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Category: व्यक्तित्व विकास

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महर्षि वेदव्यास पर अनर्गल प्रलाप करते जग्गी!

राहुल सिंह राठौर ज्योतिषी। जग्गी वासुदेव को उत्तर भारतीयों ने अपने सिर आँखों पर बैठा रखा है, पर यह आर्य-द्रविड़ संघर्ष की मानसिकता से बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं। इनके अनुसार वेद...

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हिन्दुओं को सद्भावना का पाठ पढ़ा कर विधर्मियों का साथ क्यों ?

सुभाष चन्द्र। सद्गुरु जग्गी – हिन्दुओं कोसद्भावना का पाठ पढ़ा करविधर्मियों का साथ क्यों देतेहो –इतिहास में उन्होंने क्याकिया और आज भी क्या कररहे हैं, ये तो ध्यान कर लेते – -गतांक से आगे...

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सद्गुरु जग्गी वासुदेव हिन्दू समाज को जड़ से काटकर समाज को क्यों नष्ट करना चाहते हैं ?

सुभाष चन्द्र। सद्गुरु जग्गी -एक दिन में कितनेहिन्दू विरोधी पत्रकारों के “बाप”बन गए – कितने सेक्युलरिस्टों केआँख के नूर बन गए । मगर हिन्दू समाज को जड़ों सेकाट कर समाज को नष्ट करनाक्यों चाहते...

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रेत-समाधिः बधाई लेकिन…?

डॉ. वेदप्रताप वैदिक गीताजंलि श्री के उपन्यास ‘रेत-समाधि’ के अंग्रेजी अनुवाद ‘टाम्ब आफ सेन्ड’ को बुकर सम्मान मिलने पर हिंदी जगत का गदगद होना स्वाभाविक है। मेरी भी बधाई। मूल अंग्रेजी में लिखे गए...

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बिल्ली और फेमिनिज्म : यात्रा

सोनाली मिश्रा। प्रकृति से दूर हुए मानव की निर्बलता देखनी है तो प्रसव क्रिया में देखिये. कल रात को अंतत: वह वह घड़ी आई जब वह बिल्लो उस पीड़ा से दो चार हो रही...

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राजनीति, जनमानस और कुचक्र

राजीव नांदल। राजनीति वह पाठशाला है जहाँ मनुष्य कितना भी पढ़ ले सदा छात्र ही रहता है। इस पाठशाला में कोई मुख्य अध्यापक नहीं होता। जहाँ छात्र यह मान लेता है कि अब वह...

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हिजाब या अलगाववादी षडयन्त्र

भारतीय संविधान के अनुसार प्राथमिक शिक्षा सबके लिए अनिवार्य है। किन्तु इस अनिवार्यता के बावजूद दुर्भाग्यवश स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में भी देश की कुल जनसंख्या का 36.90 फीसदी हिस्सा आज भी निरक्षर है।...

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खुद की नौकरी छोड़कर युवाओं को रोजगार दिलाने का संकल्प लेकर निःशुल्क ट्रेनिंग सेंटर चलाने वाले शहडोल मध्यप्रदेश के डॉ. पंकज शर्मा

यह कहानी है मध्यप्रदेश के शहडोल  के डॉ पंकज शर्मा (जन्म: 4 जुलाई 1981) की जो एक सक्रिय समाजिक कार्यकर्ता हैं। जो अपनी प्रशिक्षक की नौकरी छोड़कर युवाओं को रोजगार दिलाने का संकल्प लेकर...

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देवदूत !

अर्चना कुमारी । आमतौर पर पुलिसकर्मियों पर रिश्वत लेने का आरोप लगते रहते हैं, जिससे उनकी छवि अच्छी नहीं मानी जाती लेकिन एक ऐसा भी पुलिसकर्मी सामने आया जो अपनी जान पर खेलकर दो...

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आप ऊँचे हैं या लंबे ?

कमलेश कमल। क्या आपने कभी गौर किया है कि अंग्रेजी में आप अपनी height बताते हैं, length नहीं ; जबकि हिंदी में अपनी लंबाई लिखते हैं। दैनिक जीवन में कुछ ऐसा ही हम सुनते...

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मोदी और शाह के खास नए पुलिस कमिश्नर!

अर्चना कुमारी। रिटायरमेंट से पहले राकेश अस्थाना को नया दिल्ली पुलिस का कमिश्नर नियुक्त किया गया। मोदी और शाह के करीबी  गुजरात कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना   सीमा सुरक्षा बल...

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छूटे बैग को मजदूर को वापस करने वाले सिपाही सम्मानित!

अर्चना कुमारी। पुलिस कर्मियों के बारे में प्रचलित है कि वह रिश्वत कमाने तथा दूसरे का माल दबाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते। लेकिन दिल्ली पुलिस के एक सिपाही ने मिसाल पेश करते...

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धर्मांतरण आतंकवाद का डटकर मुकाबला करने वाली कल्पना सिंह को सौ-सौ सैल्यूट

दिलीप। भारत के कई राज्यों में सरकारें बदल चुकी हैं लेकिन इको सिस्टम आज भी नहीं बदला है इको सिस्टम पर आज भी जिहादियों कम्युनिस्टों और कांग्रेसियों को कब्जा है लेकिन इसी इको सिस्टम...

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Ashwini upadhyay, एक ऐसा व्यक्तित्व जो राष्ट्र हित में अपनी Govt और सुप्रीम कोर्ट से टकराने से भी नहीं हिचकते!

चित्रांश सक्सेना। भारत के संविधान में कुछ विकृतियों को उजागर करते और जनता के समक्ष स्पष्टता से विचार रखते हैं अश्विनी उपाध्याय। जागरूकता अभियान छेड़ते और समाज एवं देशहित में कई याचिकाएं दायर करने...

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कोरोना वायरस की डायरी के कुछ फटे हुए पन्ने : जैविक युद्ध, अध्यात्म, सामाजिक व्यवहार, फार्मा इंडस्ट्री, यूरोपीय मॉडल और बहुत कुछ!

आदित्य जैन। पहला फटा हुआ पन्ना : विश्व के सभी देशों में इस वायरस ने अपनी स्याही से वहां के राष्ट्रीय, सामाजिक, राजनीतिक, व्यक्तिगत आदि पन्नों पर अपनी कहानी लिख छोड़ी है । कहीं...

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अच्छा नहीं, बेहतर बनने की कोशिश करें!

कमलेश कमल। अच्छा होना एक अस्पष्ट अवधारणा है, जबकि बेहतर बनना सुस्पष्ट है और परिणामकेन्द्रित है। अच्छा और बुरा वैसे भी सापेक्षिक शब्द हैं। इसलिए, होना यह चाहिए कि हमारा ध्येय हो कि हम...

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कोरोनकाल में शिक्षा का अलख जगा रहे शशि प्रकाश सिंह

कोरोनाकाल में सभी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। ऐसे छात्रों को कोटा में रहने वाले शिक्षाविद् शशि प्रकाश सिंह (एसपीएस सर) सहायता प्रदान करेंगे। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ निवासी शिक्षक शशि...

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बिस्तर पर लेट गया हूँ…मन जगा है…आत्मा के कपाट की झीनी सी झलक है।

कमलेश कमल। जीवन की डोर सदा से ऐसी है…कब किसकी कट जाए…नहीं पता। एकदम से वही निर्णय– जब तक यह डोर नहीं कटती, लोगों को बचाना है, बचाते रहना है। बात साफ है– असमय...

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