ट्विटर पर मशीनी ‘घोड़े’ से कंगना को फर्जी राष्ट्रवादी बताना, वामी-हताशा की पराकाष्ठा है!

कंगना रनौत की फिल्म ‘मणिकर्णिका : द क्वीन ऑफ़ झाँसी की शूटिंग के दौरान लिए गए एक वीडियो से राष्ट्रवादियों के देशप्रेम को फर्जी बताने की बेशर्म परंपरा शुरू हो गई है। नकली घोड़े से लेकर इस बात पर एतराज है कि पुलवामा हमले के पहले से पाकिस्तान में चल रही मणिकर्णिका फिल्म उतारी क्यों नहीं गई। पाकिस्तान में फिल्म चल रही है, उसका दोष निर्माता कमल जैन पर नहीं बल्कि कंगना रनौत पर डाला जा रहा है। कंगना रनौत और अनुपम खेर के खिलाफ एक व्यक्ति सोशल मीडिया पर अभियान चला रहा है। ट्विटर पर अति सक्रिय आकाश बनर्जी नामक ये व्यक्ति खुद को असली राष्ट्रवादी बताता है और प्रोफाइल पिक में अपनी ‘बीच की ऊँगली’ दिखाते हुए फोटो रखता है।

 

जैसे ही कंगना रनौत देश में काम कर रहे पाकिस्तानी कलाकारों के खिलाफ मुखर हुई, आकाश बनर्जी ने उनके खिलाफ भद्दे ट्वीट करना शुरू कर दिए। हाल ही में नकली घोड़ा चलाती कंगना के दस सेकंड का वीडियो आकाश ने ही वायरल किया था। इस वीडियो के साथ आकाश ने लिखा ‘दस सेकंड में कंगना का ब्रांड नेशनलिज्म’। क्या आकाश और उसके जैसे धुर विरोधी इतना नहीं जानते कि फिल्म और वास्तविकता में कितना फर्क होता है।

यदि सभी सुपर स्टार्स के शूटिंग के दौरान ऐसे ही वीडियो वायरल कर दिए जाए तब क्या होगा। सलमान खान की ‘ढहती मछलिया और तोंद’ कम्प्यूटर ग्राफिक्स की मदद से छुपाई जाती है। झुर्रीदार शाहरुख़ को कैमरे लेंस की मदद से युवा दिखाया जाता है। यदि कंगना को घुड़सवारी नहीं आती तो वे फर्जी राष्टवादी घोषित कर दी जाती हैं। इस हिसाब से शाहरुख़ खान को ‘दिल से’ फिल्म में अपनी फिदायीन प्रेमिका से लिपटकर वाकई में मर जाना चाहिए था।

 

आकाश बनर्जी को अपने ट्वीट्स पर आ रहे कमेंट्स देखना चाहिए और तय करना चाहिए कि वे रील लाइफ और रियल लाइफ में फर्क क्यों नहीं कर पा रहे हैं। उनकी वॉल पर केवल राष्ट्रवादी कलाकारों को क्यों घसीटा जा रहा है। अनुपम खेर के राष्ट्रवाद से आकाश को तकलीफ है तो सलमान खान के पाकिस्तान प्रेम से भी होनी चाहिए लेकिन नहीं होती।

 

राष्ट्रवादी पत्रकार रोहित सरदाना ने आकाश पर तंज कसते हुए ट्वीट किया ‘शनिवार को सवा रुपए का प्रसाद उनकी सदबुद्धि के लिए चढ़ाएँ जो कंगना रणौत को फ़िल्म की शूटिंग के दौरान रोबोटिक घोड़े दौड़ाते देख कर राष्ट्रवाद पर तंज कर रहे हैं। ये वही लोग हैं जो सुपरमैन/स्पाइडरमैन की फ़िल्में देख कर मान लेते हैं कि वो सच में उड़ते हैं।

 

कंगना ने शबाना आज़मी के पाकिस्तान टूर का विरोध किया तो आकाश ने पाकिस्तान में चल रही उनकी फिल्म का हवाला देकर शबाना आज़मी का बचाव करने की कोशिश की। ये कैसा फर्जी पलटवार है। मणिकर्णिका पाकिस्तान में पुलवामा हमले से पहले प्रदर्शित की गई थी। इस मामले में फिल्म के निर्माता कमल जैन से सवाल पूछा जाना चाहिए न कि कंगना पर बेवजह हमले होने चाहिए।

 

आकाश बनर्जी जैसे लोगों को ट्विटर पर जमकर सबक सिखाया जा रहा है। खुद को देशभक्त कहने वाले आकाश बनर्जी को आमिर और शबाना अच्छे लगते हैं लेकिन अनुपम खेर और कंगना को वह फर्जी देशभक्त कहता है। टुकड़े-टुकड़े गैंग अब नीचता पर उतर आया है। आकाश बनर्जी इसका ज्वलंत उदाहरण है।

URL: The shameless tradition of nationalism has been shown to be fake.

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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