राम मंदिर के पक्षकार वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा, निराश होने की जरूरत नहीं, मैं हूं !

राम मंदिर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई एक बार फिर टल गई। पांच जजों वाली संविधान पीठ के एक जज यूयू ललित पर बाबरी मसजिद के पक्षकारों के वकील राजीव धवन द्वारा प्रश्न खड़ा करने के बाद सुनवाई टालनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर मामले में बार-बार सुनवाई टालने को लेकर राम मंदिर के पक्षकार वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इससे निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। इस मामले में रिपब्लिक टीवी से खास बाचतीच में साल्वे ने कहा कि जब मैं इस मामले की पैरवी कर रहा हूं तो फिर किसी को निराश होने की जरूरत नहीं है।

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मालूम हो कि पांच जजों वाली संविधान पीठ को आज सुनवाई करनी थी, लेकिन 20 मिनट तक सुनवाई चलने के बाद एक बार फिल इस मामले की सुनवाई 29 जनवरी को करने की तारीख दे दी गई। आज राम मंदिर मामले पर सुनवाई शुरू होते ही बाबरी मसजिद के पक्षकार वकील राजीव धवन ने न्यायाधीश यूयू ललित का मामला उठा दिया। इसके बाद न्यायमूर्त ललित ने खुद ही मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई से इस बेंच से अलग होने को कहा। अब राम मंदिर मामले की सुनवाई के लिए गठित पांच जजों की संविधान पीठ में एक नया जज को शामिल किया जाएगा।

इस मामले में रिपब्लिक टीवी से खास बातचीत करते हुए हरीश साल्वे ने कहा कि एक समयावधि तय हो चुकी है । मुख्य न्यायाधीश ने इसके लिए 29 जनवरी का समय भी तय कर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि 29 जनवरी से शुरू होने वाली सुनवाई दिन प्रति दिन के आधार पर होगी।

जस्टिस यूयू ललित के इस मामले की सुनवाई से अलग होने पर वरिष्ठ वकील साल्वे ने कहा है कि यह बिल्कुल उनका अपना निर्णय है। अगर वह समझते हैं कि यह मामला उठने के बाद उन्हें इस मामले की सुनवाई में शामिल नहीं होना चाहिए तो यह विल्कुल सही है। क्योंकि यह उनका अपना फैसला है। उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के वकील के रूप में पैरवी करने का मामला उठा तो जस्टिस यूयू ललित ने खुद ही इस मामले की सुनवाई से अलग होने की इच्छा जताई। जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई से अपनी बात कही तो उन्होंने यह निर्णय उन पर ही छोड़ दिया।

मालूम हो कि गुरुवार को जब सुप्रीम कोर्ट में पांच जजों वाली संविधान पीठ के सामने राम मंदिर मामले की सुनवाई शुरू हुई तो राम मंदिर के पक्षकार के रूप में हरीश साल्वे शामिल हुए थे।

हिन्दू पक्षकार के वकील : हरीश साल्वे, तुषार मेहता, पीएस नरसिंहा तथा सीएस वैद्यनाथन।

मुसलिम पक्षकारों के वकील: राजीव धवन, राजू रामचंद्रन तथा दुष्यत दवे।

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