प्रधानमंत्री मोदी ने की ईरानी राष्ट्र्पति से द्विपक्षीय वार्ता, भारत ईरान के संबंध और भी बेहतरी की ओर अग्रसर होते हुए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ईरान के राष्ट्पति हसन रोहानी से न्यू यार्क में द्विपक्षीय वार्ता के लिये मिले. और इस मीटिंग के द्वारा भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उसकी विदेश नीति पूरी तरह स्वतंत्र है और किसी भी प्रकार की खेमेबाज़ी या गुटबाज़ी की मोहताज नहीं है.

भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को कायम रखता हुआ ईरान और अमरीका  दोनों के साथ अपने संबंधों में बिठा रहा तालमेल

यह मीटिंग एक ऐसे समय मे हुई जब अमेरिका ने ईरान के परमायु कार्यक्रम को लेकर वहां से तेल आयात के मामले में सभी देशों पर प्रतिबंध लगा रखे हैं और अमरीकी राष्ट्रपति डांनल्ड ट्र्म्प ईरान को गहरे संदेह की दृष्टि से देखते हैं, यहां तक कि उसे आतंकवाद का जनक भी मानते हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी ने न्यू यार्क में ईरान के राष्ट्र्पति से मिलकर न सिर्फ भारत की निष्पक्ष विदेश नीति का परिचय दिया है बल्कि उन आलोचकों की ज़बान पर भी ताले लगा दिये हैं जो ये कहते नही थक रहे थे कि भारत अमरीका को अपीज़ करने के चक्कर में ईरान से अपने एतिहासिक संबंधों को दांव पर लगा रहा है.

भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के चलते रशिया, अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान इत्यादि सभी से बेहतरीन कूटनीतिक संबंध बनाये हुए है. और इन में से किसी के भी आपसी मतभेद में भारत कभी भी कोई पक्ष तक नहीं लेता. यहां तक कि चीन और अमरीका के बीच गहराते व्यापार युद्द में भी भारत ने औपचारिक तौर पर कोई स्टैंड नहीं लिया. और किसी एक मुल्क के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों में भी भारत अपने हितों को ध्यान में रखता हुआ ही आगे बढता है. मसलन कि प्रधानमंत्री मोदी हांस्टन मीट में अमरीका के राष्ट्रपति डांनल्ड ट्र्म्प के साथ बड़ी गर्मजोशी से मिले, दोनों प्रमुखों में लाजवाब केमिस्ट्री भी दिखाई दी. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस केमेस्ट्री के चलते भारत ने अपने हितों को ताक पर रख दिया . भारत और अमरीका के व्यापार मसले में मेडिकल उपकरणों में और देस्री उत्पादनों के आयात के मामले में अपनी पोज़ीशन ज्यों की त्यों रही, उसमे किसे एभी तरह का समझौता या फेरबदल नहीं किया.

आतंकवाद के मसले को लेकर भारत नहीं मानता ईरान को ज़िम्मेदार

अब आतंकवाद की बात करें तो इस पर भी भारत ने कड़ा रूख अपनाया है. अपने अमरीका दौरे में जहां आतंकवाद को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान की, बिना उसका नाम लिये हुए भी, कड़ी आलोचना की है, वहीं अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प के आतंकवाद को ईरान से जोड़ने वाले वकव्य पर उन्होने कोई प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त की. बल्कि वह ईरानी राष्ट्रपति से खुले दिल से मिले और छाबाहर पोर्ट से लेकर ऊर्जा अदि प्रमुख विषयों पर बात हुई. ये इस बात क पुख्ता प्रमाण है कि भारत ईरान के साथ चल रहे अपने घनिष्ठ एतिहासिक संबंधों को अत्यधिक तवज्जो देता है और आतंकवाद के लिये ईरान को किसी भी तरह से ज़िम्मेदार नहीं मानता.

छाबाहार पोर्ट की भू राजनीतिक अहमियत और भारत ईरान के सदाबहार एतिहासिक रिश्ते

प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी ने अपनी वार्ता में छाबाहर पोर्ट के मुद्द्दे पर भी बातचीत की. छाबाहर पोर्ट भारत के लिये व्यापारिक दृषृटिकोण से और भू राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्व रखता है. इस पोर्ट के पूरा होने और प्रयोग में आने से भारत के लिये अफ्गानिस्तान के साथ बिना पाकिस्तान से गुज़रे गुड्स निर्यात करने का रास्ता खुल जायेगा . इसके साथ इस पोर्ट से भारत और ईरान के व्यापारिक रिश्ते भी और मज़बूत होंगे और ये दोनों मिलकर अरब महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़्ते आधिपत्य को रोकने में भी सक्षम हो पायेंगे. आलोचक फिर बार बार इस बात की दुहाई देते नहीं थक रहे कि भारत ने अमरीका के प्रतिबंधों के चलते ईरान से तेल आयात करना बंद्द कर दिया है इसीलिये छाबाहर पोर्ट का काम भी ठंडे बस्ते में पड़ा रहेगा. सर्वप्रथम तो भारत ने अभी तक ईरान से तेल आयात पूरी तरह से बंद करने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है. दूसरा, भारत अभी भी ईरान से अपने तेल आयात भविष्य में जारी रखने के लिये ईरान के साथ मिलकर हर संभव प्रयास कर रहा है. गौरतलब है कि ईरान के पसरगद बैंक की शाखा भारत में जल्द ही खुलने वाली है. इस बैंक को भारत लाने का मकसद अमरीकी प्रतिबंधों को बाईपास कर के भारत ईरान के व्यापार को बेहतर बनाना है. ईरान से तेल आयात के अमरीकी प्रतिबंध अपने वर्तमान स्वरूप में एक समस्या इसीलिये बने हुए हैं क्योंकि अमरीका ने ईरान के संबंध में सारे अंतराष्ट्रीय बैंकिंग चैनल ब्लांक कर दिये हैं ताकि कोई भी देश ईरान के साथ तेल व्यापार न कर पाये.

भारत और ईरान के संबंध इतने एतिहासिक और पुख्ता हैं कि दोनों देश इस बात को भली भांति समझते हैं कि थोड़े वक्त के लिये बनी हुई स्थितियों के चलते इन संबंधों पर कोई आंच नहीं आने वाली. और प्रधानमंत्री मोदी का बेहद गर्मजोशी से न्यू यांर्क में ईरानी राष्ट्रपति से मिलना इसी बात को रेखांकित करता है.

आदरणीय पाठकगण,

ज्ञान अनमोल हैं, परंतु उसे आप तक पहुंचाने में लगने वाले समय, शोध और श्रम का मू्ल्य है। आप मात्र 100₹/माह Subscription Fee देकर इस ज्ञान-यज्ञ में भागीदार बन सकते हैं! धन्यवाद!  

For International members, send PayPal payment to [email protected] or click below

Bank Details:
KAPOT MEDIA NETWORK LLP
HDFC Current A/C- 07082000002469 & IFSC: HDFC0000708  
Branch: GR.FL, DCM Building 16, Barakhamba Road, New Delhi- 110001
SWIFT CODE (BIC) : HDFCINBB
Paytm/UPI/Google Pay/ पे / Pay Zap/AmazonPay के लिए - 9312665127
WhatsApp के लिए मोबाइल नं- 9540911078
Rati Agnihotri

Rati Agnihotri

रति अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों में कवितायें लिखती हैं. इनका अंग्रेज़ी का पहला कविता संग्रह ‘ द सनसेट सोनाटा’साहित्य अकादमी से प्रकाशित हुआ है. रति की हिंदी कवितायें पाखी, संवदिया, परिकथा, रेतपथ, युद्धरत आम आदमी, हमारा भारत आदि साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. रति दिल्ली में ‘ मूनवीवर्स – चांद के जुलाहे’ के नाम से एक पोएट्री ग्रुप चलाती हैं जहां कविता को संगीत, चित्रकला आदि विभिन्न विधाओं से जोड़ा जाता है और कविता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार भी होता है. रति चीन के शिनुआ न्यूज़ एजेंसी के नई दिल्ली ब्यूरो में बतौर टी वी न्यूज़ रिपोर्टर कार्यरत हैं. रति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कांलेज से अंग्रेज़ी विशेष में बी ए आनर्स किया है और इंग्लैंड के लीड्स विश्वविद्यालय से अंतराष्ट्रीय पत्रकारिता में एम ए किया है.

You may also like...

Write a Comment

ताजा खबर
Popular Now