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सोनम वांगचुक स्वदेशी के ब्रांड एम्बैसेडर बनके उभरे!

जहां एक तरफ विश्व की बड़ी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां चीन के सामने घुटने टेकती नज़र आ रही हैं, इसके बावजूद कि चीन में लगभग ये सभी कंपनिया प्रतिबंधित हैं, ऐसे समय में भारत के सोनम वांगचुक एक ऐसी सशक्त, निडर शख्सीयत के रूप में उभर रहे हैं जो खुले आम चीन को चुनौती दे रहे हैं. अपने यू ट्यूब चैनल के ज़रिये सोनम वांगचुक ने भारतवासियों के समक्ष अपना मत प्रस्तुत करके समस्त देशवासियों को चीन में बने सामान का बहिष्कार करने के लिये प्रेरित किया है. सोनम वांगचुक लद्दाख से हैं और वे एक जाने माने भारतीय वैज्ञानिक हैं, एक ऐसे इनोवेटर हैं, जिन्होने विज्ञान का प्रयोग स्थानीय लोगों की बहुत सी समस्याओं को सुलझाने के लिये किया है जैसे की पानी की समस्या. सोनम वांगचुक क्प कितने ही अंतराष्ट्रीय अवार्डों से भी नवाज़ा गया.

सोनम वांगचुक ने चीनी गुड्स का बहिष्कार करने की जो मुहिम चलाई है, उसमे उन्हे देश के कोने से अत्यधिक सहयोग प्राप्त हुआ है. यहां तक कि चीनी एप्स को फोन से हटाने के लिये किसी भारतीय स्टर्ट अप द्वारा एक एप भी लौंच हो गयी जिसके मात्र 2 हफ्ते में 2 मिलियन से भी ज़्यादा यूज़र्स ने इंस्टाल क्किया. हालंकि यह अलग विषय है कि चीन के दबदबे के चलते इस एप को प्लेस्टोर से हटा दिया. लेकिन सोनम वांगचुक स्वयं यह कहते हैं कि जिस प्रकार से चीनी गुड्स के बहिष्कार के मामले में बोलने की वजह से अमूल कंपनी के ट्विटर अकाउंट को प्रतिबंधित किया गया और जिस प्रकार से चीनी एप्स को फोन से हटाने वाली यह पूरी एप ही प्लेस्टोर से हटा दी गयी , इससे तो बल्कि यह बात और पता चलती है कि उनके इस आहवाहन के बाद चीन कितनी बुरी तरह से तिलमिला गया है. यदि चीन कोई प्रतिक्रिया नही देता, शांतिपूर्ण बैठा रहता, उलटा तब ऐसा लगता कि जो हम कर रहे हैं, उससे होने वाला नुकसान शायद चीन के लिये इतना मायने नहीं रखता. लेकिन वह ये सब प्रतिक्रिया दे रहा है, इसका यह सीधा अर्थ है कि उसे चीनी गुड्स को बहिष्कृत करने वाली इस मुहिम से अपनी अर्थव्यवस्था को नुकसान होने का भय है, ऐसा सोनम वांगचुक का कहना है.

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सोनम वांगचुक ने हाल ही में 7 जून को अपने यू ट्यूब पर एक नया वीडियो अपलोड किया है जिसमे उन्होने बड़े ही रोचक तरीके से यह समझाया है कि किस प्रकार चीन धीरे धीरे पूरी दुनिया पर शिकंजा कस रहा है. पूरी दुनिया पर शासन करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है. अपनी वन बेल्ट वन रोड योजना के ज़रिये उसने कितने ही अफ्रीकी देशों को बुरी तरह कर्ज़ में डुबो दिया है. एशिया की बात करें तो पाकिस्तान की तो ऐसी दशा हो गयी है कि वह तो बस चीन की एक कांलोनी बनने की कगार पर है. भारत को भी चीन की इस बढ़्ती महत्वाकांक्षा को हल्के में नही लेना चाहिये. उन्होने सीधे तौर पर कहा कि हमें चीन का मुकाबला गोले बारूद से नही बल्कि अपने वांलेट यानि रुपये पैसे रखने वाले पर्स से करना है! यानि स्वदेशी को बढ़ावा और चीन में बने सामान का बहिष्कार. इसके लिये उन्होने एक सीधा सादा उद्देश्य्य टार्गेट लोगों को दिया कि चीनी एप्स को एक हफ्ते के भीतर ही अनिइंस्टाल कर डालें और जहां तक चीनी सामान की बात आती है, तो एक साल की अवधि के अंदर धीरे धीरे कर उस पर अपनी निर्भरता कम करें.

सोनम वांगचुक की स्वदेशी को अपनाने और चीनी सामान को त्यागने की इस मुहिम ने वामपंथी खेमे को बड़ी परेशानी और दुविधा में डाल दिया है. क्योंकि वे चाहें कितना भी अति बौद्धिकता की चाशनी में लिपटा छल कपट का जाल बिछायें, सोनम वांगचुक एक ऐसी शख्सीयत है, जिनके विरुद्ध वह कुछ कह ही नहीं सकते . न तो वह उन्हे सरकार के प्रवक्ता के रूप में ब्रांड कर सकते हैं, न ही वो उनपे किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा को आगे बढाने का आरोप लगा सकते हैं. एक अकेले सोनम वांगचुक अब पूरी वामपंथी ब्राइगेड पर भारी हैं क्योंकि वो एक ऐसे इंसान है जिन्हे देश भर का पढ़ा लिखा युवा वर्ग बहुत ही सम्मान की डृष्टि से देखता है. वो उन्हे किसी भी राजनीतिक खेमेबाज़ी से , राजनीतिक विचाराधाराओं के द्वंद की राजनीति से दूर एक ऐसा व्यक्ति मानता है जिसने वास्तविकता में लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिये विज्ञान का इतना अद्वत प्रयोग किया है. और जो इंसान चुपचाप लाइमलाइट से दूर इतने वर्षों से समाज के लिये काम कर रहा है. तो उनपे ऐसा आरोप भी नहीं लगा सकते कि वो ये सब लाइमलाइट के लिये कर रहे हैं. तो अब सोनम वांगचुक की इस मुहिम से जिसमे वह खुल्लम खुल्ला स्वदेशी को बढावा दे रहे हैं, और लोगों से चीनी सामान का बहिष्कार करने का निवेदन कर रहे हैं, उनकी इस मुहिम से लेफ्ट लिबरल अब बुरी तरह घबराया हुआ है. क्योंकि जिस पढे लिखे युवावर्ग को लेफ्ट अपनी तथाकथित बुद्धिजीवियों की फौज द्वारा टार्गेट करता है, वही वर्ग सोनम वांगचुक जैसे वास्तविक बुद्धिजीवी का भी खुल कर सपोर्ट करता है.

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सोनम वांगचुक एक वैचारिक लीडर हैं. और भारत को ऐसे और भी वैचारिक लीडरों की आवश्यकता है जो कि विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े हों, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हों, समाज के क्षेत्र में कुछ् बहुत ही अच्छा काम कर रहे हों, ऐसे वैचारिक लीडर्स जो देशभक्त हैं और जिनका सम्मान देश का पढा लिखा युवावर्ग करता हो. ऐसे बुद्धिजीवी और आगे आयेन्गे तो इससे लेफ्ट लिबरल द्व्रारा बरसों से पाले गये फर्ज़ी बुद्धिजीवियों के चेहरे पर पड़ा नकाब भी हटेगा. एक तरफ ऐसे बुद्धिजीवी जो देश को तोड़्ने के काम में, नफरत फैलाने के काम में लगे रहते हैं और जो ताकतें देश को बरबाद करने पर तुली हैं, उनकी पूजा करते हैं. तो दूसरी तरफ सोनम वन्गचुक जैसे बुद्धिजीवी जो देश को जोडने का काम कर रहे हैं और एक इतने महत्व्पूर्ण और ज्वलंत मुद्दे पर देशवासियों का आहवाहन कर रहे हैं, पूरे देश को चीनी सामान त्याग स्वदेशी अपनाने की बहुमूल्य सीख दे रहे हैं.

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Rati Agnihotri

Rati Agnihotri

रति अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों में कवितायें लिखती हैं. इनका अंग्रेज़ी का पहला कविता संग्रह ‘ द सनसेट सोनाटा’साहित्य अकादमी से प्रकाशित हुआ है. रति की हिंदी कवितायें पाखी, संवदिया, परिकथा, रेतपथ, युद्धरत आम आदमी, हमारा भारत आदि साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. रति दिल्ली में ‘ मूनवीवर्स – चांद के जुलाहे’ के नाम से एक पोएट्री ग्रुप चलाती हैं जहां कविता को संगीत, चित्रकला आदि विभिन्न विधाओं से जोड़ा जाता है और कविता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार भी होता है. रति चीन के शिनुआ न्यूज़ एजेंसी के नई दिल्ली ब्यूरो में बतौर टी वी न्यूज़ रिपोर्टर कार्य कर चुकी हैं. रति आजकल स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. रति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कांलेज से अंग्रेज़ी विशेष में बी ए आनर्स किया है और इंग्लैंड के लीड्स विश्वविद्यालय से अंतराष्ट्रीय पत्रकारिता में एम ए किया है.

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3 Comments

  1. Avatar Naveen Kumar says:

    Test

  2. Earlier We used to love Sonam Kapoor only but now, we love Sonam Wangchuk

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