है, इनमें से आप किस प्रकार के हैं?

एक बार जब आप अपने व्यक्तित्व के प्रकार को समझ लेते हैं, तो दूसरों को पहचानना आसान हो जाता है एमी मॉरिन। आपका व्यक्तित्व हर चीज को प्रभावित करता है वह चाहे दोस्तों का...

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भारतीय शिक्षा प्रणाली- पाठ्यपुस्तक लिखने वालों को काटे हुए है एक विचारधारा का कीड़ा!

सूर्य सिद्धांत स्पष्ट करता है कि – “सर्वत्रैय महीगोले स्वस्थामुपरिस्थितम्। मन्यन्ते खेयतो गोलस्तस्यक्कोर्ध्वक्कवोप्यध:” अर्थात यह पृथ्वी गोल है इसलिये हम सभी अपने अपने स्थान को उपर ही समझते हैं। यह पृथ्वी वृहद शून्य के...

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इमरान खान के लिए भारत की कोई महिला पत्रकार बिना अंगिया पहने चली जाए तो फिर उसका उद्देश्य साक्षात्कार लेना नहीं, बल्कि ‘कुछ और’ है!

वामपंथ ने हमेशा, विरोधियों के चरित्र का हनन किया है, जबकि इनका खुद का चरित्र बहुत गिरा हुआ है। इसलिए मैंने कांगी-वामी के चरित्र का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने का बीड़ा उठाया है ताकि कांटे...

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वामपंथी और तथाकथित बुद्धिजीवियों ने प्राचीन भारतीय विमान प्रौद्योगिकी पर तथ्यहीन शोध पत्र के झूठ को फैलाया!

मेरे आलेख “वैमानिक शास्त्र – कल्पना और विचारधारा” से असहमत मित्र ने एक शोधपत्र भेजा – “अ क्रिटिकल स्टडी ऑफ द वर्क – वैमानिक शास्त्र (साईंटिफिक ओपीनियन, 1974, पृ 5-12)” तथा इसे इंडियन इंस्टीट्यूट...

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वैदिक विमान- जब दुनिया ठीक से नेकर सिलना नहीं जानती थी, भारतीय ग्रंथों में सैंकडो बार वायु-मार्ग और विमान शब्द का हुआ था प्रयोग!

वैमानिक शास्त्र में मेरी जिज्ञासा थी। इसका कारण पुष्पक विमान नहीं बल्कि वामपंथी खेमे के पत्र-पत्रिकाओं व वेबसाईट पर प्रकाशित वे आलेख थे जिनमें से कुछ के शीर्षक हैं “चालीस साल पहले ही खुल...

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मैक्समूलर का वेदों को दुष्प्रचारित करने का षड्यंत्र, चिट्ठियों ने खोला राज!

राजीव रंजन प्रसाद। कुछ उद्धरण प्राप्त हुए कि मैक्समूलर और मैकाले के बीच कई दौर की वार्ता हुई, कतिपय इतनी तीखी कि उसमें मैकाले ही बोलते रहे। इस विवरण को आगे बढाने से पूर्व...

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साम्राज्यवादी ब्रिटेन की नकल करती हमारी अध्ययन परिपाटी में मौलिकता कम है और शोर अधिक!

राजीव रंजन प्रसाद। जिस डाली पर बैठा उसी को काटने वाला व्यक्ति क्या कभी कालिदास बन सकता था, यदि उसके जीवन में विद्योत्तमा न होतीं? राजा शारदानंद की विदुषी और शास्त्रज्ञ कन्या विद्योत्तमा का...

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महर्षि अगत्स्य का विद्युत शास्त्र!

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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शिक्षा में हुई चूक का परिणाम है जो शल्यचिकित्सा के जनक को पश्चिम का मुंह ताकना पड़ रहा है?

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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राजा और रंक के भेद को मिटा कर ही भारतीय शिक्षा प्रणाली हो सकती है दुरुस्त!

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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वर्तमान शिक्षा प्रणाली ऐसी पौध तैयार कर रही है जिसमें न कल्पनाएं हैं न नैसर्गिक प्रतिभा!

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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समान शिक्षा की अवधारणा ही देश में समान सोच का बीजारोपण कर सकती है।

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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राहुल गांधी से लेकर रवीश कुमार तक, झूठ का वह मनोविज्ञान, जिसकी काट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तुरंत ढूंढ़ना होगा, अन्यथा देर हो जाएगी!

आजकल कांग्रेस अध्यक्ष और उनके ‘पीडी पत्रकारों’ के झूठ बोलने का तरीका एक-सा हो गया है! और यह एकदम वही तरीका है, जिसे हिटलर के प्रचारमंत्री गोयबल्स ने अपनाया था। यानी- ‘एक झूठ को...

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भारत की शिक्षा व्यवस्था और मैकाले का भूत!

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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