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क्या व्लादिमीर पुतिन को शांति पाठ पढ़ाने के बाद दुनिया के सबसे बड़े नेता बन गए पीएम मोदी?

पीएम नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भारत के पुराने सहयोगी रूस को युद्ध को लेकर जो संदेश दिया उसकी पूरी दुनिया में जमकर तारीफ हो रही है। दरअसल, मोदी ने व्लादिमीर पुतिन को साफ-साफ कहा था कि यह समय यु्द्ध का नहीं है और सभी मुद्दे का समाधान बातचीत से होनी चाहिए। पीएम के इस बयान को पूरी दुनिया में सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा गया।

अपने ‘शांति पाठ’ वाले बयान से पीएम मोदी पूरी दुनिया में छा गए हैं। अमेरिकी मीडिया में मोदी के बयान को बड़ी तरजीह दी थी। इसे पीएम मोदी के बढ़ते वैश्विक रसूख से भी जोड़ा जा रहा है। हालांकि, कई लोग इसे भारत की विदेश नीति में बदलते रुख के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन कुछ जानकार इसे भारत का एक संतुलित बयान बता रहे हैं। क्योंकि एक हकीकत ये भी है कि भारत ने रूस के खिलाफ कई अहम प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र में अनुपस्थित रहा था।

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पीएम का बयान, UN में मैक्रों ने कर दी तारीफ
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करने के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने पीएम मोदी के रूस को दिए गए बयान की तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सही कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है। यह पश्चिम से बदला लेने और उसे पूर्व के खिलाफ खड़ा करने का समय नहीं है। यह वक्त है कि हम सभी संप्रभु राष्ट्र हमारे समक्ष मौजूद चुनौतियों का एकजुट होकर मुकाबला करें।’


मोदी ने पुतिन को सुनाई थी खरी-खरी
SCO सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन से कहा कि भारत और रूस के संबंध मजबूत हुए हैं और दुनिया हमारी दोस्ती से अच्छी तरह परिचित है। हमारी दोस्ती 22 साल से लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि आज का युग युद्ध का नहीं है। हमें बातचीत से मुद्दों को सुलझाना चाहिए। इस बारे में कई बार पुतिन से फोन पर भी बातचीत हो चुकी है।

अबतक यूक्रेन युद्ध पर भारत ने तटस्थ रुख अपना रखा था। संयुक्त राष्ट्र में कई अहम प्रस्ताव पर भारत अनुपस्थित रहा था। हालांकि, भारत ने कुछ दिन पहले संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ मतदान किया था। संयुक्त राष्ट्र की 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को वीडियो-टेलीकॉन्फ्रेंस के जरिए बैठक को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया। इस मामले में पहली बार भारत ने रूस के खिलाफ वोट किया।


मोदी के बयान के मायने समझिए
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल (Kanwal Sibal) ने रूस पर दिए गए पीएम मोदी के बयान को बड़ी तैयारी और सोच-समझकर तैयार किए गए दस्तावेज की तरह बताते हैं। सिब्बल का मानना है कि एक गैर पश्चिम ब्लॉक की तरह SCO एक बहुपक्षीय व्यवस्था के तौर पर खुद को पेश कर रहा है। SCO की हमारी सदस्यता बहुपक्षीय दुनिया में हमारी अपनी प्रतिबद्धता को भी दिखाता है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने समरकंद में बड़ी तैयारी के साथ रूस पर बयान दिया है। उन्होंने बैठक में न तो आतंकवाद, बहुपक्षीय दुनिया और न सुरक्षा के मु्द्दों का जिक्र किया।

उन्होंने यूक्रेन का जिक्र दुनियाभर में ग्लोबल सप्लाई चेन और अप्रत्याशित ऊर्जा संकट के मुद्दे को सामने लाने के लिए किया। वहीं, LAC पर चीन के बिना पूरी तरह से पीछे हटने तक भारत कोई बातचीत के लिए तैयार नहीं दिखा। मोदी और शी जिनफिंग के बीच SCO में बातचीत नहीं होने के पीछे यही कारण रहा। मोदी पुतिन की बातचीत में भारतीय प्रधानमंत्री ने दुनिया के सामने खड़े संकट का जिक्र किया। विकासशील देशों के सामने ईंधन का संकट और खाद्य संकट की भी बात रखी। उन्होंने पुतिन से कहा कि यह समय युद्ध का नहीं है। मैंने व्लादिमीर पुतिन से इस मसले पर कई बार कहा है कि ऐसे मुद्दों को बातचीत और कूटनीति के जरिए हल किया जा सकता है।


मोदी का बयान, क्या भारत की बदली विदेश नीति?
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत की विदेश नीति बदल गई है? दरअसल, कोई भी देश अपनी विदेश नीति इतनी जल्दी नहीं बदलता है। इसके पीछे एक बड़ी सोच काम करती है। रूस पर दिए गए पीएम मोदी के बयान को भारत की अहिंसा के नजरिए से देखा जाना चाहिए। रूस ने कई मुद्दों पर भारत का साथ दिया है। भारत ने भी रूस पर जो बयान दिया है वह दुनिया के संदर्भ में है। क्योंकि युद्ध से दुनिया को काफी संकट का सामना करना पड़ रहा है। ये जरूर है कि भारत पर यूक्रेन युद्ध को लेकर एक साफ-साफ बयान देने का दबाव जरूर था।

लेकिन बावजूद इसके संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ कई अहम प्रस्ताव पर भारत अनुपस्थित रहा था। चूंकि आज दुनिया का शक्ति संतुलन बहुध्रुवीय है ऐसे में कोई भी देश लगातार किसी एक देश के साथ हमेशा या हर मुद्दे पर नहीं रह सकता। भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसके अपने हित हैं। चाहे सुरक्षा का मसला हो या द्विपक्षीय संबंध भारत अपनी हितों के अनुसार अगल-अलग देशों से रिश्ते रखता है। चीन से साथ तनातनी पर अमेरिका ने भारत का साथ दिया था। बावजूद इसके भारत ने यूक्रेन के मुद्दे पर बेहद कूटनीतिक रुख अपनाया।

रूस को सुना मोदी दुनिया के बड़े नेताओं में हो गए शुमार
पीएम मोदी के रूस पर दिए गए बयान के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। पश्चिमी देश से लेकर अमेरिका तक भारत के इस रुख की तारीफ कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट कर मैक्रों संयुक्त राष्ट्र में दिए गए बयान को ट्वीट करते हुए पीएम मोदी को वैश्विक नेता बताया है। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने भी भारत के बयान की तारीफ की थी।

उन्होंने कहा था कि आप चीन और भारत से जो सुन रहे हैं, वह यूक्रेन पर रूस के आक्रमण का न केवल यूक्रेन के लोगों बल्कि पूरी धरती के लोगों और देशों पर असर को लेकर विश्व की चिंता दिखाता है। मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के बयान को कोट भी कर दिया है। मैक्रों के कोट को दुनिया में भारत की बढ़ती साख के रूप में देखा जा रहा है। भारत ने यूक्रेन युद्ध पर जो रुख अपनाया है वह बेहद सधा और संतुलित रहा है।

ग्लोबल लीडर की लिस्ट में भी नंबर वन मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्लोबल लीडर्स की लिस्ट में भी नंबर वन हैं। मॉर्निंग कंसल्ट सर्वे के अनुसार पीएम मोदी को ग्लोबल लीडर्स में 75% अप्रूवल रेटिंग मिली है। सर्वे में पीएम मोदी के बाद, मैक्सिकन राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्रेडोर 63 प्रतिशत और इतालवी प्रधान मंत्री मारियो ड्रैगी 54 प्रतिशत रेटिंग के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। 22 विश्व नेताओं की सूची में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन 41 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग के साथ पांचवें स्थान पर हैं। लिस्ट में बाइडन के बाद कनाडा के राष्ट्रपति जस्टिन ट्रूडो 39 प्रतिशत और जापानी प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा 38 प्रतिशत अप्रूवल रेटिंग मिली है।

साभार लिंक

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