कांग्रेस- कम्युनिस्ट से लेकर राजदीप सरदेसाई तक देशद्रोही गैंग और कन्हैया को बचाने मैदान में कूदे!

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जैसे ही जेएनयू देशद्रोह मामले में जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार समेत 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, कांग्रेस-कम्युनिस्टों समेत वामी-कांगी पेटीकोट पत्रकार उसके बचाव में मैदान में कूद पड़े हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेता तथा पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने इस चार्जशीट को बेतुका बताया है तो वहीं राजदीप सरदेसाई ने पुलिस प्रशासन पर तंज कसते हुए ब्रिटिश शासनकाल में देश भक्तों के लिए जिस कानून का उपयोग होता था उसी कानून को आज सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों के लिए इस्तेमाल कर रही है।

#JNUSeditionCase दिल्ली पुलिस की चार्जशीट मजबूत! अब नहीं बच पाएंगे देशद्रोही कन्हैया और उमर!

मालूम हो कि 9 फरवरी 2016 को जिस दिन भारतीय संसद पर हमला करने के दोषी आतंकी अफजल गुरू को फांसी दी गई थी उसी दिन तत्कालीन जेएनयूएसयू के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने अपने सहयोगी छात्र उमर खालिद के साथ मिलकर जेएनयू परिसर में देश विरोधी कार्यक्रम का आयोजन किया था। उस कार्यक्रम के दौरान कन्हैया कुमार और उसके देशद्रोही गैंग ने भारत तेरे टुकड़े होंगे इंसा अल्लाह इंसा अल्लाह, तथा अफजल गुरू हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं के नारे लगाए थे। इसी मामले में पुलिस ने सोमवार को कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।

पुलिस की चार्जशीट को बेतुका बताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इसे हास्यास्पद बताया है। इसके साथ ही मोदी सरकार की नीयत पर सवाल उठाया है। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन की काबिलियत पर शक जताते हुए लिखा है कि जांच टीम में शामिल कितने लोग भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए और इस धारा पर कानून से अवगत हैं या उन्होंने इसे पढ़ा भी है?

मालूम हो कि जो पी चिदंबरम आज देश की पुलिस पर सवाल खड़े कर रहे हैं वे देश के गृहमंत्री रह चुके हैं। उनके इस सवाल पर या कन्हैया कुमार और उसके देशद्रोही गैंग के बारे में लोग क्या सोचते हैं और क्या प्रतिक्रिया देते हैं आप खुद देख लीजिए।

बॉलीवुड कलाकार कोइन मित्रा ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को बहुत जरूरी बताया है। उनका कहना है कि पुलिस ने वही किया है जो जरूरी था। उनका कहना है कि कन्हैया कुमार और उनके देशद्रोही गैंग ने अफजल गुरू जैसे आंतकी की फांसी के विरोध में देशद्रोही काम किया था। इतना ही नहीं ये वही लोग है जो आतंकवादियों, नक्सलियो, अलगाववादियों तथा पत्थरबाजों के साथ खड़े होते हैं।

गितिका स्वामी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि ये वही कन्हैया कुमार और उसका देशद्रोही गैंग है जिसने अलगाववादियों द्वारा जेएनयू में आयोजित आतंकी अफजल गुरू की शोकसभा में शिरकत कर वहां देश के टुकड़े करने के नारे लगाए थे। ये वही कन्हैया कुमार है जिसने उस मौके पर अपने संबोधन को देश की सेना को बल्ताकारी कहा था। पूर्व गृहमंत्री को सोचना चाहिए कि देश की सेना को बलात्कारी कहने वाला देशद्रोही ही होता है।

जिस चार्चशीटेड कन्हैया कुमार और उसके देशद्रोही गैंग को पी चिदंबरम बेगुनाह मान रहे हैं उसे ही विकास सारस्वत न केवल देशद्रोही बता रहे हैं बल्कि उसे जिहाद तक बता रहे हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि भारत तेरे टुकड़े होंगे कहने वाले न केवल देशद्रोही हैं बल्कि उसने देश के खिलाफ जिहाद छेड़ने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जिहाद के प्रति हमदर्दी रखने वाले चिदंबरम जैसे लोग ही देशद्रोहियों के खिलाफ दायर चार्चशीट को बेतुका बता सकते हैं।

सुशांत सिन्हा जैसे पत्रकार ने पी चिदंबरम के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा है कि ऐसे कैसे हो सकता है कि जब आपके हित में फैसला होगा तब तो आप कानून पर विश्वास करेंगे अन्यथा विश्वास नहीं करेंगे। कोर्ट ने जब अफजल गुरू को फांसी दी तब आपको कोर्ट पर विश्वास नहीं था। आपने उसके विरोध में फैसले की निंदा करने के लिए शोक सभा का आयोजन कर लिया। इसी प्रकार राफेल डील मामले में भी जब कोर्ट ने सरकार को क्लीन चिट दे दी तब भी आपको कोर्ट पर विश्वास नहीं हुआ।
कांग्रेस के साथ उनके पेटीकोट पत्रकारों ने भी कन्हैया कुमार के समर्थन में सरकार पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है।

इस मामले में राजदीप सरदेसाई ने भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए मोदी सरकार पर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को फंसाने का आरोप लगाया है। उन्होंने लिखा है कन्हैया कुमार के खिलाफ तीन साल बाद और चुनाव के ठीक तीन महीने देशद्रोह के आरोप में चार्चशीट दाखिल किया गया है। यह चार्जशीट उसी कानून के आधार पर दायर की गई है जिसे ब्रिटिश सरकार स्वतंत्रता सेनानी को जेल भेजने के लिए लागू किया था। आज उसी कानून को राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है। राजदीप जी आपके इस तर्क से कितने लोग इत्तेफाक रखते हैं आप स्वयं देख लीजिए।

राजदीप के कन्हैया कुमार और उसके गैंग के समर्थन करने पर मेजर सुरेंद्र पुनिया ने अपने ट्वीट में लिखा है कि उन्होंने अपनी आत्मा को बेच लिया है। उन्होंने राजदीप के बारे में लिखा है कि पहले तो उन्होंने आतंकी बुरहान वानी को देश के वीर सपूर सरदार भगत सिंह से तुलना की और आज उन्होंने भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगाने वाले देशद्रोही गैंग के सदस्यों को स्वतंत्रता सेनानी बता दिया है। इससे लज्जाजनक बात कुछ और नहीं हो सकती है।

देश के मीडिया में तो कुछ लोग टट्टी को भी चांदी का बर्फ लगाकर खा जाते हैं। अभिसार शर्मा जैसे पत्रकार ऐसे ही हैं। यह वही अभिसार शर्मा है जो कभी यह कहता है कि जेएनयू परिसर में देश के खिलाफ नारे लगने वाले जो विडियो सामने आया है वह सच है, वहीं अब कह रहा है कि वह विडियो फेक है तथा उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। उसे ये तक पता नहीं कि कन्हैया कुमार और उसके गैंग के खिलाफ जो चार्जशीट दाखिल की गई है वह विडियो के आधार पर ही की गई है। इस प्रकार इस बार अभिसार शर्मा ने खुद ही साबित कर दिया है कि वह पत्रकार के नाम पर एक अव्वल दर्ज का दल्ला है।

जिस विडियो को अभिसार शर्मा फेक बताया रहा है, आज पूरा मीडिया जी न्यूज के उस विडियो को सही बता रहा है। इस संदर्भ में सुधीर चौधरी ने अपने ट्वीट में कहा है कि जो मीडिया कल तक जी न्यूज के विडियो को फेक बता रहा था आज साबित हो गया है कि वह विडियो फेक नहीं बल्कि सही था।

एक कांगी -वाफी पेटीकोट पत्रकार अरफा खानम के ट्वीट पर जवाब देते हुए मोहनदास पाई ने तो देशद्रोही के आरोपी कन्हैया कुमार जैसों को तो इतनी तरजीह देनी ही नहीं चाहिए थी। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति को दिल्ली से बाहर कोई जानता तक नहीं उसे दिल्ली में बेवजह तरजीह दी जा रही। उन्होंने कहा कि दिल्ली पूरा भारत नहीं है। उन्होंने लिखा है कि देश के हर राज्य में हमलोगों के पास अपने नेता हैं। ऐसे में कन्हैया जैसे अराजकतावादी को तरजीह देने की जरूरत ही नहीं है।

मालूम हो कि देशद्रोह के मामले में दिल्ली पुलिस ने 36 लोगों के खिलाफ जांच की है। पुलिस ने जिन 36 लोगों के खिलाफ जांच की थी उनमें जेएनयू के कई छात्र समेत वहां के सुरक्षा कर्माचारी भी शामिल थे। लेकिन पुलिस ने अंत में कन्हैया कुमार, उमर खालिद तथा अनिर्बान भट्टाचार्य समेत 10 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस ने जिन 36 लोगों के खिलाफ जांच की थी उनमें भाकपा नेता डी राजा की बेटी अपराजिता तथा जम्मू- कश्मीर के कठुआ रेप कांड को सांप्रदायिक रंग देकर हिंदुओं को बदनाम करने में आगे रही जेएनयू की छात्रा शेहला राशिद का भी नाम था।

दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में यह खुलासा भी किया है कि कन्हैया कुमार और उसके देशद्रोही गैंग ने उस दिन जेएनयू परिसर में देश के खिलाफ किस-किस प्रकार के नारे लगाए थे। पुलिस के मुताबिक देशद्रोही गैंग ने जेएनयू परिसर में उस दिन इस प्रकार के नारे लगाए थे।
* भारतीय सेना पर हल्ला बोल
* भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी
* भारत तेरे टुकड़े होंगे इंसा अल्लाह
* हम छीन के लेंगे आजादी, हम लड़ के लेंगे आजादी

 

तभी तो इस मामले में पूर्व वरिष्ठ पत्रकार तथा भाजपा के प्रवक्ता अमरमणि त्रिपाठी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट से एक खास प्रकार की प्रजाति बिलबिला उठी है। साथ ही उन्होंने कहा कि एक साजिश के तहत कन्हैया कुमार जैसे देशद्रोही का साक्षात्कार कर देश का हीरो बनाने वाले लोगों के खिलाफ होनी चाहिए।

देशद्रोही कन्हैया कुमार को बचाने के लिए लामबंद हुए कांग्रेसियों, कम्युनिस्टों तथा आपियों को उनका यह पोस्टर भी गौर से देखना चाहिए जिसे इनलोगों ने 9 फरवरी 2016 को जेएनयू परिसर में जगह-जगह चिपकाया था। इस पोस्टर में देश की संसद पर हमला करने वालों का गुणगान किया गया है। हमारे कांगी-वामी पत्रकारों को भी इस पर संज्ञान लेना चाहिए और फिर थेथरई करना चाहिए।

URL : From Congress-Communist to Rajdeep started to save traitorous gang!

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