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कठुआ केस: महिलाओं के जांच दल ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच को किया खारिज! आखिर पुलिस ने क्यों अपनी रिपोर्ट में दस दिनों के अंदर किया था तीन बार बदलाव?

सभी महिला सदस्यों वाली Fact finding team ने कठुआ रेप और हत्या मामले में हुई पुलिस जांच की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों को ही इस टीम का सदस्य बनाया गया है। इस टीम ने तथ्य आधारित अपनी रिपोर्ट प्राइम मिनिस्टर ऑफिस (पीएमओ) के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को सौंप दी है। इसके साथ ही गृह मंत्रालय से इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।

मुख्य बिंदु

* टीम में शामिल बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों ने गृह मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट
* तथ्यान्वेषण दल ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अलग-अलग बातें सामने आने पर उठाया सवाल

कठुआ रेप और हत्या मामले में महिला बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों की गठित तथ्य अन्वेषण टीम ने अपनी रिपोर्ट में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ पुलिस जांच की सच्चाई पर सवाल खड़ा किया है। मालुम हो कि दैनिक जागरण ने काफी पहले ही पोस्टमार्टम की सच्चाई पर सवाल उठाते हुए कठुआ रेप और हत्या मामले को उजागर किया था। बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों की इस टीम ने इस मामले को सीबीआई के हवाले करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस मामले की अभी तक हुई जांच में न केवल अनियमितता झलकती है बल्कि इससे जम्मू के लोगों में असुरक्षा की भावना भी पैदा की है।

अपनी रिपोर्ट में इस दल ने कहा है कि इस मामले में जम्मू-कश्मीर सरकार को वहां के स्थानीय लोगों की बातें सुनने की जरूरत है। इसके साथ ही सरकार को ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए ताकि जम्मू की आबादी को सरकार से विरक्ति हो। तथ्य अन्वेषण के लिए सभी महिलाओं की बनाई गई इस टीम में सेवानिवृत्त जिलाधीश मीरा खदक्कर, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा, वरिष्ठ पत्रकार सर्जाना शना, दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेशर सोनाली चितालकर तथा सामाजिक कार्यकर्ता मोनिका अगरवाल शामिल हैं। तथ्यान्वेषी इस ग्रुप ने को गृह मंत्री राजनाथ सिंह तथा प्रधान मंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उनकी रिपोर्ट के बारे में बताते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा है कि इसमें दल के सदस्यों ने अपना नजरिया रखा है। चूंकि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए अभी इसके बारे में सार्जनिक रूप से बातचीत करना किसी के लिए अच्छा नहीं होगा, उसके लिए भी नहीं जो खुद को बेगुनाह साबित करने का प्रयास कर रहे हैं।

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हालांकि जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस घृणित अपराध को जिसने भी अंजाम दिया है उसे क्षमा नहीं मिल सकती, उसे कठोर से कठोर सजा मिलेगी, लेकिन वही दूसरी ओर यह भी देखना हमारा कर्तव्य है कि अगर कोई निर्दोष है तो उसे भी न्याय मिले। मैं आश्वस्त हूं कि कोर्ट इन सभी चीजों को संज्ञान में अवश्य लेगा। वहीं इस दल की एक महिला सदस्य मोनिका अरोड़ा ने कहा है कि पुलिस जांच में कई प्रकार की विसंगतियां मिली है।

आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट से की अपील
कठुआ में आठ साल की बच्ची के रेप और हत्या मामले को दो मुख्य आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। आरोपियों ने सुप्रीम से इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का अनुरोध किया है ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके । इसके साथ ही इस मामले को चंडीगढ़ कोर्ट स्थानांतरित ना करने की भी गुहार लगाई है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने इस मामले को चंडीगढ़ कोर्ट स्थानांतरित करने की अपील की है।

तथ्य अन्वेषी रिपोर्ट में उठाए गए सवाल
Fact finding team ने रिपोर्ट में जो सवाल उठाए गए हैं वे सारे सवाल निष्पक्ष ग्राउंड रिपोर्टिंग में पहले ही कही जा चुकी है। फिर भी इस मामले में बलात रूप से एक पक्षीय रिपोर्ट को तरजीह दी जा रही है। Fact finding team में कहा गया है कि पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि जिस जगह पीड़ित बच्ची को छह दिनों तक रखा गया है वह मंदिर नहीं बल्कि देवीस्थान है जहां तीन गांव के लोग लगातार आते-जाते रहते हैं। जबकि उस समय त्योहार का था। ऐसे सवाल उठता है कि कैसे वहां बच्ची को छिपा कर रखा जा सकता है? दल ने यह भी सवाल उठाया है कि आखिर क्यों जांच दलों ने दस दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट में तीन बार बदलाव किया? आखिर 17 और 19 मार्च को किए गए पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इतनी विसंगतियां क्यों हैं? जब जांच में यह तय हो गया था कि पीड़िता को देवी स्थान में ही रखा गया था तो सवाल उठता है कि फिर क्यों नहीं उस देवीस्थान को सील किया गया? तथ्य अन्वेषण दल ने इस प्रकार के कई सवाल खड़े किए हैं जिसका जवाब देना अब इस मामले की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों के साथ प्रशासनि अधिकारियों देना मुश्किल होगा।

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