नेशनल हेरॉल्ड केस मामले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने स्वामी को दस्तावेज पेश करने और अधिकारियों को बुलाने की मंजूरी दी!

दो सालों तक चली तीखी बहस तथा दोनों तरफ से लगे आरोप-प्रत्यारोप के बाद आखिरकार नेशनल हेरॉल्ड केस अपने परिणाम की ओर आगे बढ़ा। लगता है इस मामले को लेकर भाजपा नेता सुब्रहमण्यम स्वामी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच छिड़े युद्ध का जल्द परिणाम निकलेगा। कोर्ट ने भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी को दस्तावेज पेश करने तथा इस मामले में संबंधित अधिकारियों को बुलाने का निर्देश दे दिया है। हालांकि विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के अतिरिक मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने स्वामी की उस मांग को खारिज कर दिया जिसके तहत उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व खासकर सोनिया गांधी को कोर्ट में जमा दस्तावेज स्वीकारने या अस्वीकारने की चुनौती दी थी। उन्होंने 21 जुलाई से स्वामी को दस्तावेज जमा करने तथा उसकी वास्तविकता की जांच के लिए संबंधित अधिकारी को बुलाने का निर्देश दिया है।

मुख्य बिंदु

* आपऱाधिक प्रक्रिया संहिता के तहत केस दायर करने के बाद सोनिया गांधी की स्थिति विषम हो गई है
* सुप्रीम कोर्ट में जमा दस्तावेज ही सोनिया गांधी के लिए न उगलते बनता है न निगलते बनता है

सांसदों और विधायकों से संबंधित मामले की सुनवाई के लिए अलग से बनाए गए नए कोर्ट ने भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले का निपटारा एक साल के अंदर करने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने आयकर द्वारा लगाए गए 249 करोड़ रुपये जुर्माने के खिलाफ अपील करने के लिए यंग इंडियन से 10 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था।

गौरतलब है कि कोर्ट में जमा दस्तावेज को स्वीकारने की स्वामी की मांग को सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत सभी कांग्रेसी नेता साल 2016 से विरोध कर रह थे। हालांकि कोर्ट ने स्वामी की मांग नहीं मानी है लेकिन दस्तावेज पेश करने और उसकी वास्तविकता जांचने के लिए संबंधित अधिकारियों को बुलाने का निर्देश दिया है। एक प्रकार से यह स्वामी की जीत ही है। क्योंकि इससे कोर्ट में पेश दस्तावेज की वास्तविकता का पता तो चल ही जाएगा।
हालांकि शुरू में ट्रायल कोर्ट ने दस्तावेज पेश करने का आदेश दिया था, लेकिन कांग्रेस द्वारा अपील करने के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर उस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद स्वामी ने दुबारा अर्जी भी दी लेकिन कोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि काफी संख्या में दस्तावेज होने की वजह से यह संभव नहीं है, अगर कुछ विशेष दस्तावेज की चर्चा होती तो बात अलग थी।

बाद में स्वामी ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 294 के तहत दस्तावेज स्वीकारने और नकारने का मामला दर्ज कराया। इस मामले में जब दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के दिसंबर में कांग्रेसी नेता को बुलाना शुरू किया तो कांग्रेस के वकील गुस्से से आग बबूला हो गए। सुनवाई रोकने के के लिए कांग्रेस के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कई विधि विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस के वकीलों ने जल्दबाजी में सुप्रीम कोर्ट में ऐसे दस्तावेज जमा करा दिए जो सोनिया गांधी के लिए गली की हड्डी बन गए है जो अब न निगलते बनता है न ही उगलते! ऊपर से स्वामी ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 294 के तहत मामला दर्ज करा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई दस्वावेज ऐसे हैं जिसे स्वीकार करने का मतलब होगा कि आप केस को स्वीकार कर रहे हैं और अगर अस्वीकार करते हैं तो फिर झूठे मामला का केस दायर किया जाएगा।

अब जब विशेष कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने स्वामी को दस्तावेज पेश करने और उसकी वास्तविकता की जांच करने का आदेश दे दिया है, ऐसे में कांग्रेस की मुश्किल एक बार और बढ़ने वाली है। स्वामी निश्चित रूप से अन्य दस्तावेजों के अलावा सोनिया गांधी और राहुल गांधी के फर्म यंग इंडियन के 415 करोड़ रुपये की आमदनी पर आयकर विभाग द्वारा 249 करोड़ रुपये के जुर्माने वाले दस्तावेज की जरूर जांच कराएंगे। और यह तो तय है कि इस मामले में आयकर विभाग ने खुद आकलन कर कांग्रेस नेतृत्व द्वारा पांच हजार करोड़ रुपये घपला उजागर किया है। इसी मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल में यह आदेश दिया है कि अगर यंग इंडियन 249 करोड़ रुपये जुर्माने के खिलाफ कोर्ट में अपील करना चाहता है तो उसे पहले कोर्ट में 10 करोड़ रुपये जमा कराना चाहिए।

URL: National Herald case: Swami gets permission to present document and call officials by Special Fast Track

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