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कन्फेशन बॉक्स और चर्च में बाल यौन शोषण!

मार्टिना (नाम हो सकता है असली न हो, कहानी असली है) आठ बरस की थी, जब उसके साथ एक पादरी ने उसके साथ कैथोलिक एलेमेन्टरी स्कूल में कन्फेशन बॉक्स में यौन शोषण किया।   उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए लिखा था “मुझसे जो करने के लिए कहा गया, वह मैंने किया।  

मुझे उनके गुप्तांग के साथ खेलने के लिए कहा गया और फिर उसने मुझे उसे चूसने के लिए कहा…..  उसके बाद उसने मुझे जाने के लिए कहा और नन ने मुझसे कहा कि अगर मैं फिर से शैतानी करूंगी तो शैतान आएगा और मुझे अपने साथ ले जाएगा।  और मैं डरी हुई थी, इतनी डरी हुई कि मैं नहीं चाहती थी कि मैं शैतान का शिकार बनूँ। ” 

इस घटना के बाद मार्टिना का यौन शोषण उस पादरी द्वारा एक साल तक लगभग रोज होता रहा।  उनकी दो और सबसे नज़दीकी दोस्तों का भी यौन शोषण हुआ।  मार्टिना वह भी बताती हैं कि जब वह तीनों लडकियां कन्फेशन बॉक्स में एक एक कर जाती थीं और एक एक कर वह रोती हुई आती थीं।  

मार्टिना कभी भी सामान्य जीवन नहीं जी पाईं।  मार्टिना को इस शोषण से तब मुक्ति मिली जब मार्टिना हाई स्कूल में आई और वहां से निकल गईं।  मार्टिना के अनुसार उन्हें लोगों पर विश्वास करने में बहुत मुश्किल हुई थी क्योंकि वह अपने साथ आठ वर्ष में हुए बलात्कार को भूल नहीं पाई थीं।  

उस दिन को याद करते हुए मार्टिना कहती हैं “वह मुझे चर्च में ले गया।  वहां कोई नहीं था।  वहीं पर उसने मेरे साथ सेक्स करना शुरू कर दिया।  और मैं उस समय केवल आठ साल की थी।  उसने मुझसे कहा कि मैं शांत रहूँ, नहीं तो जीसस जाग जाएंगे।  मुझे बस इतना याद है कि दर्द ही दर्द था वहां। ”

जरा कल्पना कीजिए कि यह लोग कैसे अपने बच्चों को प्रभु के नाम पर शोषण करते हैं। 

यह कहानी तो बाहर विदेश की है, पर संस्था के तौर पर चर्च ने कन्फेशन बॉक्स को यौन शोषण का हथियार बना लिया है।  आखिर यह कन्फेशन बॉक्स होता क्या है? और यह आठ बरस की बच्ची के लिए कैसे घातक हो सकता है?

कन्फेशन जिसे आम तौर पर पश्चाताप कहकर अनुवाद कर लिया जाता है, वह पूर्णतया अब्राहमिक रिलिजन का शब्द है, जिसका अर्थ है कि पाप की पुष्टि करना और चूंकि न्याय का दिन एक तो जरूर आएगा, जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक पापी आग में जलते रहेंगे तो वह प्रभु के सामने एक लकड़ी के बॉक्स में अपने पाप की स्वीकारोक्ति करेंगे।  

यह एक प्रकार से जीसस और उसके भक्त के मध्य संवाद है।  फिर उसमें पादरी का क्या काम? और आठ बरस की बच्ची, जिसने अभी दुनिया की शुरुआत ही नहीं की है क्या वह कुछ ऐसा पाप कर सकती है जिस कारण उसे कन्फेशन बॉक्स में जाना पड़े।  तो इस बात का उत्तर प्राप्त होता है The Dark Box: A Secret History of confession में, जिसमें लेखक अपने अनुभव के साथ साथ चर्च के तमाम अनुभवों को लिखते हैं।  

वह कहते हैं कि उन्हें पांच वर्ष की उम्र से कैथोलिक ईसाई रिलिजन के बारे में बताया जाने लगा था।  वह कहते हैं कि उन्होंने भी अपना पहला कन्फेशन महज सात बरस की उम्र में किया था।  वह यह भी कहते हैं कि यातना और नरक के लिए कन्फेशन पांच या छ वर्ष की आयु में ही शुरू हो जाते हैं।  

इसी किताब में वह आगे लिखते हैं कि कैसे कन्फेशन बॉक्स में छोटे बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण के कारण आत्महत्या, आत्महत्या के प्रयास की घटनाएं बढ़ी हैं।  ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न में, उन पाँचों व्यक्तियों ने आत्महत्या कर ली थी, जो चर्च में पादरी रोनाल्ड पिकरिंग के लिए आल्टर बोयज़ के रूप में काम कर रहे थे।  

मार्च 2010 में, जब जर्मनी में कैथोलिक चर्च ने बच्चों के साथ चर्च में होने वाले यौन शोषण को लेकर एक हॉटलाइन स्थापित की थे तो 8500 से ज्यादा अभिभावकों ने कॉल किया था।  और इन मामलों का विश्लेषण करने वाले एन्द्रीज़ ज़िम्मरमन (Andreas Zimmermann) ने जर्मन कैथोलिक न्यूज़ एजेंसी केएनए को बताया था कि शोषण करने वाले पादरियों ने अपनी नैतिक सत्ता अर्थात कन्फेशन का इस्तेमाल बच्चों पर मानसिक दबाव डालने के लिए किया था।  

ऑस्ट्रेलिया में चर्च में बाल शोषण पर वर्ष 2017 में जारी की गयी रिपोर्ट के अनुसार बच्चों के साथ यौन शोषण की घटनाएं प्राय: कन्फेशन बॉक्स में और चर्च में होती हैं।  इस रिपोर्ट के अनुसार 4000 से ज्यादा पीड़ितों ने व्यक्तिगत सत्रों में कहा कि उनका यौन शोषण धार्मिक संस्थान अर्थात चर्च में तब हुआ जब वह बच्चे थे।  

यह यौन शोषण रिलीजियस स्कूल, अनाथालयों और मिशन, चर्च, कन्फेशनल और अन्य धार्मिक संस्थानों में हुआ।  यह यौन शोषण बलात्कार सहित कई रूपों में था और शोषण करने वालों में पादरी, रिलीजियस ब्रदर्स और सिस्टर, मिनिस्टर, चर्च के बड़े लोग, रिलीजियस स्कूल्स में टीचर्स और रेजिडेंशियल संस्थानों में काम करने वाले सहित कई अन्य लोग शामिल थे।  

यह तो ऑस्ट्रेलिया और विदेशों की बात है, कि किस तरह यह अब्राह्मिक रिलिजन अपने ही बच्चों को संस्थागत रूप से शोषण का शिकार बनाता है, और फिर उनकी पीड़ा को नकारने का भी प्रयास करता है जब बाल शोषण के अपराधी पादरियों को मानसिक रोगी कहा जाता है और उनके अपराध नकार दिए जाते हैं।

क्या हम उन मातापिता की पीड़ा का अनुमान भी लगा सकते हैं, जिनके बच्चों के साथ एक संस्थागत रूप से यह शोषण होता है और उनकी सुनवाई भी कहीं नहीं होती क्योंकि यह सभी को पता है कि सारा मीडिया और पश्चिम जगत का वाम मीडिया चर्च पोषित है।  

दक्षिण अफ्रीका के कार्डिनल ने कुछ ही वर्ष पूर्व बच्चों के साथ यौन अपराध करने वाले पादरियों को व्याधि बताया था, जिसे ठीक किए जाने की जरूरत है न कि यह आपराधिक स्थिति है।

क्या विडंबना है कि जीसस और भक्त के बीच संवाद को भी अपनी हवस का माध्यम बनाने वाले लोग दो दिन बाद बच्चों को तोहफे देने का नाटक करेंगे, शायद यह उन अपराधों को छुपाने की कोशिश में होंगे जो यह अपने बच्चों के साथ करते हैं।  

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Sonali Misra

Sonali Misra

सोनाली मिश्रा स्वतंत्र अनुवादक एवं कहानीकार हैं। उनका एक कहानी संग्रह डेसडीमोना मरती नहीं काफी चर्चित रहा है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति कलाम पर लिखी गयी पुस्तक द पीपल्स प्रेसिडेंट का हिंदी अनुवाद किया है। साथ ही साथ वे कविताओं के अनुवाद पर भी काम कर रही हैं। सोनाली मिश्रा विभिन्न वेबसाइट्स एवं समाचार पत्रों के लिए स्त्री विषयक समस्याओं पर भी विभिन्न लेख लिखती हैं। आपने आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में परास्नातक किया है और इस समय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से कविता के अनुवाद पर शोध कर रही हैं। सोनाली की कहानियाँ दैनिक जागरण, जनसत्ता, कथादेश, परिकथा, निकट आदि पत्रपत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं।

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