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राजीव गांधी देश पर कर्ज छोड़ गये तो सोना गिरवी रखना पड़ा, सोनिया के मनमोहन कर्ज छोड़ गये तो तेल का दाम घटाना मुश्किल हो रहा है!

कांग्रेस आज अपनी शर्म को ताक पर रखकर मोदी सरकार के खिलाफ देश की अर्थव्यवस्था को चौपट करने का आरोप लगा रही है। शायद वह भूल गई है कि उन्हीं के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार की करतूतों के कारण साल 1991 में बैंक ऑफ इंग्लैंड में सोना गिरवी रखकर पूरे देश को शर्मशार होना पड़ा था। देश में आज यदि पेट्रो पदार्थ की कीमत बेकाबू हो रही है तो इसके लिए भी सोनिया गांधी की नियंत्रित वाली मनमोहन सरकार द्वारा लिया गया बेतहाशा तेल कर्ज ही जिम्मेदार है। ध्यान रहे कि मनमोहन सरकार द्वारा लिया गये दो लाख करोड़ रुपये का तेल कर्ज मोदी सरकार ने चुकाया है। इसलिए हे कांग्रेस के बेशर्म नेताओं मोदी सरकार पर अर्थव्यवस्था चौपट करने का आरोप लगाने से पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और मनमोहन सरकार के काले कारनामों को कम से कम एक बार स्मरण तो कर लो। क्योंकि गांधी परिवार की अय्याशी के कारण ही समय-समय पर देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जाती रही है।

मुख्य बिंदु

* पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार के कर्ज को चुकाने के लिए ही पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को 47 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड में गिरवी रखना पड़ा था

* पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सरकार के 2 लाख करोड़ का तेल कर्ज चुकाने के कारण ही आज देश में पेट्रो पदार्थ की कीमत बेकाबू हो रही है

आरबीआई के पूर्व गवर्नर वाइ वी रेड्डी ने अपनी किताब एडवाइस एंड डिसेंट में 1991 के उस दौर का जिक्र करते हुए लिखा है किस तरह महज 40 करोड़ रुपये कर्ज के लिए 47 टन सोना गिरवी रख कर पूरे देश को शर्मसार होना पड़ा था। उन्होंने लिखा है कि नब्बे के शुरुआती दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था को वो दिन भी देखना पड़ा जब भारत जैसे देश को अपना सोना विश्व बैंक में गिरवी रखना पड़ा था। गाँधी परिवार की अथाह लूट ने देश की अर्थ व्यवस्था को रसातल में पंहुचा दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासनकाल में देश का विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम हो गया था की महज 15 दिनों का आयात करने लायक ही पैसा था। देश की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि देश के पास तब सिर्फ 1.1 अरब डॉलर का ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा था। देश की यह स्थिति पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार की देन थी। तभी तत्कालीन प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर के आदेश से भारत ने 47 टन सोना बैंक ऑफ़ इंग्लैंड में गिरवी रखा था। जिससे पूरे देश को शर्मसार होना पड़ा था।

और हां, तब चंद्रशेखर सरकार को सोना गिरवी रखने की सलाह देने वालै यही महान अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह थे। और जब यह महोदय प्रधानमंत्री बने तो देश के बैंकों का 9 लाख करोड़ डुबोया(NPA) एवं 2 लाख 57 हजार करोड़ का तेल बान्ड, 1 लाख 76 हजार करोड़ का 2जी, 1 लाख 86 हजार करोड़ का कोयला खदान घोटला जैसे अनेक घोटालों को अंजाम देकर देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया। और यही मनमोहन आज पीएम मोदी को प्रवचन दे रहे हैं!

अगर देश में पेट्रो पदार्थ की कीमत बेकाबू है तो इसके लिए भी पूर्व की यूपीए सरकार ही जिम्मेदार है। क्योंकि मनमोहन सरकार ही 2 लाख करोड़ रुपये का विशाल तेल कर्ज मोदी सरकार के सिर छोड़ गई थी। जिसे मोदी सरकार ने चुकाया है। यह कर्ज उसी प्रकार का है जैसे राजीव गांधी की सरकार नब्बे के दशक में आने वाली सरकार के माथ पर बेतहशा कर्ज छोड़ गई थी, जिसे चुकाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को देश का सोना गिरवी रखकर चुकाना पड़ा था। इससे स्पष्ट हो जाता है कि कांग्रेस किस प्रकार देश की अर्थव्यवस्था को संभालती रही है।

2 लाख 57 हजार करोड़ का तेल कर्ज छोड़ गये थे मनमोहन सिंह मोदी सरकार को चुकाने के लिए:-

1991 में तो आर्थिक स्थिति इतनी बदतर थी कि देश दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया था। विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने कर्ज देने से मना कर दिया था। देश पर विदेशी कर्ज 70 अरब डॉलर के पार कर गया था। कोई निवेशक भी देश में निवेश करने को तैयार नहीं था। जो निवेशक आए थे उन्होंने ही अपना पैसा निकाल लिया था। अंत में देश को दिवालिया होने से बचाने के लिए ही तत्कालीन कार्यकारी प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की अनुमति से भारत सरकार ने 47 टन सोना विदेश में गिरवी रखकर कर्ज चुकाया था। भारत की इस स्थिति के लिए आरबीआई के पूर्व गवर्नर वाई वी रेड्डी ने अपनी किताब एडवाइस एंड डिसेंट में पूर्ववर्ती राजीव गांधी की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। तभी तो कांग्रेस सरकार के बारे में यह कहावत प्रचलित है कि एनडीए सरकार अपने कार्यकाल में देश का खजाना भरती है और कांग्रेस सरकार अपने दो कार्यकाल में उसे खाली कर जाती है। हालांकि इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस को ऐसा मौका देने वाले ही नहीं हैं, फिर भी खुदा न खास्ता कांग्रेस सत्ता में आएगी तो देश की अर्थव्यवस्था को फिर गर्क में पहुंचा देगी।

एक बात और! जब राजीव गांधी ने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया, और जब मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था को चौपट किया तो पर्दे के पीछे से इटालिन सोनिया गांधी का ही असली शासन था। ‘अर्थशास्त्र’ जैसी महान रचना के लेखक चाणक्य ने ठीक ही कहा था, विदेशी शासक देश को बर्बाद कर देता है। आधुनिक भारत इसी का भुगतान कर रहा है।

URL: Congress responsible for falling rupee and rising petrol diesel prices

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