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आखिर कौन था सोहराबुद्दीन शेख, जिसके एनकाउंटर मामले में डी.जी बंजारा को गुजरात से 9 साल तडिपार रहना पड़ा?

गुजरात के पूर्व पुलिस अधिकारी D.G. Vanjara 9 साल बाद गुजरात पहुंचे। लश्‍कर की आतंकी इशरत जहां,सोहराबुद्दीन शेख व तुलसी प्रजापति सहित करीब 20 अपराधियों व आतंकियों के पुलिस मुठभेड़ मामले में उन पर आरोप है कि उन्‍होंने व उनकी टीम ने सभी का फर्जी एनकाउंटर किया! बंजारा 8 अप्रैल 2016 को मुंबई से अहमदाबाद पहुंचे।

अहमदाबाद एयरपोर्ट के बाहर हजारों लोगों ने उनका जोरदार स्‍वागत किया। मुंबई से अहमदाबाद पहुंचते ही बंजारा ने कहा कि गुजरात पुलिस ने सभी एनकाउन्टउर संविधान व कानून के दायरे में रहते हुए किया था। यदि इन आतंकियों का फर्जी एनकाउंटर नहीं होता तो गुजरात देश का दूसरा कश्मीर बन जाता।

डी जी बंजारा पर जिन लोगों के फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगा, उनमें से एक इशरत जहां की पूरी सच्‍चाई मुंबई 26/11 के आरोपी आतंकी डेविड कोलमेन हेडली ने अपने बयान में बता ही दिया है। ISD ने आपको लश्‍कर की आतंकी इशरत जहां के बारे में पूरी जानकारी पहले ही दी थी, अब सोहराबुद्दीन शेख की समूची जानकारी पाठकों के समक्ष पेश है।

इसे पढ़कर पाठक समझ जाएंगे कि तत्‍कालीन कांग्रेस संचालित यूपीए सरकार किस तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण व वोट बैंक के लिए आरोपी आतंकवादी इशरत जहां और सोहराबुद्दीन शेख के लिए आंसू बहाते हुए ईमानदार व कर्मठ पुलिस अधिकारियों व गुजरात के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी का एनकाउंटर करने में जुटी हुई थी!

आखिर कौन थी इशरत जहां, जानने के लिए क्लिक करें.

आखिर कौन था सोहराबुद्दीन शेख?

सोहराबुद्दीन मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के झिरन्या गाँव का रहने वाला एक हिस्‍ट्रीशीटर था। गुजरात पुलिस ने 26 नवंबर 2005 को उसे एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया था। उसके साथ उसकी पत्‍नी कौसर बी को भी गुजरात पुलिस ने मुठभेड़ में मार दिया था। इसके एक साल बाद 26 दिसंबर 2006 को शेख के अंडवर्ल्‍ड साथी तुलसीराम प्रजापति को भी एक मुठभेड़ में गुजरात पुलिस ने मार गिराया था। तुलसी प्रजापति को सोहराबुद्दीन शेख के मुठभेड़ का चश्‍मदीद गवाह बनाकर पेश किया गया था। सोहराबुद्दीन शेख पर 90 के दशक में ही हथियारों की तस्‍करी का मामला दर्ज था।

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सोहराबुद्दीन शेख के मप्र के झिरन्‍या गांव स्थित घर से वर्ष 1995 में 40 एके-47 राइफल बरामद हुआ था। उस पर गुजरात व राजस्‍थान के मार्बल व्‍यापारियों से हफ्ता वसूली और हत्‍या का मुकदमा भी दर्ज था। सोहराबुद्दीन अंडवर्ल्‍ड डॉन दाउद इब्राहिम के गुर्गे छोटा दाउद उर्फ शरीफखान पठान, अब्‍दुल लतीफ, रसूल पर्ती और ब्रजेश सिंह से जुड़ा था। लश्‍कर-ए-तोइबा व पाकिस्‍तान के आईएसआई से भी उसके संबंध थे।

वर्ष 1992 में बाबरी मस्जिद ढहने के बाद आतंक फैलाने के लिए अब्‍दुल लतीफ ने करांची में रह रहे छोटा दाउद उर्फ शरीफ खान से 40 एके 47 मंगवाया था, जिसे सोहराबुद्दीन ने रउफ नामक एक अन्‍य व्‍यक्ति के साथ मिल कर अमहमदाबाद स्थित दरियापुर से अपने गांव झिरन्‍या पहुंचा और वहां उसने हथियारों को कुएं में छिपा दिया।

करांची में बैठे इसी शरीफ खान के लिए सोहराबुद्दीन गुजरात व राजस्‍थान के मार्बल व्यापारियों से हफ्ता वसूली करता था। इस मामले में सोहराबुद्दीन सहित 100 लोगों को तत्‍कालीन महाराष्‍ट्र पुलिस ने आरोपी बनाया था। जिस वक्‍त संजय दत्‍त को हथियार रखने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया था, यह उसी दौरान की बात है। उस वक्‍त यह मामला अखबारो की सुर्खियां भी बना था।

अपने शासन वाल महाराष्‍ट्र के थाने में सोहराबुद्दीन शेख के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद कांग्रेस सीबीआई के जरिए सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर को फर्जी साबित करने में लगी रही और इसके लिए उसने सीबीआई का गलत इस्‍तेमाल किया।

इसी मुकदमे में जुलाई 2010 में नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी व गुजरात के तत्‍कालीन गृह मंत्री अमित शाह को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। यही नहीं, राजस्‍थान के तत्‍कालीन गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया से भी पूछताछ हुई थी।

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वर्ष 2007 में पूर्व डीआईजी डी.जी बंजारा सहित कई वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारियों को इसमें गिरफ्तार किया गया था। भाजपा का आरोप था कि कांग्रेस गुजरात के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी व अमित शाह को फंसाने के लिए एक खतरनाक अपराधी के नाम पर राजनीति कर रही है। सोहराबुद्दीन का पिछला आपराधिक ट्रैक रिकॉर्ड मीडिया और केंद्र सरकार दोनों के पास है, लेकिन गुजरात सरकार को बदनाम करने के लिए दोनों सोहराबुद्दीन को ‘मौलाना’ यानी अपराधी की जगह एक मुस्लिम शहीद बनाने की कोशिश में लगे रहे, जो देश की सुरक्षा के लिए बेहद घातक है।

जानकारी के लिए बता दें कि यह केस पूरी तरह से मीडिया की देन है। इस केस को खोलने का श्रेय दैनिक भास्‍कर अखबार को जाता है और इसके बाद गुजरात सरकार के खिलाफ लगातार हल्‍ला करते हुए इसे अंतराष्‍ट्रीय स्‍तर पर एमनेस्‍टी इंटरनेशनल तक पहुंचाने का श्रेय भी भारतीय मीडया को ही है। मानवाधिकार आयोग का दस्‍तावेज मौजूद होने के बावजूद देश में सबसे अधिक फर्जी मुठभेड़ को अंजाम देने वाले उप्र व महाराष्‍ट्र सरकार के प्रति भारतीय मीडिया का खुला समर्थन जारी है।

कौन हैं डी. जी बंजारा:

* 1980 में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के रूप में पुलिस फोर्स से जुड़े।

* 1987 आईपीएस काडर में प्रमोशन मिला। डीएसपी और एसपी के रूप में कई जिलों में काम किया। सीआईडी में काम के दौरान उन्होंने मजबूत नेटवर्क खड़ा किया।

* 2002 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच से जुड़े। उस्मानपुरा में समीर खान एनकाउंटर में शानदार काम किया। उस वक्त सीएम रहे मोदी के खास बने।

* 2002 से 2005 तक अहमदाबाद की क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर थे।

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* उनकी पोस्टिंग के दौरान गुजरात में करीब 20 लोगों का एनकाउंटर हुआ।

* वंजारा को 2007 में गुजरात सीआईडी ने गिरफ्तार किया था।

* उन्हें अहमदाबाद के साबरमती जेल में रखा गया था। नवंबर, 2012 में उन्हें मुंबई की जेल ट्रांसफर कर दिया गया था।

* पिछले साल फरवरी माह में उन्हें कंडीशनल बेल दी गई थी। लेकिन सीबीआई कोर्ट ने गुजरात जाने की परमिशन नहीं दी थी।

* हाल ही में 2 अप्रैल को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने उनके गुजरात प्रवेश पर लगी अपनी रोक भी हटा ली और इस तरह 9 सालों बाद वंजारा की घर वापसी हुई।

* Vanzara was arrested in 2007 in connection with the alleged fake encounter of Sohrabuddin Sheikh and Tulsi Prajapati, but was given bail in 2014. The bail in the Ishrat Jahan case was granted only in February this year. One of the conditions in Vanzara’s bail order was that he not leave Mumbai, but on April 2, a special CBI court allowed him to return home to Gujarat.

साभार संदर्भ: सोहराबुद्दीन शेख से जुड़ी संपूर्ण जानकारी संदीप देव की पुस्‍तक ‘निशाने पर नरेंद्र मोदी: साजिश की कहानी-तथ्‍यों की जुबानी’ से

Web Title: Who was Sohrabuddin Sheikh And Who is D. G. Vanzara?

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