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कोरोना काल के रक्षक या भक्षक? 19 दिन के इलाज की क़ीमत सवा नौ लाख!

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यह 19 दिन का बिल एक 70 वर्ष के व्यक्ति का है, जो कोरोना पॉज़िटिव डिक्लेयर हो गया था वो भी एक ऐसे टेस्ट द्वारा जिसकी एक्कूरेसी प्रूवेन नहीं है।

हमारे देश में लाखों लोगों को प्रतिदिन डॉक्टर्ड टेस्ट रिपोर्ट दी जाती है क्योंकि किसी भी व्यक्ति का इलाज शुरू करने के पहले हर डॉक्टर और अस्पताल पुनः अपनी रिपोर्ट करवाते हैं भले ही टेस्ट एक दिन पहले ही क्यों ना करवाये गये हों ? सभी जानते हैं कि डॉक्टर की लैब निश्चित है यदि आप किसी और लैब की रिपोर्ट लेकर पहुँचे तो डॉक्टर या अस्पताल आपका इलाज नहीं करेगा।

आज से कुछ वर्ष पहले तक दो महीने के अंदर की रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर या अस्पताल पेशेन्ट का इलाज शुरू कर देते थे परन्तु अब यह असंभव हो चुका है। आज मेडिसिन की दुनिया में जो हो रहा है, सभी जानते हैं फिर भी चुप हैं, यह मानव जाति के लिये बहुत बड़ा अभिशाप है।

हज़ारों लोगों को प्रतिदिन टेस्टिंग के कारण कोरोना पॉजिटिव डिक्लेयर कर दिया जाता है। मजबूरी में लोगों को अस्पताल जाना पड़ता है। ये सभी अस्पताल कोरोना पेशेन्ट का क्या इलाज कर रहे हैं जबकि आजतक कोई दवा बनी ही नहीं? दवा ना होते हुये भी इलाज मॉडर्न मेडिसिन का बहुत बड़ा चमत्कार है !

हमारे नेता एवं स्वास्थ्य मंत्रालय, लोगों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि हमारे देश का रिकवरी रेट बहुत हाई है ? इनसे कोई नहीं पूछता कि हाई रिकवरी रेट का क्या कारण है ? क्या हाई रिकवरी रेट में सरकार का या किसी दवा का या फिर किसी अस्पताल का योगदान है या फिर लोग अपने आप ही इम्यूनिटी के कारण रिकवर हो रहे हैं ?

आश्चर्य की बात यह है कि कोरोना की कोई दवा ना होते हुये भी 19 दिन के इलाज की क़ीमत 1 रुपये के भारी भरकम डिस्काउंट के बाद 9,25,600/- रुपये है। सोचिये यदि गलती से कोई दवा बन भी गई तो इलाज की क़ीमत ना जाने कहाँ पहुँच जायेगी इसका अंदाज़ा लगाना आपके मुश्किल होगा।

देशव्यापी लॉकडाउन ने पूरे देश की अर्थव्यवस्था को समाप्त कर दिया है।बिना आगाह किये पूरे देश का चकाजाम होने से खरबों का माल रोड पर ही बर्बाद हो गया, लाखों व्यापार समाप्त हो गये, करोड़ों की नौकरियाँ ख़तम हो गईं और करोड़ों आज मजबूरी में आधी तनख़्वाह पर काम कर रहे हैं।ऐसी परिस्थिति में जहॉं कोरोना का क़हर बढ़ता ही जा रहा है, क्या सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं बनती की कोरोना के इलाज को लेकर अस्पतालों के लिये ऐसे दिशानिर्देश दें कि सभी को किफ़ायती इलाज सम्भव हो सके?

देश की जनता से मेरा अनुरोध है कि अनायास कोरोना से डरें नहीं। कोरोना के नाम पर मीडिया, स्वास्थ्य मंत्रालय, दवा की कम्पनियों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर लोगों में इतनी दहशत भर दी है कि सभी भयभीत हैं। अस्पताल आपके डर का नाज़ायज फ़ायदा उठा रहें हैं। आप कोई टेस्ट ना करवायें। कोरोना से बचने का एकमात्र उपाय सस्टेन्ड इम्यूनिटी है,

जिसके लिये आपको किसी डॉक्टर, वैद्य, हकीम के सलाह की ज़रूरत नहीं है। घर का बना शुद्ध ताज़ा भोजन, नियमित व्यायाम, 6-8 घंटे की नींद, शरीर को आवश्यक आराम, तनाव मुक्त जीवन यही मूल मंत्र है सस्टेन्ड इम्यूनिटी का। अत: परिवार के सभी सदस्यों की इम्यूनिटी का ख़्याल रखें और निडर होकर स्वस्थ जीवन जियें तथा अस्पतालों द्वारा किये जा रहे इस प्रकार के आर्थिक अत्याचारों से बचें।

कमान्डर नरेश कुमार मिश्रा
फाउन्डर ज़ायरोपैथी
फ़ोन- 1800-102-1357; +91-888-222-1817
Email: zyropathy@gmail.com
Website: www.zyropathy.com

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1 Comment

  1. Sanjeev सनातन says:

    Corona के नाम पे ए गिद्ध Dr. और Hospital garib लोगो को गिद्ध की तरह Noch Noch मार रहे हैं और Behisab पैसा वसूल कर रहे हैं

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