ईसाई मिशनरी ने तमिलनाडु में जब कमल हसन जैसे मोहरों का इस्तेमाल किया है, तब जयेंद्र सरस्वती का जाना अपूरणीय क्षति है!

कांची कामकोटि के शंकराचार्य आदरणीय #JayendraSaraswathi जी 82 वर्ष की अवस्था में आज परलोक सिधार गये। उन्हें कोटि-कोटि श्रद्धांजलि।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने आत्मकथा में लिखा था कि किस तरह से कांग्रेस की तत्कालीन ‘मनमोहनी सरकार’ ने दिवाली की रात उन्हें गिरफ्तार कराया था। प्रणव ने इसका विरोध किया था और पूछा था कि क्या किसी और मजहब/रिलीजन के धर्म गुरू को उसके त्यौहार वाले दिन सरकार ऐसे गिरफ्तार करने की हिम्मत रखती है? प्रणव ने एक तरह से अपनी किताब के माध्यम से यह दर्शाया कि सोनिया गांधी हिंदुओं से नफरत करती थी!

वास्तव में दक्षिण भारत में बड़े पैमाने पर चल रहे धर्मांतरण को रोकने में जयंत सरस्वती जी बड़ी भूमिका निभा रहे थे, इसीलिए ईसाई मिशनरियों के निशाने पर वो हमेशा से थे। ईसाई ( जेविमर मोरो की पुस्तक रेड साड़ी के अनुसार सोनिया गांधी अभी भी कैथोलिक है।) सोनिया गांधी के समय धर्मांतरण का धंधा भारत में सबसे तेजी से फला-फूला। हिंदुओं का सबसे अधिक अपमान यूपीए के इसी कार्यकाल के दौरान हुआ। इसीलिए सत्ता में आते ही उसी साल झूठे केस में कांचि कामकोटि के इस 69 वें शंकराचार्य को नवंबर 2004 में गिरफ्तार कर लिया गया। इसमें तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता की भी बड़ी भूमिका थी! आखिर ईसाईयों के वोट बैंक का सवाल था! बाद में अदालत से जयेंद्र सरस्वती जी को बरी कर दिया गया, जिससे यह साबित हुआ कि उन्हें झूठे केस में फंसाया गया था।

दक्षिण भारत में ईसाईयों की बड़ी संख्या है और यह सब दलितों को कन्वर्ट करके बना है। 80 के दशक में मीनाक्षीपुरम में बड़ी संख्या में दलितों का एक साथ कन्वर्जन हुआ था, जिसके विरोध में उप्र के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरू महंत अवेद्यनाथ ने तब संसद से इस्तीफा तक दे दिया था।

वर्तमान में सुपरस्टार रजनीकांत के राजनीति में आने की काट के लिए दक्षिण भारत के चर्चों ने फिल्म स्टार कमल हसन को अपना मोहरा बनाया है। डॉ सुब्रहमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर बताया है कि ‘कमल हसन विदेशी क्रिश्चियन मिशनरियों का प्रतानिधि है। करण थापर को दिए एक पुराने साक्षात्कार में कमल हसन ने कहा दा कि वह ईसा के संदेश का प्रचार करना चाहता है।’

रजनीकांत राष्ट्रवादी और हिंदू धर्म को लेकर राजनीति में आगे बढ़ सकते हैं, जिसे रोकने की कोशिश विदेशी ईसाई मिशनरीज व चर्च कमल हसन-सोनिया गांधी को लेकर करेंगे। ऐसे नाजुक समय में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का जाना पूरे हिंदू समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।

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