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जीवंत हुआ शिवाजी का स्वर्णिम इतिहास, चार लाख की लागत से बनाई गई ‘भवानी तलवार’

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छत्रपति शिवाजी महाराज के पास तीन अनूठी तलवारें थी। भवानी, जगदम्बा और तुलजा। जगदम्बा तलवार इंग्लैंड के म्यूजियम में रखी है लेकिन भवानी और तुलजा तलवार दो सौ साल से अधिक समय से लापता हैं। मराठा सम्मान की प्रतीक इन तीन तलवारों को एक व्यक्ति लम्बे समय से भारत लाने के लिए प्रयासरत है। महाराष्ट्र के प्रोफेसर नामदेवराव जाधव ने ‘भवानी’ तलवार की एक प्रतिकृति तैयार करवाई है। इस तलवार को बनाने में लगभग चार लाख रूपये की लागत आई है। रूप-रंग, कद-काठी में ये तलवार हूबहू ‘भवानी’ की तरह दिखाई देती है। 10 दिसंबर से इस तलवार को पुरे महाराष्ट्र में प्रदर्शित किया जाने वाला है।

भवानी तलवार के पुनर्जन्म के लिए हथियार विशेषज्ञ सत्यजीत वैद्य की सेवाएं ली गई है। सत्यजीत वैद्य के पूर्वज भी शिवाजी महाराज की सेना के लिए शस्त्र बनाने का काम करते थे। सत्यजीत ने तलवार बनाने के लिए उसी ‘दमास्कस ब्लेड’ का इस्तेमाल किया है, जिससे कभी भवानी बनाई गई थी। तलवार कई धातुओं से बनाई गई है और इसकी सोने की बनाई गई है। तलवार को प्रदर्शित करने के साथ बताया जाएगा कि एक तलवार को किस नज़र से देखा जाना चाहिए। इस ख़ास तलवार के दर्शन के लिए महाराष्ट्र के लोगों को बेसब्री से इंतज़ार है।

निर्माणाधीन ‘भवानी’ तलवार का फोटो

भवानी तलवार को लेकर देश में बहुत भ्रम फैलाया गया है कि ये इंग्लैंड के संग्रहालय में रखी हुई है। वह तलवार ‘भवानी’ नहीं है।  7 मार्च 1659 को शिवाजी कोंकण के दौरे पर थे। इसी समय उनके सिपहसालार अम्बाजी सावंत ने एक स्पेनी जहाज पर आक्रमण किया था। जहाज से उन्होंने पुर्तगाल के सेनापति डिओग फर्नांडिस की एक बहुत खूबसूरत तलवार पाई। इसके ठीक बाद 16 मार्च को महाशिवरात्रि पर शिवाजी सप्तकोटेश्वर मंदिर पर आए। यहाँ अम्बाजी के बेटे कृष्णा जी ने शिवाजी को ये तलवार भेंट दी थी।

शिवाजी को तलवार बहुत पसंद आई। उन्हें इसकी लम्बाई और कम वजन बहुत भाया। शिवाजी ने इसके बदले में कृष्णा जी को तीन सौ सोने के सिक्के भेंट किये। आज के गोल्ड इंडेक्स के मुताबिक एक सिक्के की कीमत लगभग 2 लाख चालीस हज़ार होती है। इस हिसाब से इस तलवार की आज की कीमत 7 करोड़ बीस लाख आंकी जा रही है। तुलजा तलवार उन्हें ‘जेजुरी’ से भेंट मिली थी। शिवाजी को भवानी तलवार में अपने सैनिकों का भविष्य दिखाई दे रहा था। उन्हें युद्ध क्षेत्र में होने वाली सैनिकों की समस्या का हल मिल गया था।

जब मराठों और मुगलों की आमने-सामने लड़ाई होती थी तो मुगल लम्बे कद के चलते फायदे में रहते थे। इससे विपरीत मराठा सैनिकों की ऊंचाई सामान्य हुआ करती थी और छोटी तलवारों से वे दुश्मन पर ठीक से प्रहार नहीं कर पाते थे। इस समस्या का हल उन्हें ‘भवानी तलवार’ में दिखाई दिया। उन्होंने एक ‘अंतरराष्ट्रीय टेंडर’ जारी किया। वे अपने सैनिकों के लिए ‘भवानी’ जैसी हज़ारों तलवारें बनवाना चाहते थे। इनकी लम्बाई साढ़े चार फ़ीट थी। अंग्रेज़, फ्रेंच, पुर्तगीज, डच में से किसी को ये टेंडर नहीं मिला। स्पेन के राजा ने ये टेंडर भरा। ये तलवारे स्पेन के मेड्रिड के छोटे से गाँव टोलेडो में बनाई गई। टोलेडो में आज भी तलवारें बनाई जाती हैं।

स्पेन का राजा बेहद खुश हुआ। उसने इसके बदले में शिवाजी को ऐसी ही रत्नजड़ित तलवार भेंट की। इसमें माणिक्य जड़े हुए थे। इसी तलवार को शिवाजी ने ‘जगदम्बा’ नाम दिया। यही वह तलवार है जो इंग्लैंड के म्यूजियम में रखी हुई है। इसी तलवार को ‘भवानी’ कहकर भ्रम फैलाया गया। असली भवानी तलवार कहाँ है किसी को नहीं मालूम। एक साल पहले शिवाजी फाउंडेशन की ओर से आव्हान किया गया है कि ‘भवानी’ जिसके पास भी हो वह लौटा दें। तलवार लौटाने वाले को 72 करोड़ की भारी-भरकम राशि देने का वादा किया गया है। महाराष्ट्र के शिवाजी भक्त 72 करोड़ के लिए चन्दा करने के लिए भी तैयार हैं।

‘भवानी तलवार’ के 66 किलो वजनी होने की बात अफवाह है। शिवाजी महाराज का वजन ही 72 किलो था। ऐसे में इतनी वजनी तलवार उठाकर चलाना तकनीकी रूप से सम्भव ही नहीं है। इस तलवार का वजन केवल 1200 ग्राम था। ये भी अफवाह है कि शिवाजी ने ‘भवानी’ से अफजल खान का वध किया था। ये रत्नजड़ित तलवार युद्ध के लिए नहीं बनाई गई थी। शाही तलवारें युद्ध के लिए प्रयोग नहीं की जाती थी। अफजल खान का वध तो ‘बघनखे’ से किया गया था।

इंडिया स्पीक्स डेली से बात करते हुए नामदेवराव जाधव ने बताया कि नवनिर्मित ‘भवानी तलवार’ आगामी दस दिसंबर से महाराष्ट्र में प्रदर्शित की जाएगी। पुणे से इसकी शुरुआत की जाएगी। उन्होंने बताया क़ि तलवार को देखने के लिए शिवाजी भक्तों में बहुत उत्साह है।

सन 2002 में तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी स्पेन के दौर पर गए थे। वहां के लोगों को, खासतौर पर शस्त्र निर्माताओं को पता चला कि आडवाणी भारत से आए हैं तो वे तत्काल उनके सम्मान में उठ खड़े हुए और बोले ‘यू आर द लैंड फ्रॉम छत्रपति शिवाजी’। उस दिन देश के नेताओं को मालूम हुआ कि भारत को गाँधी-नेहरू के अलावा छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से भी जाना जाता है। भवानी तलवार महज एक शस्त्र नहीं है। इससे भारत का गौरव जुड़ा हुआ है। इस तलवार ने स्पेन को पहली बार विदेशी आय दिलवाई थी। भवानी एक सम्पूर्ण कथा है

URL: Sword’ created at the cost of four lakh

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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