सुप्रीम कोर्ट में हुआ साबित, सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा The wire के जरिए पहुंचा रहे थे राहुल गांधी तक अंदरूनी खबर!

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा का मुखौटा आज सुप्रीम कोर्ट में उतर गया। सुप्रीम कोर्ट ने जिस जांच रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सौंपने को कहा था, आरोप है कि आलोक वर्मा एंड टीम उसे वामपंथी वेबसाइट द वायर एवं सोनिया राहुल के मालिकाना हक वाले नेशनल हेराल्ड व नवजीवन को सप्लाई कर रहे थे। ताज्जुब की बात है कि सीवीसी ने आलोक वर्मा को जवाब देने के लिए प्रश्नों की जो सूची सौंपी थी, वह पूरी सूची द वायर के पास मिली है और इसने उसका दावा भी किया है।

 

 

अब यह जाहिर सी बात है कि यह कॉपी खुद उड़ कर तो गई नहीं, बल्कि आलोक वर्मा या उसकी टीम ने ही अर्बन नक्सल नंदिनी सुंदरम के पति और वामपंथी पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन और पी. चिदंबरम के बेहद खास रहे वेणु के thewire को सौंपी है। इससे पहले यही सीबीआई पी. चिदंबरम के खिलाफ जांच की रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट से पहले चिदंबरम की कोठी पर पहुंचा चुका है।

 

सुप्रीम कोर्ट के अंदर हुए इस खुलासे के बाद आज यह भी साबित हो गया कि किस तरह से आलोक वर्मा राहुल गांधी के इशारे पर काम कर रहे थे! अन्यथा राफेल पर आलोक वर्मा कार्रवाई करने जा रहे हैं इसका दावा राहुल गांधी बड़े चौड़े होकर मीडिया में कैसे कर रहे थे, जबकि सीबीआई में तो इसकी कोई प्राथमिकी भी दर्ज नहीं हुई थी? यह भी अप्रत्यक्ष तरीके से साबित हो गया कि सीबीआई के आलोक वर्मा की ही टीम के मेंबर डीआईजी मनीष कुमार सिन्हा जैसे अधिकारी भी राहुल गांधी को राज्यों में चुनाव जीताने के लिए बिना आधार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर आरोप मढ़ रहे थे, जिसे तत्काल राहुल गांधी टवीट कर चुनावी माहौल बनाने में जुटे थे।

राहुल गांधी का टवीट

मंगलववार को  मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के वकील फली नरीमन को कुछ दस्तावेज देते हुए पूछा कि आलोक वर्मा से जो जवाब सीलबंद लिफाफे में मांगे गए थे, वो मीडिया में कैसे लीक हो गए?

राहुल गांधी के मालिकाना हक वाले नवजीवन का टवीट

SC ने नरीमन से सख्त लहजे में नाराजगी जाहिर की और सुनवाई 29 नवंबर तक टालने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में आलोक वर्मा के वकील से कहा कि संस्थानों का सम्मान और उनकी मर्यादा बनी रहनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने अपनी टिप्पणी में यहां तक कह दिया कि आपमें से कोई भी सुनवाई के लायक नहीं है।

आलोक वर्मा की लीक रिपोर्ट, जो द वायर में छपी…

गौरतलब है कि आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच रिपोर्ट सीवीसी ने 12 नवंबर को कोर्ट में सौंपी थी। इसके बाद 16 नवंबर सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा से कहा था कि वह सीवीसी रिपोर्ट पर 19 नवंबर तक अपना जवाब दे। कोर्ट ने आलोक वर्मा से सीलबंद लिफाफे में जवाब मांगा था, लेकिन अदालत से पहले ही यह जवाब कांग्रेस के प्रिय वेबसाइट के पास पहुंच गया। जिसके आधार पर इस वेबसाइट ने मोदी सरकार को बदनाम करने का अभियान चलाया और इसमें उसे राहुल गांधी, उनके टवीट एवं पूरी कांग्रेस पार्टी की मदद मिली।

 

URL: sc expresses displeasure over leak of cbi director Alok verma confidential reply

 

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Sandeep Deo

Journalist with 18 yrs experience | Best selling author | Bloomsbury’s (Publisher of Harry Potter series) first Hindi writer | Written 7 books | Storyteller | Social Media Coach | Spiritual Counselor.

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