इंडिया टुडे के रिपोर्टर को मीट माफिया ने दौड़ाया, लेकिन क्या लिंचिंग का शोर सुनाई दिया? क्या यह खामोशी इसलिए है कि कर्नाटक में मेनस्ट्रीम मीडिया के माई-बाप की सरकार है?

कर्नाटक के रामनगर जिले के कोडिपाल्या गांव में मीट माफियाओं ने इंडिया टुडे के रिपोर्टरों पर पुलिस के सामने हमला किया। इस हमले में कई पत्रकार समेत कई पशु रक्षकों को चोटें आईं। हमलावरों के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ, लेकिन मीडिया में कहीं लिंचिंग का शोर नहीं मचा! जानते हैं क्यों? क्योंकि यह घटना कर्नाटक में हुई, जहां असल में कांग्रेस की ही सरकार है। एचडी कुमारस्वामी को तो कांग्रेस ने कठपुतली बना रखा है। कर्नाटक में अवैध गो वंश हत्या के खिलाफ कानून भी लागू है, लेकिन इसकी परवाह न कसाईयों को है और न इसका पालन कराने को लेकर कुमारस्वामी सरकार को ही कोई चिंता है! मेनस्ट्रीम मीडिया के माई बाप की सरकार है, इसलिए मार खाने के बावजूद यह मीडिया चुप है! अगर यही घटना किसी भाजपा शासित राज्य में हुई होती तो फिर सेक्युलर मीडिया ब्रिगेड की नौटंकी देखते ही बनती!

मुख्य बिंदु

* गांव के बीचोबीच चल रहे अवैध बूचड़खाने में हर दिन काटे जाते हैं 200 नवजात बछड़े

* डीएसपी रैंक के अधिकारी अवैध बूचड़खाना वालों को अनहोनी से कर देते हैं आगाह

गौरतलब है कि कर्नाटक के रामनगर जिले के कोडिपाल्या गांव में एक अवैध बूचड़खाना चल रहा है। इस बूचड़खाने में हर दिन करीब 200 नवजात बछड़ों को काटा जाता है। कुडुर पुलिस स्टेशन के कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर पशु रक्षक कार्यकर्ताओं ने जब उस बूचड़खाने पर छापा मारा तो उस समय इंडिया डुटे के रिपोर्टर भी वहां मौजूद थे। उन्होंने सारी गतिविधि को अपने वीडियो में कैद किया।

बूचड़खाना पर छापेमारी करने से पहले जब वहां के डीएसपी से पत्रकारों और पशु रक्षकों ने सुरक्षा देने की मांग की तो उन्होंने पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध नहीं होने का बहाना बनाकर सुरक्षा देने से मना कर दिया। डीएसपी ने कहा कि पर्याप्त सुरक्षा बल नहीं होने की वजह से इस समय बूचड़खाने में प्रवेश करने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। लेकिन अगले दिन छापेमारी करने पर डीएसपी ने सुरक्षा देने की बात कही। लेकिन रिपोर्टर और गौ रक्षको ने तत्काल कार्यवाही करने की मांग किये जाने पर पशुरक्षक कार्यकर्ता जौशिन एंथॉनी तथा इंडिया टुडे के रिपोर्टर के साथ बगैर हथियार वाले दो पुलिसकर्मी भेज दिए।

बूचड़खाने के अंदर घुसते ही उनलोगों को पशुओं के कंकाल, हड्डिया आदि बिखरे मिले। साथ ही पूरा परिसर खून से सना था। इससे स्पष्ट हो गया कि गांव के बीचोबिच अवैध बूचड़खाना चल रहा है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि वहां पर एक भी बछड़ा नहीं दिखा, जबकि एक दिन पहले तक इस बूचड़खाने में हर जगह पशु चलते-फिरते दिख जाते थे। इससे जाहिर होता है कि डीएसपी से हुई छापेमारी की बात यहां तक पहुंच चुकी थी और ये लोग सारे बछड़ों को ठिकाने लगा चुके थे। इससे यह भी साफ हो जाता है कि मीट माफिया और अवैध बूचड़खाना चलाने वालों के साथ पुलिस की साठगांठ है।

लेकिन गहन तलाशी के बाद आखिरकार उसी बूचड़खाने के निचले हिस्से में लगे छोटे पेड़ो और घनी झाड़ियों से ढकी जगह में पशु मिल गए। नवजात बछड़ों के पैरों को मुंह के साथ मिलाकर बांध रखा था ताकि मासूम बछडे आवाज न कर सकें। इस प्रकार वहां से 71 नवजात बछड़ों को छुड़ा लिया गया।

बछड़ो को छुड़ाते देख मीट माफियाओं और बूचड़खाने वाले का गुस्सा उबल आया। उनलोगों ने पुलिस के सामने ही गौ रक्षकों और पत्रकारों पर हमला कर दिया। जो लोग पशुओं को बचाने के लिए एकत्रित हुए थे उन्हें भी मीट माफिया के बदमाशों ने हड़काया और बाद में उनपर पत्थरबाजी करनी शुरू कर दी। मीट माफिया के लोगों ने उनलोगों के फोन तोड़ दिए। ये सब कुछ पुलिस अधिकारियों और कैमरा के सामने किया गया।

बाद में पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। जिनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है उनकी गाजीपीर, खासी, सैयद, मुबारक खान, नूर, इम्तियाज तथा तरबेज के रूप में पहचान हुई है। ये सारे आरोपी रामनगर जिले के हैं।

URL: India Today journalist thrashed by mob for reporting on illegal slaughterhouse in Karnataka

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