हम ले के रहेगें आज़ादी

सारा कुमारी। (हम ले के रहेगें आज़ादी) एक बहुत ही मशहूर कहावत है, खुद को स्वतंत्र करने की इच्छा हो तो सबसे पहले कोई एक्शन नहीं लेना होता हैं, वरन मन में केवल एक विचार लाना होता हैं। फ्री होने का विचार आजकल एक Term बहुत Coin किया जाता हैं, Global, Glibslist, Globalization आम जनता को भरमाने के लिए तो इसका अर्थ ये बताया जाता हैं कि पूरे विश्व के लोग करीब आ रहे है, एक दुसरे की मदद कर रहें है, जिसके पास जो नहीं तो दूसरा दे रहा हैं, आपस में Healthy exchange हो रहा हैं।

परंतु ये तो कहने की बात है, असल अर्थ तो अंदर छुपा हुआ है, की आम जनता को कैद किया जा रहा हैं। अब 8 अरब की जनता को कैद करना आसान काम तो है नहीं, तो ग्लोबलाइजेशन की चतुराई का इस्तेमाल किया जा रहा हैं।

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इसका असल फायदा केवल elite class के लोगो का होगा। क्योंकि उनके लालच और महत्वाकांक्षाओं की कोई सीमा तो हैं नहीं, उनको तो धरती के एक एक व्यक्ती पर रूल करना है। इसमें बड़े बड़े बिजनेस मैन भी आते हैं, और सभी देश के पॉलिटीशियन भी आते है।

बड़े मज़  से ऊपर लेवल पर तो ये लोग विभक्तिकरण चाहते है, वहां तो कुछ चंद हज़ार लोग royal स्टेटस एंजॉय करना चाहते है। जहां सबका अपना अस्तित्व हैं, सबकी अपनी पर्सनल चॉइस हैं।अपने विचार हैं अपनी lifestyle हैं। अभी दावोस में WEF की मीटिंग में हर कोई attendee अपने प्राइवेट जेट में आ रहा था, भले ही एक प्लेन में एक ही व्यक्ती बैठा हों, फिर वहां उनकी पसंद के भोजन कभी जापान से सुसी आ रहीं है तो बेल्जियम से चॉकलेट, फ्रेंच वाईन और पता नहीं क्या क्या पर्सनल शौक़ पूरे किए जा रहे थे। लेकिन नीचे जो आम जनता हैं, उसको choice ना मिले, उन करोड़ों अरबों लोगों को एक ईकाई के रूप में ही गिना जाता हैं। जिनका अपना कोई मत, कोई विचार कोई इच्छा मायने नहीं रखती हैं। एक पिज़्ज़ा पूरी दुनियां में हर देश का हर व्यक्ती खाएं, एक एपल का फोन हर कोई खरीदे, एक Levi’s, की जींस हर कोई पहने, एक अमेजन से हर कोई सामान खरीदे, एक pfizer का टीका हर कोई लगवाए, बच्चों के प्रोडक्ट्स  J & J से हर कोई खरीदें, इसी तरह से SM में भी व्हाट्स ऐप, यूट्यूब, ट्विटर हर कोई यूज करे। ताकी बनाने और बेचने वाले बड़े बिजनेस मैन को आसनी हों।

ऐसे विश्व की 8 अरब की जनता को कुछ चंद लोग बगैर चेन से बांधे, बड़ी आसन  से  कैद कर रहें  है। शारीरिक गुलामी से विभत्स हैं, मानसिक गुलामी, और यहीं कैद दिन प्रतिदिन बढ़ती जाएगी। यदि हम एक बात मान लेंगे तो  चार और नए फरमान आ जाएंगे। ये हमे ऐसे स्टेज़ तक ले जाएंगे, जहां मानव की तरह हम सोचना ही बंद कर देंगे।

लोगों को कैद करने के लिए, इन एलिट क्लास का सबसे बड़ा हथियार हैं, मिडिया, आम जनता को ज्यादातर गुमराह मिडिया के द्वारा ही किया जाता हैं। हर आम व्यक्ती इनकी चालों को नहीं समझ सकता है। सही गलत का मूल्यांकन स्वतः नहीं कर सकता है।और दूसरा सबसे बड़ा tool हैं, सरकारी योजनाओं का लाभ, भारत की सरकारें इसका खूब इस्तेमाल करती हैं, जनता को सशक्त, स्वावलंबी ना बनाओ, अपितु सरकार पर निर्भर बनाओ, फिर चाहें जो मनमानी बात उनसे मनवा लो। हालांकि देश के प्रत्येक संसाधन पर हर देश वासी का हक़ है, कोई सरकार की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं है, हमारी चीज़ हमें ही  देकर, सरकार खुद वाह वाही लुटती हैं। और जनता को इनपर पूरी तरह से  निर्भर बना देती हैं। ताकी सरकार अपनी मनमर्जी के गलत सही फैसले ले सकें, कोई विरोध ना करें।

अब समय आ गया है, सरकारों को और अधिक निरंकुश ना बनने दिया जाए, इसका विरोध किया जाए इसकी सबसे बड़ी काट हैं जागरूकता, हर समाज में कुछ लोग ऐसे अवश्य होते है, जो इस evil डिजाइन को समझ सकते है, वो इनके एजेंडा का विरोध करते है, ऐसे व्यक्तियों का साथ देना होगा। जनता को मिल कर ये लड़ाई लड़नी होगी। सत्ता के केंद्रीकरण को समाप्त करके, उसका विकेंद्रीकरण करना होगा।

और ये काम सबसे अच्छे से सनातनी ही कर सकते है, क्योंकि हमारे यहां तो ईश्वर भी एक रूप या एक किताब में कैद नहीं है, यहां तो ईश्वर के कई रूप, कई साहित्य और कई पूजा पद्धति हैं, यहां सनातनी को और मजहब से हटकर,  दिल खोल के चॉइस दी गईं हैं, कोई कैद नहीं है, बल्की आज़ादी ही आज़ादी है। सनातनी का मूल विचार ही हैं, बौद्धिक स्वतंत्रता।

जय हिन्द जय भारत 

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