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इंडिया स्पीक्स द्वारा कोर्ट फिक्सरों को Expose करने पर सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल!

⦁ सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने गृह मंत्रालय को इंदिरा जय सिंह और उसके पति आनंद ग्रोवर के एनजीओ लॉयर्स कलेक्टिव द्वारा प्राप्त किए गए धन पर कार्रवाई की स्थिति जानने के लिए नोटिस जारी किया।


⦁ लॉयर्स कलेक्टिव का लाइसेंस 2016 में निलंबित कर दिया गया था और विदेशी चंदा (नियमन) अधिनियम (एफसीआरए) के उल्लंघन को लेकर बाद में उसके पंजीकरण को स्थायी रूप से रद्द कर दिया गया था। पीआईएल में आरोप लगाया गया है कि जयसिंह, ग्रोवर और लॉयर्स कलेक्विटव ने एफसीआरए, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) तथा भ्रष्टाचार रोकथाम कानून का उल्लंघन किया।


⦁ इस सिलसिले में अधिवक्ताओं के एक स्वैच्छिक संगठन लॉयर्स व्याइस ने एक जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इनके द्वारा जुटाए गए धन का राष्ट्र के खिलाफ गतिविधियों में दुरूपयोग किया गया। याचिका अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार गुप्ता के मार्फत दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि गंभीर आरोप होने के बावजूद केंद्र ने जयसिंह, उनके पति ग्रोवर और लॉयर्स कलेक्टिव की छानबीन नहीं किया। इस संस्था का गठन जयसिंह और ग्रोवर ने 1981 में किया था।


⦁ यह आरोप भी लगाया गया है कि चेक और नकदी के रूप में देशी चंदा प्राप्त किया गया जिसकी जांच किए जाने की जरूरत है।


⦁ यह याचिका केंद्र के 2016 के आदेशों पर आधारित है। मंत्रालय ने जयपुर निवासी राजकुमार शर्मा के पत्र पर संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की थी। गृह मंत्रालय ने 2015 में दायर एक शिकायत पर 31 मई और 27 नवंबर 2016 के दो आदेश जारी किए थे।


⦁ सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी धन प्राप्त करने और उसके उपयोग से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने को लेकर कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने एवं इसकी जांच की मांग करने वाली एक याचिका पर अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ से 8 मई को जवाब मांगा।


⦁ जयसिंह ने केंद्र के लिए जुलाई 2009 से मई 2014 तक अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल के रूप में काम करने के दौरान 96.60 लाख रूपया मेहनाताना प्राप्त किया था।


⦁ लॉयर्स कलेक्टिव ने 2006 के बाद से 28. 5 करोड़ रूपया विदेशी चंदा प्राप्त किया जिसमें से 7. 2 करोड़ रूपया फोर्ड फाउंडेशन यूएसए से प्राप्त किया गया जबकि 4. 1 करोड़ रूपया अत्यधिक विवादास्पद अमेरिकी दानकर्ता ओपेन सोसाइटी फाउंडेशन से प्राप्त किया गया।


⦁ आरटीआई के जरिए जुटाए गए आंकड़ों से यह जाहिर होता है कि जयसिंह के 2008 -09 में एएसजी बनने के बाद लॉयर्स कलेक्टिव ने लावी स्ट्रॉस फाउंडेशन, यूएसए और स्विटजरलैंड के फाउंडेशन ओपेन सोसाइटी जैसे विवादास्पद संगठनों से धन हासिल किए।


⦁ याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा, “democratic process of the country by unauthorisedly lobbying with Members of Parliament and (the) media for passing of certain legislation and to influence policy decisions”.


⦁ जयसिंह, ग्रोवर और लॉयर्स कलेक्टिव ने कहा कि वे इस घटनाक्रम से काफी परेशान हैं और उन्हें निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि जयसिंह ने शीर्ष न्यायालय की एक बर्खास्त महिला कर्मचारी का मुद्दा उठाया था, जिसने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

24 अप्रैल 2019 को इंडिया स्पीक्स डेली ने जोर-शोर से उठाया था यह मुद्दा

तो क्या NGO गिरोह और कोर्ट फिक्सरों के चंगुल में बुरी तरह से फंस चुका है सुप्रीम कोर्ट ?

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