मीडिया और मीडिया-कर्मियों को जांच के दायरे में लाया जाए

राजकुमार सिंह। लोकतंत्र का चौथा खम्भा यानी मीडिया भी उतनी ही गहरी समीक्षा की मांग चाहता है जितना बाकी तीनो याने विधायिका ,न्यायपालिका और कार्यपालिका. मिडिया अपनी रिपोर्टिंग से जनमत बनाता है और बाकी तीनों को समर्थ रूप से प्रभावित करता है .
अतः जरूरी हो गया है की गहराई में जा मीडिया की गहरी जांच हो .

मैंने इमरजेंसी देखी है ,लड़ी है और तब की अधिकाँश मीडिया के चाल चरित्र चेहरे को देखा जाना है. एक प्रसिद्ध् पत्रकार ने ही कहा था ‘मीडिया को झुकने के लिए कहा था इंदिरा ने’! मीडिया घुटने के बल रेंकने लगी अब का मंजर और भयानक है .मीडिया का एक हिस्सा खुलेआम पाक की भाषा बोल रहा और पाक मीडिया उन्हें दिखा, सुना, बता अपने भारत विरोधी कुप्रचार का हथियार बना राग अलाप रहा भारत विरोधी .

कौन हैं ये और क्यूं ?

मैंने अमेरिका में ISI के क्षद्म एजेंट फई (जिसकी बा द में गिरफ्तारी हुयी और मुकदमा चला जेल भेजा गया अमेरिकियों द्वारा) द्वारा आयोजित कश्मीर आजादी के समर्थन में सेमिनारों में गए देखा सुना है भारत विरोधी स्टैंड लेते, पांचसितारा सुविधाएं पाकर. इन्हें देशद्रोही नहीं तो क्या कहेंगे ? बहुत बड़े नाम शामिल थे इनमे. अब देशहित में जरूरी हो गया है की मीडिया के ऐसे चरित्र को उजागर किया जाए. कमीशन इन्क्वारी तैनात हो और इनके धन, संपत्ति के साथ ही इनकी असली निष्ठा की जांच हो .मीडिया हाउसों की गहरी जांच हो .

देश को सही समाचार जानने का हक है .पूर्व सत्ता के दलालों ,धन्भ्रष्टों ,देशद्रोहियों का भौकाल बहुत हो चूका.अब इन्हें बेनकाब कर सजा देने का वक्त आ गया है. पराड़कर और गणेश शंकर विद्यार्थी की समर्पित पत्रकारिता पर कलंकों का देश इलाज करे. बहुत हो गया भाड़े के देश विरोधी कुत्तों का भौकाल!

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