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पहले मीडिया को घर में बैठाया और अब उससे ही परहेज है सैफ अली खान को!

पेपराज्जी का मतलब होता है ख्यातनाम लोगों की निजी ज़िंदगी में घुसपैठ कर उनके फोटो लेना। उन पलों को कैमरे में कैद करना पत्रकारिता की भाषा में ‘पेपराज्जी’ माना जाता है। ताज़ा खबर ये है कि सैफ अली खान के सुपुत्र तैमूर अब ख़बरों में दिखाई नहीं देंगे। तैमूर के लाखों ‘काल्पनिक प्रशंसक’ जान नहीं सकेंगे कि आज तैमूर ने ब्रेकफास्ट में क्या खाया और उसकी शाम की पॉटी किस रंग की थी। सैफ को पेपराज्जी का डर सता रहा है। उन्हें लग रहा है कि तैमूर को ओवर एक्सपोज किया जा रहा है जो उसके सर्वांगीण विकास के लिए ठीक नहीं है। सैफ को ये सद्बुद्धि आज ही क्यों आई है?

तैमूर दो वर्ष का हो गया और इन दो सालों में ऐसा कोई दिन नहीं रहा जब तैमूर की कोई खबर इंटरनेट पर रोज की ख़बरों का हिस्सा न बनी हो। तैमूर तो तभी ख़बरों का हिस्सा बन चुका था, जब वह अपनी माँ के पेट में था। तैमूर नाराज़ हुआ तो खबर, तैमूर खुश हुआ तो खबर बनती थी।

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आज पेपराज्जी से घबराने वाले सैफ और करीना उस वक्त ख़ुशी-ख़ुशी तैमूर की ख़बरों का हिस्सा बन जाया करते थे। इस परिवार ने मीडिया अटेंशन का पूरा मज़ा लूट लिया और अब नैतिकता का चोला ओढ़े बैठा है। दरअसल सैफ अली खान की कोई फिल्म प्रदर्शित होती है तो उनका कोई ऐसा बयान जरूर आता है कि सभी का ध्यान उनकी ओर चला जाता है।

सैफ की नई फिल्म ‘बाजार’ प्रदर्शित हुई और बॉक्स ऑफिस पर नरम पड़ गई। ऐसे में सैफ अली खान को कोई न कोई बयान देना ही था, जिससे वे चर्चा में आ सके। दो साल पूर्व अक्षय कुमार की एक फोटो ने सभी का ध्यान आकर्षित कर लिया। एक इवेंट से बाहर आते समय उन्हें मीडिया ने घेर लिया। कैमरे चमचमाने लगे। सभी कैमरों का निशाना अक्षय नहीं, उनकी बेटी थी। मीडिया की भनक लगते ही अक्षय ने अपनी बेटी को अंक में भर लिया। उसे इस तरह छुपाया कि कोई भी उनकी बेटी का चेहरा फोटो में नहीं दिखा सका।

पेपराज्जी इसे कहते हैं। तैमूर को डेली डोज की तरह रोज पाठक को दिखाना पेपराज्जी नहीं बल्कि इमेज चमकाने का प्रबंध है। सैफ और करीना को अपने बेटे को कभी मीडिया से छुपाना नहीं पड़ा क्योकि उनकी मंशा यही थी कि तैमूर लोगों के सामने आए। उसकी चर्चा हो और आने वाले वक्त में पापा के लॉन्च पेड से वह लॉन्च हो सके। शायद पाठकों को पता नहीं होगा कि ख़बरों में बने रहने के लिए बड़े सितारे मीडिया को बाकायदा भुगतान करते हैं।

सैफ के घर के बाहर हर रोज दो तीन कैमरामैन तैनात रहते थे। इनकी मौजूदगी की खबर सैफ दम्पति को भी थी लेकिन उस वक्त उन्हें कोई खतरा महसूस क्यों नहीं हुआ। यहाँ तक कि मीडिया ने ये भी बता दिया कि तैमूर की देखभाल करने वाली आया का वेतन ढाई लाख रूपये प्रति माह है। मीडिया उनके घर की खबर बाहर ले आया और उन्हें फिर भी खतरा महसूस नहीं हुआ।

तैमूर कहीं भी जाएं पैपराजी वहां पहले ही मौजूद रहती। उनके जन्म के कुछ समय बाद तो ऐसा हुआ कि तैमूर की कोई आउटिंग मिस न हो जाए इसके लिए कैमरामैन सैफ और करीना के घर के बाहर ही डटे रहते। वैसे पेपराज्जी उनके ही साथ होती है जो अपने निजी पल मीडिया से छुपाने का प्रयास करते हैं। पेपराज्जी का शिकार लेडी डायना को माना जा सकता है जो ब्रिटिश फोटोग्राफर मार्क सांडर्स के कारण असमय मौत के गाल में समा गई थी। इसके शिकार अक्षय कुमार जैसे पिता होते हैं जो बच्ची को सीने से लगाए पीठ पर फोटोग्राफरों के क्लिक और ताने खाते हैं।

सवाल तो खरा है। सैफ अली खान जैसे सुलझे हुए व्यक्ति को ये समझने में देर क्यों लगी कि मीडिया की सोहबत उनके दो वर्षीय बेटे के लिए अच्छी नहीं है। क्या ये बयान केवल ताज़ा फिल्म की धीमी गति को तेज़ करने के लिए दिया गया या वाकई वे समझ चुके हैं कि कच्ची उम्र में बेटे को लाइम लाइट से दूर रखा जाए। पेपराज्जी का भरपूर लुत्फ़ लेने के बाद उनको ये ज्ञान प्राप्त हुआ है। डकार लेने के बाद बिल्ली को यही लगता है कि उसे अब हज पर चले जाना चाहिए।

URL: Saif-Kareena decided to keep Taimur away from paparazzi?

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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