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रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा ममता बनर्जी आपकी गन्दी राजनीति के कारण अब नहीं करता आपको दीदी कहने का मन!

कैलाश विजयवर्गीय। पश्चिम बंगाल के टोल नाकों पर भारी मालवाहक वाहनों के आंकड़े एकत्रित करने के लिए सेना के रूटीन अभ्यास को लेकर तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों को लेकर सेना के अफसर और जवानों में नाराजगी है। ममता बनर्जी के आरोपों से सेना आहत है। सेना की तरफ से सच्चाई सामने रखने के बावजूद ममता बार-बार आरोप लगाती रही है और सेना को हटने के लिए कहा। राजनीतिक लड़ाई में सेना को घसीटना वाकई बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

आज तक सेना को लेकर किसी ने इस तरह के आरोप नहीं लगाए। ममता ने सेना पर तख्ता पलट करने का आरोप लगाकर यह साबित करने की कोशिश है कि भारत पाकिस्तान बन रहा है। हमारी सेना का गौरवशाली इतिहास रहा है। सेना पर इस तरह के आरोप लगाकर ममता ने भारतीय लोकतंत्र और जनता का अपमान किया है। याद कीजिए जब आपातकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री सेना का राजनीतिक इस्तेमाल करना चाहती थी तो उस समय के सेना अध्यक्ष ने बड़ी मजबूती के साथ इंकार कर दिया था। उनका कहना था कि सेना इस मसले में नहीं पड़ेगी। गौरवमयी परम्परा वाली भारतीय सेना को राजनीतिक लड़ाई में घसीटने को लेकर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सही मुद्दे उठाये हैं। ममता को पत्र लिखने से पहले संसद में तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के हंगामे और आरोपों पर रक्षा मंत्री ने कहा था कि यह उनकी हताशा का परिणाम है।

भारी मालवाहक वाहनों को लेकर सेना पिछले कई वर्षों से टोल नाको और पूरे देश में जानकारी जुटाने के लिए इस तरह के अभ्यास करती रही है। सेना ने टोल नाको से जानकारी जुटाने के लिए केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं कई और राज्यों में अभ्यास किया था। सेना के इस रूटीन अभ्यास को लेकर किसी और राज्य आपत्ति दर्ज नहीं कराई। केवल ममता बनर्जी ने ही गंदी राजनीति के तहत सेना पर तख्त पलट के आरोप लगाए। किसी सरकार को बेदखल करने के लिए हमारे संविधान में पूरी व्यवस्था है। इसके लिए सेना की जरूरत नहीं है। हमारे यहां अदालते हैं, जहां किसी सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने के मसले पर आखिरी फैसले होते हैं। सबसे ज्यादा हैरानी इस बात होती है कि राज्यों की संबधित एजेंसियों के साथ तालमेल करके ही सेना ऐसे अभ्यास करती है, इसके बावजूद सेना पर आरोप लगाए गए। सेना की कोशिश रहती है कि उसके अभ्यास के दौरान जनता को कोई परेशानी न हो। सेना की तरफ से बाकायदा प्रशासन और पुलिस को पूरी जानकारी भेजी जाती है। सेना पहले यह अभ्यास 28,29 और 30 नवंबर को करना चाहती थी. पर उस दिन विपक्षी दलों के भारत बंद तथा विरोध प्रदर्शनों के कारण पुलिस प्रशासन की तरफ 1और 2 दिसंबर को अभ्यास करने की सलाह दी गई। प्रशासन-पुलिस की सलाह के कारण ही अभ्यास की तारीख बदली गईं। सेना और पुलिस के बीच हुए पूरे तालमेल के बावजूद ममता बनर्जी ने सेना पर कोई जानकारी न देने का आरोप लगाया। ममता बनर्जी ने सेना पर झूठे आरोप लगाकर अपने दीदी होने पर भी सवाल उठा दिए हैं। यह दीदीगिरी का नहीं, राजनीतिक गुंडागर्दी का उदाहरण है।

रक्षा मंत्री पर्रिकर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भेजे पत्र में कहा है कि मुझे बेहद दुख है कि आपने विवाद में सेना को भी खींच लिया। उन्होंने लिखा है कि इस मामले में आपकी ओर से सेना पर जो आरोप लगाए गए उससे देश के सैन्य बलों के मनोबल पर विपरीत असर पड़ने की आशंका है। यह सब जानते हैं कि मनोहर पर्रिकर की राजनीति में क्या छवि है। साफसुथरी छवि और सादगी से भरे मनोहर पर्रिकर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी काम करने की खूबियों के कारण ही गोवा से दिल्ली बुलाया। मनोहर पर्रिकर जितने सादगी भरे हैं, उतने ही भावुक हैं। इसी कारण झूठे आरोपों से उनका मन दुखी हो जाता है। दुखी होकर ही उन्होंने ममता बनर्जी को पत्र भेजा है।

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8 दिसंबर को लिखे पत्र में रक्षा मंत्री पर्रिकर ने कहा है मीडिया में आपकी ओर से लगाए गए आरोपों से मैं बेहद आहत हूं। यदि आप राज्य की संबंधित एजेंसियों से इस बारे में राय लेतीं तो आपको पता लगता कि सेना और उनके बीच क्या संवाद हुआ था। सेना और सूबे की एजेंसियों ने कई स्थानों मिलकर अभियान चलाया था। पर्रिकर ने यह भी याद दिलाया है कि इस तरह के मॉक ड्रिल सेना ने बंगाल में ही नहीं कई और राज्यों में किए। ऐसे कई अभ्यास बीते कुछ सालों में देश के अन्य राज्यों में भी हुए हैं। यह अभ्यास राज्य की एजेंसियों के समन्वय से ही होते हैं। रक्षा मंत्री ने पत्र में यह लिखना कि रतीय सेना हमारे देश के सबसे अनुशासित संस्थानों में से एक है। हमारी सेना राष्ट्र की सुरक्षा के लिए समर्पित है। देश को सेना के पेशेवर और गैरराजनीतिक व्यवहार पर गर्व है। उनका यह भी कहना सही है कि ममता बनर्जी के झूठे आरोपों से सैन्य बलों के मनोबल पर विपरीत असर पड़ सकता है।

उन्होंने ममता बनर्जी को यह भी याद दिलाया कि सार्वजनिक जीवन का लंबा अनभुव होने के कारण उनसे इस तरह की उम्मीद नहीं की जा सकती। पर्रिकर ने यह भी कहा है कि सैन्य अधिकारी राज्य की एजेंसियों को जवाब देने के लिए सीधे सीधे रिकॉर्ड रखने के लिए मजबूर हो गए। इसके लिए उन्हें आंकड़ा संग्रह अभियानों के कार्यक्रम में बदलाव सहित राज्य की संबद्ध एजेंसियों के साथ अपने संवाद के साक्ष्य देने पड़े। सचमुच रक्षा मंत्री ने भविष्य सेना के सामने आने वाली कठिनाइयों के कारण ही ऐसा पत्र ममता बनर्जी को भेजा है। सेना पर तख्ता पलट की कोशिश के आरोप लगाने वाली ममता बनर्जी से केवल रक्षा मंत्री और सेना को ही जवाब नहीं चाहिए, देश की जनता जानना चाहती है कि किस मकसद से उन्होंने सेना को किस गंदी राजनीति तहत विवाद में घसीटा। अब जवाब दो ममता बनर्जी। आपकी इस गंदी राजनीति के कारण अब आपको दीदी कहने का मन नहीं होता। इसी कारण बार-बार ममता बनर्जी लिखना पड़ा। ममता बनर्जी आपको जनता को सेना के अपमान का जवाब तो देना ही साथ ही राज्य में नकली नोटों की भरमार होने की सफाई भी दो। यह बताओ कि राज्य में आपकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के पास बम और हथियार कहां से आते हैं। कहीं यह डर तो आपको नहीं सता रहा था कि कहीं सेना अपने अभ्यास के दौरान वाहनों में आने वाले नकली नोट, बम और हथियार न पकड़ ले।

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लेखक भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं और पश्चिम बंगाल के प्रभारी हैं। राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से राय के लिए जाने जाते हैं।

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